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Chandauli News: चंद्रग्रहण के साथ शुरू होगा पितृपक्ष, गजकेसरी योग का बनेगा संयोग
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संवाद न्यूज एजेंसी पीडीडीयू नगर। अपने पूर्वजों को याद करने का पक्ष पितृपक्ष की शुरूआत सात सितंबर से होगी। इस वर्ष चंद्रग्रहण से इसकी शुरूआत हो रही है।
वहीं इस बार पितृपक्ष में गुरु और चंद्र की युति गजकेशरी योग बनाएगा। पूर्णिमा को लोग अपने नाना नादी का तर्पण करेंगे। पीडीडीयू नगर के चतुर्भुजपुर निवासी पं. कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि इस बार 15 दिनों को पितृपक्ष होगा। इस बार चंद्रग्रहण से इसकी शुरूआत होगी।
भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से तर्पण आदि की शुरूआत हो जाती है। इस तरह इस बार श्राद्ध पर्व की शुरूआत चंद्रग्रहण से होगी। पूर्णिमा की शुरूआत छह सितंबर की रात 12 बजे से सात सितंबर की रात 11:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान भारत में चंद्रग्रहण 7 सितंबर की रात 9:57 मिनट से शुरू होगा। ग्रहण का मोक्ष 3:28 घंटे बाद रात 1.27 बजे होगा।
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इसका सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा। ऐसे में दोपहर 12:58 बजे से पहले श्राद्ध और तर्पण करना उचित होगा। वहीं पूर्वज के मृत्यु की तिथि के दिन तर्पण और पिंडदान किया जाना चाहिए। आम तौर पर पिंडदान और तर्पण पुरुष करते हैं लेकिन नवमी को महिलाएं तर्पण करती हैं। 21 सितंबर को अमावस्या को ज्ञात अज्ञात सभी का तर्पण किया जाना चाहिए।
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वहीं इस बार पितृपक्ष में गुरु और चंद्र की युति गजकेशरी योग बनाएगा। पूर्णिमा को लोग अपने नाना नादी का तर्पण करेंगे। पीडीडीयू नगर के चतुर्भुजपुर निवासी पं. कुंज बिहारी मिश्र ने बताया कि इस बार 15 दिनों को पितृपक्ष होगा। इस बार चंद्रग्रहण से इसकी शुरूआत होगी।
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भाद्रपद की पूर्णिमा तिथि से तर्पण आदि की शुरूआत हो जाती है। इस तरह इस बार श्राद्ध पर्व की शुरूआत चंद्रग्रहण से होगी। पूर्णिमा की शुरूआत छह सितंबर की रात 12 बजे से सात सितंबर की रात 11:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान भारत में चंद्रग्रहण 7 सितंबर की रात 9:57 मिनट से शुरू होगा। ग्रहण का मोक्ष 3:28 घंटे बाद रात 1.27 बजे होगा।
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इसका सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाएगा। ऐसे में दोपहर 12:58 बजे से पहले श्राद्ध और तर्पण करना उचित होगा। वहीं पूर्वज के मृत्यु की तिथि के दिन तर्पण और पिंडदान किया जाना चाहिए। आम तौर पर पिंडदान और तर्पण पुरुष करते हैं लेकिन नवमी को महिलाएं तर्पण करती हैं। 21 सितंबर को अमावस्या को ज्ञात अज्ञात सभी का तर्पण किया जाना चाहिए।