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बाल यीशु के शांति जुलूस में उमड़े लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, चंदौली
Updated Mon, 30 Nov 2015 01:43 AM IST
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देश के चुनिंदा बाल यीशु चर्च से वार्षिक शांति धर्म जुलूस निकाला गया।
जुलूस चर्च से शुरू होकर पूरे नगर में भ्रमण किया। इसमें स्थानीय ही नहीं देश के कोने कोने से लोग शामिल हुए। इसके पूर्व चर्च में तमाम धार्मिक कार्यक्रम हुए। प्रार्थना सभा में नगर, प्रदेश और देश में शांति सौहार्द कायम रहे इसकी कामना की गई।
नगर का चर्च बाल यीशु तीर्थ पूरे देश के तीन तीर्थों में एक है। वर्ष 1835 में बना कैथोलिक चर्च की तर्ज पर नासिक और बंगलुरू में ही बाल यीशु चर्च है। यही कारण है कि इस चर्च का महत्व पूरे देश में है। यहां से शोभायात्रा निकलने की कहानी भी दिलचस्प है। मसीही समुदाय के लिए दिसंबर माह महत्वपूर्ण होता है।
बाल यीशु तीर्थ के फादर स्टैनले डिसूजा तीस वर्ष पहले नासिक में निकले वाले बाल यीशु के महापर्व तीर्थ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। वहां पहुंची संत मदर टरेसा ने फादर स्टेनले डिसूजा को मसीही धर्म के प्रचार प्रसार के लिए वाराणसी में भी इस तरह के जुलूस निकालने का आह्वान किया।
इसके बाद फादर ने तीस वर्ष पहले मुगलसराय में तीर्थ महापर्व पर जुलूस निकालने की शुरूआत की। यहां आकर शोभायात्रा में शामिल होने वालों को असीम शांति का अनुभव हुआ और प्रति वर्ष यहां शामिल होने वालों की भीड़ बढ़ने लगी।
यहां तक कि बाल यीशु के शोभायात्रा में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा भी शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष चार दिवसीय पर्व की शुरूआत 26 नवंबर से शुरू हुई।
प्रतिदिन सुबह नौ बजे से रात आठ बजे करिश्माई चंगाई प्रार्थना हुई। रविवार को सुबह से ही शोभायात्रा की तैयारी शुरू हो गई। सुबह करिश्माई चंगाई प्रार्थना के बाद दोपहर दो बजे शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा चर्च से शुरू होकर डीआरएम आफिस, जीटी रोड, परमार कटरा, नई सट्टी होते हुए रोजा कालोनी के रास्ते चर्च पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस के आगे मुख्य अतिथि काशी धर्म प्रांत के धर्माध्यक्ष रहे।
इसके अलावा सुल्तानपुर से आए डा. यूजीन रोबेलो, डा. रोज मेरी रोबेलो आदि रहे। सबसे आगे चर्च के फादर विपिन सीजे धर्म चिन्ह लेकर चल रहे थे।
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जुलूस चर्च से शुरू होकर पूरे नगर में भ्रमण किया। इसमें स्थानीय ही नहीं देश के कोने कोने से लोग शामिल हुए। इसके पूर्व चर्च में तमाम धार्मिक कार्यक्रम हुए। प्रार्थना सभा में नगर, प्रदेश और देश में शांति सौहार्द कायम रहे इसकी कामना की गई।
नगर का चर्च बाल यीशु तीर्थ पूरे देश के तीन तीर्थों में एक है। वर्ष 1835 में बना कैथोलिक चर्च की तर्ज पर नासिक और बंगलुरू में ही बाल यीशु चर्च है। यही कारण है कि इस चर्च का महत्व पूरे देश में है। यहां से शोभायात्रा निकलने की कहानी भी दिलचस्प है। मसीही समुदाय के लिए दिसंबर माह महत्वपूर्ण होता है।
बाल यीशु तीर्थ के फादर स्टैनले डिसूजा तीस वर्ष पहले नासिक में निकले वाले बाल यीशु के महापर्व तीर्थ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। वहां पहुंची संत मदर टरेसा ने फादर स्टेनले डिसूजा को मसीही धर्म के प्रचार प्रसार के लिए वाराणसी में भी इस तरह के जुलूस निकालने का आह्वान किया।
इसके बाद फादर ने तीस वर्ष पहले मुगलसराय में तीर्थ महापर्व पर जुलूस निकालने की शुरूआत की। यहां आकर शोभायात्रा में शामिल होने वालों को असीम शांति का अनुभव हुआ और प्रति वर्ष यहां शामिल होने वालों की भीड़ बढ़ने लगी।
यहां तक कि बाल यीशु के शोभायात्रा में तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा भी शामिल हो चुके हैं। इस वर्ष चार दिवसीय पर्व की शुरूआत 26 नवंबर से शुरू हुई।
प्रतिदिन सुबह नौ बजे से रात आठ बजे करिश्माई चंगाई प्रार्थना हुई। रविवार को सुबह से ही शोभायात्रा की तैयारी शुरू हो गई। सुबह करिश्माई चंगाई प्रार्थना के बाद दोपहर दो बजे शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा चर्च से शुरू होकर डीआरएम आफिस, जीटी रोड, परमार कटरा, नई सट्टी होते हुए रोजा कालोनी के रास्ते चर्च पहुंच कर समाप्त हुआ। जुलूस के आगे मुख्य अतिथि काशी धर्म प्रांत के धर्माध्यक्ष रहे।
इसके अलावा सुल्तानपुर से आए डा. यूजीन रोबेलो, डा. रोज मेरी रोबेलो आदि रहे। सबसे आगे चर्च के फादर विपिन सीजे धर्म चिन्ह लेकर चल रहे थे।