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व्यग्र संस्था का है प्रयास, घर घर चहके गौरैया की आवाज
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पीडीडीयू नगर। गौरैया संरक्षण के लिए काम कर रही व्यग्र फाउंडेशन की ओर से विश्व गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को नगर के रत्नदीप ज्वेलर्स के संचालक को लकड़ी के घोसले, पानी के लिए पात्र और गौरैया को खाने के लिए दाने दिए। इस दौरान घोसले और पानी के पात्र को घर के दरवाजे के ऊपर रखने का आह्वान किया गया। इस दौरान मौजूद लोगों से गौरैया के संरक्षण का संकल्प भी दिलाया गया।
इस मौके पर व्यग्र फाउंडेशन के नवनीत पांडेय उर्फ अतुल ने कहा कि नन्हीं सी चिड़िया गौरैया हमारे पर्यावरण चक्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमारी लापरवाही से गौरैया लुप्तप्राय हो गई है। इसे बचाने के लिए हम सभी को मिलजुल कर प्रयास करने की जरूरत है। कहा कि पक्के मकानों की वजह से गौरैया के परंपरागत आवास छिन गए हैं। ऐसे में लकड़ी का घोसला यदि घरों में लगाया जाए तो इसे बचाया जा सकता है। संस्था के बारे में बताया कि नौ जून 2018 से हमारी संस्था गौरैया संरक्षण की दिशा में काम कर रही है। फाउंडेशन से राष्ट्र ही नहीं पूरे विश्व से समर्थन मिल रहा है। कहा कि अब तक फाउंडेशन की ओर से ढाई हजार लोगों को घोसला दिया जा चुका है। इस मौके पर ज्वेलर्स के मंजीत सिंह जुनेजा, जगजीत सिंह मटरेजा, रूपेन्द्र सिंह जुनेजा, जसवीर सिह जस्सी, रजनीश तिवारी, फाउंडेशन के मनीष तिवारी, आशुतोष तिवारी रहे।
वीवंडर फाउंडेशन ने भी जगह जगह बांटे घोसले
संवाद न्यूज एजेंसी
पीडीडीयू नगर। जिले में गौरैया संरक्षण के लिए काम कर रही वीवंडर फाउंडेशन ने भी विश्व गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को जगह जगह लकड़ी के घोंसले वितरित किए। इस दौरान लोगों से घर में या घर के आस पास एक घोसला जरूर रखने का आह्वान किया। फाउंडेशन के चेयरमैन गोपाल कुमार ने बताया कि वीवंडर फाउंडेशन की नींव 14 दिसंबर 2017 को रखी गई थी। वीवंडर नाम का अर्थ घुमक्कड़ होता है, घुमक्कड़ों की टीम जो अलग- अलग जगह घूम- घूम कर कुछ एक स्तर तक समस्याओं के निदान पर विचार कर उसे समाज में एक सार्थक रूप दे। यही वीवंडर संस्था का उद्देश्य है। लकड़ी से बने लगभग 18 हजार से अधिक पक्षियों के घोेंसले वितरित किया है।
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इस मौके पर व्यग्र फाउंडेशन के नवनीत पांडेय उर्फ अतुल ने कहा कि नन्हीं सी चिड़िया गौरैया हमारे पर्यावरण चक्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमारी लापरवाही से गौरैया लुप्तप्राय हो गई है। इसे बचाने के लिए हम सभी को मिलजुल कर प्रयास करने की जरूरत है। कहा कि पक्के मकानों की वजह से गौरैया के परंपरागत आवास छिन गए हैं। ऐसे में लकड़ी का घोसला यदि घरों में लगाया जाए तो इसे बचाया जा सकता है। संस्था के बारे में बताया कि नौ जून 2018 से हमारी संस्था गौरैया संरक्षण की दिशा में काम कर रही है। फाउंडेशन से राष्ट्र ही नहीं पूरे विश्व से समर्थन मिल रहा है। कहा कि अब तक फाउंडेशन की ओर से ढाई हजार लोगों को घोसला दिया जा चुका है। इस मौके पर ज्वेलर्स के मंजीत सिंह जुनेजा, जगजीत सिंह मटरेजा, रूपेन्द्र सिंह जुनेजा, जसवीर सिह जस्सी, रजनीश तिवारी, फाउंडेशन के मनीष तिवारी, आशुतोष तिवारी रहे।
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वीवंडर फाउंडेशन ने भी जगह जगह बांटे घोसले
संवाद न्यूज एजेंसी
पीडीडीयू नगर। जिले में गौरैया संरक्षण के लिए काम कर रही वीवंडर फाउंडेशन ने भी विश्व गौरैया दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को जगह जगह लकड़ी के घोंसले वितरित किए। इस दौरान लोगों से घर में या घर के आस पास एक घोसला जरूर रखने का आह्वान किया। फाउंडेशन के चेयरमैन गोपाल कुमार ने बताया कि वीवंडर फाउंडेशन की नींव 14 दिसंबर 2017 को रखी गई थी। वीवंडर नाम का अर्थ घुमक्कड़ होता है, घुमक्कड़ों की टीम जो अलग- अलग जगह घूम- घूम कर कुछ एक स्तर तक समस्याओं के निदान पर विचार कर उसे समाज में एक सार्थक रूप दे। यही वीवंडर संस्था का उद्देश्य है। लकड़ी से बने लगभग 18 हजार से अधिक पक्षियों के घोेंसले वितरित किया है।
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