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गोद लेने के बाद भी गांवों का विकास नहीं
चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला
Updated Sun, 31 Jul 2016 01:26 AM IST
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गांव
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प्रधानमंत्री के आह्वान पर जिलाधिकारी ने जिन दो गांवों को गोद लिया। वे गांव अभी भी विकास के लए तरस रहे हैं। जबकि गांवों में कुपोषण से निपटने के भी उचित इंतजाम नहीं हुए जो डीएम का मुख्य लक्ष्य था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की सत्ता संभालने के बाद गांवों के विकास के लिए सांसदों, विधायकों के साथ डीएम और सीडीओ को भी प्रति वर्ष एक गांव को गोद लेकर विकास कराने को कहा था। इस निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी एनके सिंह ने चंदौली ब्लाक के बिसौड़ी और नियामताबाद ब्लाक के दुलहीपुर को गोद लिया। गांव को गोद लेने का मुख्य उद्देश्य यहां से कुपोषण का खात्मा के साथ विकास कराना था।
गांवों को गोद लिए जाने से ग्रामीणों में गांव के विकास की उम्मीद जगी लेकिन दो वर्ष बाद भी गांवों की स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों की माने तो डीएम के गोद लेने के बाद गांव के विकास के विकास के लिए मिलने वाला सामान्य धन भी नहीं मिल रहा है। इस तरह देखा जाए तो इन गांवों का नुकसान ही हुआ है। जिला मुख्यालय से सटे बिसौड़ी गांव की आबादी दस हजार के करीब है। इस गांव में कभी राम मनोहर लोहिया ने श्रमदान कर राजनीति को नई दिशा दी थी लेकिन आज स्थिति विपरीत है।
इसी तरह करीब तीस हजार की आबादी वाले अल्पसंख्यक बहुल दुलहीपुर गांव में विकास के कोई कार्य नहीं हुए हैं। यहां तक कि गांव को गोद लेने के बाद आज तक डीएम यहां पहुंचे ही नहीं। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे विकास के लिए कितने जागरूक हैं। जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने बताया कि गांवों के विकास के लिए कार्य किए जा रहे हैं। विशेष कर कुपोषण से लड़ाई के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
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गांवों को गोद लिए जाने से ग्रामीणों में गांव के विकास की उम्मीद जगी लेकिन दो वर्ष बाद भी गांवों की स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों की माने तो डीएम के गोद लेने के बाद गांव के विकास के विकास के लिए मिलने वाला सामान्य धन भी नहीं मिल रहा है। इस तरह देखा जाए तो इन गांवों का नुकसान ही हुआ है। जिला मुख्यालय से सटे बिसौड़ी गांव की आबादी दस हजार के करीब है। इस गांव में कभी राम मनोहर लोहिया ने श्रमदान कर राजनीति को नई दिशा दी थी लेकिन आज स्थिति विपरीत है।
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इसी तरह करीब तीस हजार की आबादी वाले अल्पसंख्यक बहुल दुलहीपुर गांव में विकास के कोई कार्य नहीं हुए हैं। यहां तक कि गांव को गोद लेने के बाद आज तक डीएम यहां पहुंचे ही नहीं। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वे विकास के लिए कितने जागरूक हैं। जिलाधिकारी कुमार प्रशांत ने बताया कि गांवों के विकास के लिए कार्य किए जा रहे हैं। विशेष कर कुपोषण से लड़ाई के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
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