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तेइस साल बाद भी अधर में कलेक्ट्रेट, कागज पर विकास भवन

Tue, 22 Sep 2020 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2020 12:27 AM IST
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After twenty three years collectorate in development, Vikas Bhavan on paper
चन्दौली। जिले का सृजन हुए करीब 23 साल से अधिक का समय चुका है। मगर जिले में अभी भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। विभागों के पास खुद के सरकारी भवन नहीं है। यह जरूर है कि लंबे समय बाद कलेक्ट्रेट का निर्माण शुरू हुआ लेकिन वह भी अभी अधूरा है। विकास भवन कृषि विभाग के कार्यालय में चल रहा है। पुलिस लाइन, जिला न्यायालय, जिला जेल, खेल मैैदान इनमें से किसी का निर्माण भी नहीं शुरू हो पाया है। अन्य विभागों के लिए अभी जमीन तक नहीं मिल सकी है। ज्यादातर विभाग किराए के भवनों में संचालित हैं। वहीं अफसरों के आवास तक नहीं है। जिले के आला अफसर पॉलिटेक्निक कॉलेज, सिंचाई विभाग के डाक बंगला, कृषि के आवासीय भवनों में रह रहे हैं। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते कुछ भी धरातल पर नहीं उतर सका है।
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कलेक्ट्रेट राजकीय कोषागार के भवन में संचालित है। इसका निर्माण पिछली सरकार में नौ करोड़ की लागत से शुरू हुआ लेकिन काम ठप हो गया। तब से मामला ठंडे बस्ते में चल रहा था। वर्ष 2018 में जिलाधिकारी नवनीत सिंह चहल की पहल पर फिर काम शुरू हुुआ लेकिन इसकी लागत बढ़कर 19 करोड़ रुपये से अधिक हो गई। इसे इसी साल मार्च तक पूरा करना था मगर अब तक जिलाधिकारी कार्यालय नए भवन में शिफ्ट नहीं हो पाया है। कोषागार भवन में डीएम कार्यालय के अलावा एडीएम और एडीएम न्यायिक तथा उनसे संबंधित विभिन्न कार्य संचालित हो रहे हैं।
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जिले के विकास का खाका खींचने और रुपरेखा तैयार करने के लिए विकास भवन ही खुद के कार्यालय के इंतजार में है। दो दशक से अधिक का समय हो गया मगर अब तक विकास भवन नहीं बन पाया। कृषि विभाग के कार्यालय में विकास भवन संचालित है। इसी भवन में प्रादेशिक सेवा, बचत अधिकारी, क्रीड़ा अधिकारी का भी कार्यालय है। यहां जगह कम होने से कामकाज में परेशानी होती है। वहीं वहां आने वाले फरियादियों को भी गर्मी, जाड़ा और बरसात के सीजन में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। यह जरूर है कि विकास भवन के लिए बन रहे कलेक्ट्रेट के प्रथम तल पर बनाने की तैयारी चल रही है लेकिन यह सब कुछ अभी कागज पर ही है।
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जिले का हाल तो यह है कि यहां अब तक पुलिस लाइन भी नहीं बन सकी है। सदर कोतवाली में पुलिस लाइन संचालित है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय भी इसी परिसर में संचालित है। पीडीडीयू जंक्शन-गया रेल रूट और हावे के बीच में सदर कोतवाली में पुलिस लाइन संचालित होने से जगह की काफी कमी है। इसके लिए भी जिला प्रशासन अब तक जमीन का फाइनल इंतजाम नहीं कर पाया है। यातायात पुलिस लाइन भी नहीं है। पुलिस कर्मियों के लिए आवास की दिक्कत है।
जिला न्यायालय, जिला जेल का भी पता नहीं
जिले में अब तक जिला न्यायालय का भी निर्माण नहीं हो सका है। इसके लिए जिला प्रशासन ने जमीन चिह्नित कर ली है। लेकिन अभी निर्माण नहीं शुरू हो पाया है। इसके लिए जिले के अधिवक्ता काफी विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। यही हाल जिला जेल का है। जिले के कैदी वाराणसी के जिला जेल या सेंट्रल जेल शिवपुर में रखे जाते हैं। पेशी के लिए रोजाना वाराणसी से चंदौली और शाम को फिर वाराणसी भेज दिया जाता है। कैदियों को ले आने और ले जाने में सुरक्षा के लिहाज से खतरा भी रहता है।
किराए पर चल रहे हैं कई विभाग
जिले में खुद का कार्यालय नहीं होने पर एक दर्जन से अधिक ऐसे विभाग हैं जो किराए के भवनों या फिर दूसरे सरकारी कार्यालयों में संचालित है। चंदौली नगर में अलग-अलग स्थानों पर बिखरे सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में भी फरियादियों और जरूरतमंदों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीण और नक्सल क्षेत्र से आने वाले फरियादियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। काफी मशक्कत के बाद लोग कार्यालयों तक पहुंच पाते हैं।
पॉलिटेक्निक कालेज और सिंचाई विभाग में रहते हैं अफसर
दो दशक बाद भी जिलाधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अफसरों के लिए अब तक आवास भी नहीं बन पाए हैं। जिलाधिकारी और एसडीएम सदर, सीडीओ, एएसपी, सीवीओ का आवास पालिटेक्रिक कालेज के परिसर में है। वहीं पुलिस अधीक्षक का आवास सिंचाई विभाग के डाक बंगले में है। अपर जिलाधिकारी राजकीय डिग्री कालेज में अपना आवास बनाए हुए हैं। जबकि परियोजना निदेशक सदर ब्लाक कार्यालय में रहते हैं। जिला विकास अधिकारी का नियामताबाद ब्लॉक के आवासीय भवन में रहना पड़ता है।

कोट..........
कलेक्ट्रेट का निर्माण अंतिम चरण में है, जल्द ही नए कलेक्ट्रेट में कामकाज शुरू हो जाएगा। कलेक्ट्रेट भवन के ऊपर विकास भवन बनाने के लिए प्रमुख सचिव ग्रामीण विकास को प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद विकास भवन का निर्माण करा कर किराए के भवनों में चल रहे अन्य सरकारी कार्यालयों को भी विकास भवन में शिफ्ट करा दिया जायेगा। बाकी कार्यालयों के लिए जमीन की तलाश चल रही है, जल्द ही जमीनों को चिह्नित कर निर्माण शुरू करा दिए जाएंगे। अतुल कुमार, अपर जिलाधिकारी।
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