{"_id":"59b1a00d4f1c1be77f8b4d56","slug":"81504813069-chandauli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पितृपक्ष के पहले दिन गंदगी के बीच पितरों को किया तर्पण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पितृपक्ष के पहले दिन गंदगी के बीच पितरों को किया तर्पण
Updated Fri, 08 Sep 2017 01:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चहनियां। पितरों को याद करने का पक्ष पितृपक्ष गुरुवार को शुरू हुई। पहले दिन गंगा घाटों पर तर्पण करने और पिंडदान के लिए लोग उमड़े। पिंडदान के बाद दान पुण्य किया। इस दौरान घाटों पर सफाई न होने से लोगों को दिक्कत हुई।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष और महालया के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस पक्ष में पितर लोग धरती पर आते हैं। पूर्वजों की याद में पिंडदान तर्पण और दानपुण्य करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। जिले में बलुआ, टांडा, हसनपुर तिरगांवा, महुअरिया, महुअर आदि घाटों पर तर्पण के लिए एक पखवारा तक लोगों की भीड़ जुटती है। पहले दिन इन घाटों पर तर्पण के लिए लोगों की भीड़ जुटी। क्षेत्रीय लोगों की माने तो घाटों पर साफ सफाई न होने से दिक्कत हुइ। पंडित कुंज बिहारी मिश्र बताते हैं कि इस पक्ष में जिस दिन पिता, माता अथवा परिवार के सदस्य की म़ृत्यु होती है, उसी तिथि को पिंडदान किया जाता है। पितृपक्ष की अमावस्या को ज्ञात अज्ञात सभी के नाम से तर्पण किया जाता है। यही नहीं पिंडदान के बाद ब्राह्मण भोज कराना उत्तम होता है। क्षेत्र के शिवशंकर, राजमणि, विजय नरायन, मन्नू यादव, श्यामनरायन पांडेय, प्रमोद, रामलाल आदि ने बताया कि वैसे तो घाट पर प्रतिदिन पिंडदान करने वालों की भीड़ होती है, लेकिन अंतिम दिन सर्वाधिक भीड़ होती है।
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष और महालया के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस पक्ष में पितर लोग धरती पर आते हैं। पूर्वजों की याद में पिंडदान तर्पण और दानपुण्य करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं। जिले में बलुआ, टांडा, हसनपुर तिरगांवा, महुअरिया, महुअर आदि घाटों पर तर्पण के लिए एक पखवारा तक लोगों की भीड़ जुटती है। पहले दिन इन घाटों पर तर्पण के लिए लोगों की भीड़ जुटी। क्षेत्रीय लोगों की माने तो घाटों पर साफ सफाई न होने से दिक्कत हुइ। पंडित कुंज बिहारी मिश्र बताते हैं कि इस पक्ष में जिस दिन पिता, माता अथवा परिवार के सदस्य की म़ृत्यु होती है, उसी तिथि को पिंडदान किया जाता है। पितृपक्ष की अमावस्या को ज्ञात अज्ञात सभी के नाम से तर्पण किया जाता है। यही नहीं पिंडदान के बाद ब्राह्मण भोज कराना उत्तम होता है। क्षेत्र के शिवशंकर, राजमणि, विजय नरायन, मन्नू यादव, श्यामनरायन पांडेय, प्रमोद, रामलाल आदि ने बताया कि वैसे तो घाट पर प्रतिदिन पिंडदान करने वालों की भीड़ होती है, लेकिन अंतिम दिन सर्वाधिक भीड़ होती है।
विज्ञापन