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जिला प्रशासन ने लगाई नो इंट्री, कोल व्यापारियों में रोष
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दुलहीपुर (चंदौली)। पड़ाव चौराहे को जाम की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने चंदासी कोयला मंडी से पड़ाव तक शाम के पांच से रात के 10 बजे तक भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के इस निर्णय से कोलमंडी के व्यापारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन से भारी वाहनों के आवागमन पर लगाए गए रोक को हटाने की मांग की है।
दरअसल पड़ाव चौराहे पर भारी वाहनों के आवागमन से अक्सर भीषण जाम लग जाया करता था। कभी-कभी तो जाम छूटने में तीन से चार घंटे लग जाते थे। जिले के कई अधिकरियों के वाहन भी जाम में फंसे रहते थे। पिछले दिनों एसपी संतोष कुमार सिंह के वाहनों का काफिला भी घंटों जाम में फंसा रहा। इसके बाद लगभग 10 दिन पूर्व जिला प्रशासन ने नो इंट्री का नियम लागू कर शाम के पांच से रात के 10 बजे तक भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध लगने को लेकर चंदासी कोल मंडी के व्यापारियों ने रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इससे उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।
कोल व्यवसाई नियाज खान ने कहा कि प्रदेश सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाली कोल मंडी में नो इंट्री का नियम लागू करना गलत है। इससे व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वहीं राधेश्याम यादव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को कोलमंडी व कोयला व्यापारियों से कोई वास्ता नहीं रह गया है। केवल सहायता लेने के समय ही उन्हें कोल व्यापारियों की याद आती है। कोयला व्यापारी विजय बहादुर पांडेय का कहना है कि चंदासी में वर्ष 1977 से कोल मंडी संचालित की जा रही है। इसे एशिया की सबसे बड़ी कोलमंडी होने का गौरव प्राप्त है। मंडी कई घरों की रोजी-रोटी का सहारा है। पहले ही प्रशासन की अनदेखी से यहां व्यापार सिमटने लगा है। उसपर नो इंट्री का नियम कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। व्यापारी अरुण अग्रवाल ने कहा कि जिला प्रशासन ने नो इंट्री का नियम गलत समय लगाया है। इस समय कोयले का व्यापार चरम पर होता है। जिला प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर तत्काल इसे बदलना चाहिए।
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दरअसल पड़ाव चौराहे पर भारी वाहनों के आवागमन से अक्सर भीषण जाम लग जाया करता था। कभी-कभी तो जाम छूटने में तीन से चार घंटे लग जाते थे। जिले के कई अधिकरियों के वाहन भी जाम में फंसे रहते थे। पिछले दिनों एसपी संतोष कुमार सिंह के वाहनों का काफिला भी घंटों जाम में फंसा रहा। इसके बाद लगभग 10 दिन पूर्व जिला प्रशासन ने नो इंट्री का नियम लागू कर शाम के पांच से रात के 10 बजे तक भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया। प्रतिबंध लगने को लेकर चंदासी कोल मंडी के व्यापारियों ने रोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इससे उनका व्यापार प्रभावित हो रहा है।
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कोल व्यवसाई नियाज खान ने कहा कि प्रदेश सरकार को सबसे अधिक राजस्व देने वाली कोल मंडी में नो इंट्री का नियम लागू करना गलत है। इससे व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वहीं राधेश्याम यादव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को कोलमंडी व कोयला व्यापारियों से कोई वास्ता नहीं रह गया है। केवल सहायता लेने के समय ही उन्हें कोल व्यापारियों की याद आती है। कोयला व्यापारी विजय बहादुर पांडेय का कहना है कि चंदासी में वर्ष 1977 से कोल मंडी संचालित की जा रही है। इसे एशिया की सबसे बड़ी कोलमंडी होने का गौरव प्राप्त है। मंडी कई घरों की रोजी-रोटी का सहारा है। पहले ही प्रशासन की अनदेखी से यहां व्यापार सिमटने लगा है। उसपर नो इंट्री का नियम कोढ़ में खाज का काम कर रहा है। व्यापारी अरुण अग्रवाल ने कहा कि जिला प्रशासन ने नो इंट्री का नियम गलत समय लगाया है। इस समय कोयले का व्यापार चरम पर होता है। जिला प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार कर तत्काल इसे बदलना चाहिए।
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