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वनाधिकार कानून के अस्वीकृत फाइलों की सुनवाई
Updated Sun, 15 Jul 2018 01:08 AM IST
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नौगढ़। हाईकोर्ट के निर्देश पर वन अधिकार कानून की अस्वीकृत फाइलों की सुनवाई शनिवार को स्थानीय तहसील में हुई। एसडीएम रामसजीवन मौर्य की अध्यक्षता में क्षेत्र के 101 लोगों ने वन भूमि पर दावा प्रपत्र प्रस्तुत किया। इस दौरान भूमि से उनको बेदखल करने की वन विभाग की कार्रवाई का विरोध किया।
एसडीएम की अध्यक्षता में हुई कार्रवाई में उपप्रभागीय वनाधिकारी ने बारी बारी से दावा प्रपत्र का अवलोकन किया। बताया गया कि अब तक सुर्रा गांव के 99 दावेदारों की सुनवाई हो चुकी है। शनिवार को भरदुआ गांव के 101 लोगों ने बेदखली कार्रवाई को बंद करने की मांग करते हुए सिंचाई विभाग के पनघट की रसीद और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किया। इसे देखकर जयमोहनी रेंज के रेजर कुंज मोहन वर्मा को मौके पर पहुंच कर वस्तु स्थिति का अवलोकन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। भारत सरकार ने जंगलों में बसे वनवासियों को मालिकाना हक दिलाने के लिए वनाधिकार कानून बनाया और काशी वन जीव प्रभाग रामनगर के नौगढ़, जयमोहनी, मझगाई, चंद्रप्रभा, चकिया व अन्य रेंजो में वर्षों से रह रहे लोगों ने वनाधिकार कानून के तहत भूमि पर दावा प्रस्तुत किया था। वन विभाग ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इस पर आदिवासी महासंघ ने एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में दाखिल किया। इसपर सुनवाई करते हुए 24 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट ने आयुक्त वाराणसी, जिलाधिकारी चंदौली और काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ को खारिज किए गए दावों को नोटिस जारी कर फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिया था।
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एसडीएम की अध्यक्षता में हुई कार्रवाई में उपप्रभागीय वनाधिकारी ने बारी बारी से दावा प्रपत्र का अवलोकन किया। बताया गया कि अब तक सुर्रा गांव के 99 दावेदारों की सुनवाई हो चुकी है। शनिवार को भरदुआ गांव के 101 लोगों ने बेदखली कार्रवाई को बंद करने की मांग करते हुए सिंचाई विभाग के पनघट की रसीद और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किया। इसे देखकर जयमोहनी रेंज के रेजर कुंज मोहन वर्मा को मौके पर पहुंच कर वस्तु स्थिति का अवलोकन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। भारत सरकार ने जंगलों में बसे वनवासियों को मालिकाना हक दिलाने के लिए वनाधिकार कानून बनाया और काशी वन जीव प्रभाग रामनगर के नौगढ़, जयमोहनी, मझगाई, चंद्रप्रभा, चकिया व अन्य रेंजो में वर्षों से रह रहे लोगों ने वनाधिकार कानून के तहत भूमि पर दावा प्रस्तुत किया था। वन विभाग ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इस पर आदिवासी महासंघ ने एक जनहित याचिका हाई कोर्ट में दाखिल किया। इसपर सुनवाई करते हुए 24 नवंबर 2017 को हाईकोर्ट ने आयुक्त वाराणसी, जिलाधिकारी चंदौली और काशी वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ को खारिज किए गए दावों को नोटिस जारी कर फिर से सुनवाई करने का निर्देश दिया था।
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