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अस्पतालों में एंटी रेबीज का टोटा, भटक रहे मरीज
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पीडीडीयू नगर। जनपद के लगभग सभी अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा है। इससे इन अस्पतालों में कुत्ते, बिल्ली, बंदरों आदि के काटे मरीजों को एंटी रेबीज लगवाने के लिए आने वाले मरीजों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों मेें इंजेक्शन नहीं होने के कारण मरीज निजी अस्पतालों में एंटी रेबीज लगवाने को विवश हैं। पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में तो दीवारों पर बाकायदा एंटी रेबीज न होने के बाबत नोटिस भी लिखकर चस्पा किया गया है।
जिले की आबादी तकरीबन 21 लाख है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फिलहाल इस समय जिला अस्पताल में लगभग 150 वायल इंजेक्शन ही बचे हैं। ऐसे में विभाग के बेहतर इलाज के दावे को व्यवस्था मुंह चिढ़ा रही है। बाकी जिले के चकिया, पीडीडीयू नगर के अलावा नौगढ़, सकलडीहा, सैयदराजा, चहनिया, कमालपुर, इलिया सहित अन्य प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी पिछले तीन महीने से एंटी रैबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। शुक्रवार को मैनाताली निवासी दुर्गा बंगाली और काली महाल निवासी धर्मेंद्र कुत्ते काटने पर राजकीय महिला चिकित्सालय पहुंचे थे। लेकिन वहां इंजेक्शन नहीं होने से निराश होकर वापस लौट गए। पीडीडीयू नगर के राजकीय महिला चिकित्सालय में तो इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिया गया है। अस्पताल की एक दीवार पर चस्पा कागज पर पेन से लिखा हुआ है कि कुत्ते की सुई नहीं है।
सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज न होने का फायदा निजी अस्पतालों के संचालक उठा रहे हैं। मरीज मजबूरी में इंजेक्शन लगवा रहे हैं। निजी अस्पताल संचालक कुत्ते, बंदर के काटे मरीजों व उनके परिजनों से एक बार एंटी रेबीज लगाने के एवज में चार से छह सौ रुपये वसूल रहे हैं। इससे गरीब वर्ग के लोग एंटी रेबीज नहीं लगवा पा रहे हैं।
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जनपद में एंटी रैबिज इंजेक्शन की आपूर्ति में लखनऊ से दिक्कत आ रही है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। अभी जिला अस्पताल में एंटी रैबिज उपलब्ध है। शासन से मिलने के बाद शेष अस्पतालों में जल्द हीइसकी आपूर्ति करा दी जाएगी। आरके मिश्रा, सीएमओ।
जिले की आबादी तकरीबन 21 लाख है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार फिलहाल इस समय जिला अस्पताल में लगभग 150 वायल इंजेक्शन ही बचे हैं। ऐसे में विभाग के बेहतर इलाज के दावे को व्यवस्था मुंह चिढ़ा रही है। बाकी जिले के चकिया, पीडीडीयू नगर के अलावा नौगढ़, सकलडीहा, सैयदराजा, चहनिया, कमालपुर, इलिया सहित अन्य प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी पिछले तीन महीने से एंटी रैबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। शुक्रवार को मैनाताली निवासी दुर्गा बंगाली और काली महाल निवासी धर्मेंद्र कुत्ते काटने पर राजकीय महिला चिकित्सालय पहुंचे थे। लेकिन वहां इंजेक्शन नहीं होने से निराश होकर वापस लौट गए। पीडीडीयू नगर के राजकीय महिला चिकित्सालय में तो इस संबंध में नोटिस चस्पा कर दिया गया है। अस्पताल की एक दीवार पर चस्पा कागज पर पेन से लिखा हुआ है कि कुत्ते की सुई नहीं है।
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सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज न होने का फायदा निजी अस्पतालों के संचालक उठा रहे हैं। मरीज मजबूरी में इंजेक्शन लगवा रहे हैं। निजी अस्पताल संचालक कुत्ते, बंदर के काटे मरीजों व उनके परिजनों से एक बार एंटी रेबीज लगाने के एवज में चार से छह सौ रुपये वसूल रहे हैं। इससे गरीब वर्ग के लोग एंटी रेबीज नहीं लगवा पा रहे हैं।
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जनपद में एंटी रैबिज इंजेक्शन की आपूर्ति में लखनऊ से दिक्कत आ रही है, जिसे दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। अभी जिला अस्पताल में एंटी रैबिज उपलब्ध है। शासन से मिलने के बाद शेष अस्पतालों में जल्द हीइसकी आपूर्ति करा दी जाएगी। आरके मिश्रा, सीएमओ।