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प्रतिबंध के बाद भी बिक रहा चाइनीज मांझा

Sat, 29 Dec 2018 12:19 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 29 Dec 2018 12:19 AM IST
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प्रतिबंध के बाद भी बिक रहा चाइनीज मांझा
पीडीडीयू नगर। मकर संक्रांति (खिचड़ी) जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे पतंगबाजी भी जोर पकड़ने लगी है। इसके लिए दुकानदार अभी से पतंग व मांझे का स्टाक करने में जुट गए हैं। तरह-तरह के डिजाइनों की पतंग भी बाजार में दिखने लगी हैं। वहीं प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चाइनीज मंझे की धड़ल्ले से बिक्री हो रही है। पतंग और मंझे का तकरीबन 15 से 18 लाख रुपये का जिले में हर साल सीजन में कारोबार होता है। चाइनीज मंझे से हादसे होते हैं, मगर इस पर पुलिस प्रशासन किसी की नजर नहीं है। एक अनुमान के मुताबिक एक सीजन में 12 लाख तक का कारोबार चाइनीज मंझे का होता है।
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मकर संक्रांति पर्व पर बच्चे, जवान सभी पतंगें उड़ाने का आनंद लेते हैं। सुबह से लेकर शाम तक घरों की छतों व मैदानों में पतंग उड़ाने के शौकीन उमड़ते हैं और भक्काटे की आवाज गूंजती रहती है।हैप्पी न्यू ईयर, नया साल मुबारक हो, जैसे स्लोगन वाली पतंगें भी बाजार में उपलब्ध हैं। वहीं इस वर्ष स्पाइडरमैन छाप पतंग की खूब मांग है। सबसे बड़े आकार की बिक रही इस पतंग की कीमत 10 रुपये है। धर्मशाला रोड के पतंग व्यवसायी मुकेश जायसवाल ने बताया कि अभी एक से लेकर 25 रुपये तक की पतंग बिक रही है। वहीं देसी मांझा 150 से 200 रुपये प्रति रील बिक रहा है। फाइबर व लकड़ी से बने परेता की कीमत 25 से सौ रुपये तक है। वहीं पतंगें काटने की होड़ में मांझा का भी जमकर प्रयोग होता है। मांझे के बाजार पर कुछ वर्षों से चीनी उत्पाद ने कब्जा कर लिया है। देशी मांझे में जहां सूती धागे पर मंझा चढ़ाया जाता है, वहीं चीनी मांझे में प्लास्टिक के धागे पर मांझा लगाया जाता है। इससे चीनी मांझा काफी खतरनाक हो जाता है। यह आसानी से टूटता नहीं और इसकी चपेट में आनेवाला गंभीर रूप से घायल हो जाता है। यह खतरनाक चीनी मांझा कई की जान भी ले चुका है।
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स्टॉक जुटाने में लगे हैं दुकानदार
इस वर्ष अभी तक तो बाजारों में चीनी मांझा नजर नहीं आ रहा है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि थोक व फुटकर व्यापारी इसका स्टॉक जमा करने में जुट गए हैं। हालांकि प्रशासन ने चाइनीज मांझे की बिक्री पर कई वर्ष पूर्व प्रतिबंध लगा दिया है, बावजूद इसके चोरी-छुपे इसकी बिक्री जारी है। प्रशासन के लोग कुछ दुकानों पर छापेमारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लिया करते हैं।
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इनसेट
कई हो चुके हैं गंभीर रूप से जख्मी
चाइनीज मांझे की चपेट में आने से प्रतिवर्ष कई लोग जख्मी हो जाया करते हैं। गुरुवार को पड़ाव क्षेत्र के साहूपुरी मोड़ के समीप एक शिक्षक चीनी मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। अभी भी उनका इलाज एक निजी चिकित्सालय में चल रहा है जहां उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है।
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