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गवान श्रीराम के चरित्र से हमे लेना चाहिए सीख
Updated Wed, 31 Oct 2018 01:06 AM IST
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चंदौली। श्रीराम जानकी शिव मठ मंदिर में मानस एवं अध्यात्म प्रचार समिति की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन सोमवार को कथावाचनकों ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रकाश डाला। जहां भक्तों को भक्ति की गंगा में जमकर गोता लगाया।
इस दौरान आचार्य डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी ने कहा भगवान श्रीराम के चरित्र से हमे सीख लेना चाहिए कि ससुराल में कैसे चलना, बोलना और रहना चाहिए। आचार्य रामा रामायणी ने कहा साधक के जीवन में जब तक भक्ति नहीं आती तब तक उसके जीवन में अकाल पड़ा रहता है। चाहे वह दुनिया में कितना ही ज्ञानी क्यों न हो। प्रशांत पांडेय ने कहा परोपकारी व्यक्ति के जीवन में कोई वस्तु दर्लभ नहीं होती हैै। व्यक्ति समाज में प्रसिद्घ बनना चाहता है और साधक साधना के क्षेत्र में सिद्घ बनना चाहता है। श्याम किशोर ने कहा जब तक समाज में नारी की पूजा नहीं होगी तब तक नारायणी व नारायण प्रसन्न नहीं होंगे। श्याम नारायण शाही ने कहा राम कथा हमे पथ नहीं देती न बटवारे की शिक्षा देती है बल्कि पथ की जगह पंख देती है। राम चंद्र मिश्र ने रामचरित्र व कैैकयी की कथा का प्रंसग सुनाया। इस दौरान जयशंकर द्विवेदी, हरिद्वार सिंह, पंकज तिवारी, नीरज तिवारी, रामकेश, आशु गुप्ता, मृत्युंजय तिवारी आदि उपस्थित थे।
इस दौरान आचार्य डॉ. प्रभाकर त्रिपाठी ने कहा भगवान श्रीराम के चरित्र से हमे सीख लेना चाहिए कि ससुराल में कैसे चलना, बोलना और रहना चाहिए। आचार्य रामा रामायणी ने कहा साधक के जीवन में जब तक भक्ति नहीं आती तब तक उसके जीवन में अकाल पड़ा रहता है। चाहे वह दुनिया में कितना ही ज्ञानी क्यों न हो। प्रशांत पांडेय ने कहा परोपकारी व्यक्ति के जीवन में कोई वस्तु दर्लभ नहीं होती हैै। व्यक्ति समाज में प्रसिद्घ बनना चाहता है और साधक साधना के क्षेत्र में सिद्घ बनना चाहता है। श्याम किशोर ने कहा जब तक समाज में नारी की पूजा नहीं होगी तब तक नारायणी व नारायण प्रसन्न नहीं होंगे। श्याम नारायण शाही ने कहा राम कथा हमे पथ नहीं देती न बटवारे की शिक्षा देती है बल्कि पथ की जगह पंख देती है। राम चंद्र मिश्र ने रामचरित्र व कैैकयी की कथा का प्रंसग सुनाया। इस दौरान जयशंकर द्विवेदी, हरिद्वार सिंह, पंकज तिवारी, नीरज तिवारी, रामकेश, आशु गुप्ता, मृत्युंजय तिवारी आदि उपस्थित थे।
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