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चंदौली की माटी में घट रही उर्वरा शक्ति
Updated Fri, 13 Jul 2018 01:16 AM IST
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चंदौली। रासायनिक खादों के लगातार भारी मात्रा में हो रहे इस्तेमाल से जिले की उपजाऊ माटी से कई उर्वरा पोषक तत्व लगभग गायब हो गए हैं। इससे खेती पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है और पैदावार कम होने के साथ ही पौधे में विकसित होने की क्षमता भी कम हो जाती है। मई-जून में कृषि विभाग की ओर से कराए गए मृदा परीक्षण में ये तथ्य सामने आए हैं। इसमें कार्बन जीवांश और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व लगभग गायब हो चुके है। अब इसके लिए कृषि विभाग किसानों को जैविक खाद का अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
जिले में 1.23 लाख हेक्टेयर में खेती होती है। कृषि विभाग की ओर से इस साल जिले में तकरीबन एक लाख किसानों को मृदा कार्ड वितरित किया गया। मृदा परीक्षण के लिए 44 हजार विभिन्न इलाकों चंदौली, चकिया, सलकडीहा, नौगढ़ से मृदा परीक्षण के लिए नमूने लिए जाने के लक्ष्य रखे गए थे। इसमें अब तक करीब 38 हजार नमूने लिए जा चुके हैं। कृषि विभाग की प्रयोगशाला में जांच में इन नमूनों में मिट्टी में जो सबसे अधिक पोषक तत्वों की कमी सामने आई हैं उनमें कार्बन जीवांश के साथ फास्फोरस की मात्रा है। कृषि विभाग के अनुसार कार्बन जीवांश की मात्रा 0.8 फीसदी होनी चाहिए लेकिन वह घटकर 0.2 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह फास्फोरस की मात्रा भी 0.5 प्रतिशत होना चाहिए लेकिन यह तो खत्म हो चुकी है। इससे कृषि विभाग और कृषि विज्ञानी चिंतित है। कृषि विभाग का कहना है कि इसका प्रमुख कारण रासायनिक खादों का अंधाधुंध प्रयोग है।
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कोट
मृदा परीक्षण के बाद मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी मिल रही है। इसके लिए किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे हरी खाद जैसे ढैंचा, सनई की बोवाई कर खेत में उसकी जुताई करें। साथ ही वर्मी कंपोस्ट और जैविक खाद का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें। इससे जिन इलाकों में पोषक तत्व घट रहे हैं वहां दो साल में उर्वरा शक्ति लौट आएगी।
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राजीव कुमार भारती, कृषि अधिकारी।