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‘जाने कब कोई बूढ़ा आसाराम हो जाए’
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
Updated Wed, 06 Apr 2016 11:30 PM IST
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numaish
- फोटो : अमर उजाला
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नुमाइश स्थित रवींद्र नाट्यशाला में मंगलवार की रात ‘ऑल इंडिया महफिल-ए-मुशायरा’ में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किया। शायरा शाइस्ता सना ने ‘अब लड़कियां बुजुर्गों के पैर छूने से डरती हैं, जाने कब कोई बूढ़ा आसाराम हो जाए’ सुनाकर दर्शकोें ेकी तालिया बटोरी।
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कार्यक्रम की शुरूआत रात्रि करीब 11 बजे कैबिनेट मंत्री शहिद मंजूर ने की। साजिद हसनपुरी ने नूर ए नात सुनाकर मुशायरे का आगाज किया। अरकम हसनपुरी 15 वर्षीय शायर ने ‘ये ना पूछोें क्या कर रही है, हर दवा मौज्जा कर रही है, खोलकर आंख जो देखा, मां ओढ़नी से हवा कर रही है’ कलाम सुनाया तो महफिल तालियों से सज गई।
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सलीम अमरोहवी ,दिल्ली से आए राजीव व्यास ,शायरा निकहत अमरोहवी , वारिस वारसी , शायर जुनून , अलीगढ़ से आईं शायरा मुमताज नसीम, अली बराबंकवी , मुजफ्फरनगर से आए अशोक साहिल, खुर्शीद हैदर, खालिद आजमी , आगा सरोज, अल्ताफ जिया , इमरान प्रतापगढ़ी नेकलाम पढ़े।संचालन नदीम ने किया। संयोजक बदरुल इस्लाम, सह संयोजक हाजी अख्तर रहे।
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