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हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही गिर गया था बम
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हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही गिर गया था बम
बुलंदशहर। यूक्रेन से सात और छात्र शुक्रवार को वतन लौट आए। इनके लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। अब तक वापस आने वाले छात्रों की संख्या 17 हो गई है। अभी भी कई छात्र यूक्रेन, रोमानिया और हंगरी बॉर्डर पर आने का इंतजार कर रहे हैं।
शुक्रवार को घर लौटी डीएम रोड स्थित धर्म एन्कलेव निवासी डॉ. प्रदीप शर्मा की पुत्र प्रियंजना शर्मा काफी डरी व सहमी हुई है। उसने बताया कि हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही बम गिर गया था। इसकी सूचना मिलते ही सभी साथी कांप उठे थे।
प्रियंजना ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ, तब से घर आने तक ऐसा डर बरकरार रहा। कीव की जिस यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रह रही थी, वहां से 24 फरवरी को निकाल दिया गया था। यहां से 15 साथी छात्रों के साथ मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में दो दिन गुजारे। हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही वहां बम गिर गया। यदि देर हो जाती तो कुछ भी हो सकता था। एक भारतीय व्यापारी मिले, जो सभी छात्रों को अपने घर ले गए और चार दिन रखा। इसके बाद हंगरी और रोमानिया पहुंचे, जहां से किसी तरह घर लौटी हूं। वहां बम के धमाकों की आवाज और मंजर को कभी भूल नहीं पाऊंगी। वहीं दूसरी ओर ऊंचागांव क्षेत्र के गांव दौलपुर निवासी प्रदीप भी घर पहुंच गया। उसने बताया कि इवानों फ्रांस क्विस शहर में पढ़ाई कर रहा था और मुश्किलों के बाद लौटा है। प्रदीप के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी की लहर है।
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बर्फबारी के बीच तीन दिन बॉर्डर पर गुजारे, मिला टाइम बम
गुलावठी। यूक्रेन से निकलने के दौरान रोमानिया बॉर्डर पर बर्फबारी में खुले आसमान में तीन दिन गुजारे। बॉर्डर पर उसने तथा अन्य साथियों ने आग जलाकर ठंड से बचाव किया। यूक्रेन में दहशत का माहौल है। यूक्रेन से लौटे गुलावठी के मोहल्ला पीरखां निवासी ओसामा ने बताया कि वह विनिसिया में वीन्नित्स्या मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। युद्ध के दौरान दूसरे सायरन की आवाज पर वह बंकरों में चले जाते थे। हॉस्टल से यूनिवर्सिटी जाते समय रास्ते में एक टाइम बम मिला। मौके पर पहुंचे बम स्क्वायड टीम ने बम को निष्क्रिय किया। तब वह सदमे में आ गया था। उसने बताया कि प्राइवेट बस से वह रोमानिया के लिए चला। लेकिन बस चालक ने रोमानिया से कई किलोमीटर पहले उतार दिया। बाकी का सफर उसने पैदल तय किया। 27 फरवरी को बॉर्डर पर आ गया। बॉर्डर पर वह तीन दिन तक फंसा रहा। इस बीच बर्फबारी शुरू हो गई। तीन दिन तक आग जलाकर बॉर्डर पर रहे। तीन दिन बॉर्डर पर फंसे रहने के बाद वह रोमानिया में दाखिल हुआ। बॉर्डर पर एक घंटे में केवल 15 छात्र ही गेट के अंदर ले रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के प्रयासों से ही वह लौटे हैं।
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बुलंदशहर। यूक्रेन से सात और छात्र शुक्रवार को वतन लौट आए। इनके लौटने पर परिजनों ने राहत की सांस ली है। अब तक वापस आने वाले छात्रों की संख्या 17 हो गई है। अभी भी कई छात्र यूक्रेन, रोमानिया और हंगरी बॉर्डर पर आने का इंतजार कर रहे हैं।
शुक्रवार को घर लौटी डीएम रोड स्थित धर्म एन्कलेव निवासी डॉ. प्रदीप शर्मा की पुत्र प्रियंजना शर्मा काफी डरी व सहमी हुई है। उसने बताया कि हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही बम गिर गया था। इसकी सूचना मिलते ही सभी साथी कांप उठे थे।
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प्रियंजना ने बताया कि जब से युद्ध शुरू हुआ, तब से घर आने तक ऐसा डर बरकरार रहा। कीव की जिस यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रह रही थी, वहां से 24 फरवरी को निकाल दिया गया था। यहां से 15 साथी छात्रों के साथ मेट्रो स्टेशन के बेसमेंट में दो दिन गुजारे। हॉस्टल से निकलने के दो घंटे बाद ही वहां बम गिर गया। यदि देर हो जाती तो कुछ भी हो सकता था। एक भारतीय व्यापारी मिले, जो सभी छात्रों को अपने घर ले गए और चार दिन रखा। इसके बाद हंगरी और रोमानिया पहुंचे, जहां से किसी तरह घर लौटी हूं। वहां बम के धमाकों की आवाज और मंजर को कभी भूल नहीं पाऊंगी। वहीं दूसरी ओर ऊंचागांव क्षेत्र के गांव दौलपुर निवासी प्रदीप भी घर पहुंच गया। उसने बताया कि इवानों फ्रांस क्विस शहर में पढ़ाई कर रहा था और मुश्किलों के बाद लौटा है। प्रदीप के घर पहुंचने पर परिजनों में खुशी की लहर है।
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बर्फबारी के बीच तीन दिन बॉर्डर पर गुजारे, मिला टाइम बम
गुलावठी। यूक्रेन से निकलने के दौरान रोमानिया बॉर्डर पर बर्फबारी में खुले आसमान में तीन दिन गुजारे। बॉर्डर पर उसने तथा अन्य साथियों ने आग जलाकर ठंड से बचाव किया। यूक्रेन में दहशत का माहौल है। यूक्रेन से लौटे गुलावठी के मोहल्ला पीरखां निवासी ओसामा ने बताया कि वह विनिसिया में वीन्नित्स्या मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। युद्ध के दौरान दूसरे सायरन की आवाज पर वह बंकरों में चले जाते थे। हॉस्टल से यूनिवर्सिटी जाते समय रास्ते में एक टाइम बम मिला। मौके पर पहुंचे बम स्क्वायड टीम ने बम को निष्क्रिय किया। तब वह सदमे में आ गया था। उसने बताया कि प्राइवेट बस से वह रोमानिया के लिए चला। लेकिन बस चालक ने रोमानिया से कई किलोमीटर पहले उतार दिया। बाकी का सफर उसने पैदल तय किया। 27 फरवरी को बॉर्डर पर आ गया। बॉर्डर पर वह तीन दिन तक फंसा रहा। इस बीच बर्फबारी शुरू हो गई। तीन दिन तक आग जलाकर बॉर्डर पर रहे। तीन दिन बॉर्डर पर फंसे रहने के बाद वह रोमानिया में दाखिल हुआ। बॉर्डर पर एक घंटे में केवल 15 छात्र ही गेट के अंदर ले रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के प्रयासों से ही वह लौटे हैं।