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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   The bloody story started 31 years ago, an entire generation was destroyed in rivalry

Bulandshahar News: 31 साल पहले शुरू हुई खूनी कहानी, रंजिश में पूरी एक पीढ़ी का हुआ खात्मा

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 30 Oct 2023 10:03 PM IST
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बुलंदशहर। साल 1992 में जमीन और भट्ठे विवाद में शुरू हुए खूनी खेल के छींटे सोमवार को हुए रामभूल की हत्या में भी पड़ते नजर आ रहे हैं। हालांकि देर शाम तक परिजनों ने किसी के खिलाफ तहरीर नहीं दी थी। पुलिस भी स्पष्ट तौर पर यह नहीं बता पा रही है कि हत्या किसने की, लेकिन प्रारंभिक जांच में मामला 31 साल पहले शुरू हुई रंजिश की तरफ ही मुड़ता नजर आ रहा है।
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भैंसरौली गांव के बुजर्गाें ने बताया कि गांव की बेटी चंपा देवी की जहांगीराबाद के गांव रौंडा में शादी हुई थी। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। शादी के कुछ साल बाद ही वह अपने पति रिषाल सिंह के साथ मायके में आकर रहने लगी। रौंडा की जमीन और भैंसरौली में मायके से मिली जमीन पर खेतीबाड़़ी कर चंपा-रिषाल के परिवार का पालन पोषण हो रहा था। दोनों के चार बेटे हुए, जिनका नाम रतनपाल, ऋषिपाल, सतपाल और रामभूल था। रामभूल की आईबी में नौकरी लग गई थी, जबकि उनके तीन अन्य भाई गांव में ही रहकर पिता रिषाल सिंह के साथ खेतीबाड़ी करते थे। इसी बीच रिषाल सिंह का गांव के ही प्रीतम और वीर (दोनों भाई) के साथ जमीन और भट्ठे में साझेदारी को लेकर विवाद हो गया। 1992 में इसी रंजिश में रिषाल सिंह और उनके दो पुत्रों रतनपाल और ऋषिपाल की हत्या कर दी गई। बताया जाता है कि कुछ समय बाद ही प्रीतम व वीर सिंह लापता हो गए। जिनका आज तक पता नहीं चल सका। कुछ समय बाद वीर सिंह के दो बेटों करनवीर सिंह और सतपाल की भी हत्या हो गई। यह घटनाक्रम भी दोनों पक्षों की रंजिश से जुड़ा था।
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1994 में ऋषिपाल की पत्नी मुनेश देवी गांव की प्रधान निर्वाचित हुईं। उनके कार्यकाल के दौरान ही उनके देवर सतपाल की भी हत्या कर दी गई। इसके बाद मुनेश देवी और अन्य परिजन गांव छोड़कर शहर में बस गए। प्रीतम और वीर सिंह के परिजन भी उसी दौरान गांव छोड़कर चले गए। कुछ दिन बाद गांव में रह रहे प्रीतम व वीर सिंह के भाई महेंद्र की भी हत्या हो गई।
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रामभूल आईबी में थे। उनकी शादी नहीं हुई थी। सेवानिवृत्ति के बाद वह गांव में ही आकर रहने लगे थे। सोमवार को उनकी भी हत्या कर दी गई। पुलिस की जांच इसी रंजिश के इर्द-गिर्द घूम रही है। रामभूल के विरोधी पक्ष के कुछ लोग हाल ही में जमानत पर बाहर आए थे। ग्रामीणों में यह भी चर्चा है कि बीते कुछ दिनों से रामभूल और उनके बीच मिलना जुलना भी बढ़ गया था। रामभूल की हत्या के बाद वह लोग पुलिस की रडार पर आ गए हैं।
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