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Bulandshahar News: 116 करोड़ से शहर में बिछेगी सीवर लाइन, 25 हजार होंगे कनेक्शन
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बुलंदशहर। सीवर लाइन से वंचित काॅलोनियों में सीवर लाइन बिछाने और शहर में शेष करीब 25 हजार घरों के सीवर कनेक्शन करने के लिए शासन ने स्वीकृति दी है। अमृत पार्ट टू योजना के तहत 116.73 करोड़ रुपये की लागत से यह कार्य किया जाएगा। करीब दो साल बाद शासन ने प्रस्ताव को स्वीकृति दी है।
वर्ष 2019 में अमृत योजना के तहत शहरी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था। इसमें शहर के करीब 27 हजार घरों को कनेक्शन देने की स्वीकृति मिली थी। करीब 25 हजार घर सीवर लाइन के कनेक्शन से वंचित थे। इसके अलावा शहर की विभिन्न कालोनियों में भी सीवर लाइन नहीं बिछाई गई थी। जिसके चलते इन काॅलोनियों से सीवर का गंदा पानी नालियों में बह रहा था। जल निगम के अधिकारियों ने इन काॅलोनियों में सीवर लाइन बिछाने और शेष 24,774 घरों में सीवर कनेक्शन के लिए प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा था। इसके लिए करीब दो साल पहले तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मनोज गर्ग ने भी शासन को पत्र लिखा था लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई थी।
नगर की पॉश कालोनी यमुनापुरम के कुछ हिस्से के साथ ही शिवा आवासीय काॅलोनी में करीब 24.7 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जानी है। इन दोनों कार्यों पर 116.73 करोड़ रुपये खर्च होना है। अब करीब दो साल बाद शासन ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई है। भले ही सीवर लाइन को पांच दिसंबर 2023 को नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया है लेकिन नगर पालिका के पास इसके संचालन के लिए पर्याप्त मशीनरी और संसाधन उपलब्ध ही नहीं हैं। जिसके चलते सीवर लाइन के प्रस्ताव पर बोर्ड बैठक में सभासद चर्चा भी नहीं करते हैं।
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शहर में बनाए गए हैं सात आईपीएस, एक एसटीपी
शहर में सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवर के पानी को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए सात आईपीएस (इंटीग्रेटेड पंपिंग स्टेशन) और एक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया गया था। एसटीपी से उपचारित पानी को फिलहाल काली नदी में डाला जा रहा है लेकिन इसे पाइप लाइन के माध्यम से अरनिया स्थित थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाने की योजना है। हालांकि पिछले दो साल से इस योजना के लिए कागजी कार्रवाई ही पूरी नहीं हो सकी है।
सीवर लाइन के टूटे कनेक्शन से परेशानी
नगर क्षेत्र में सीवर लाइन के टूटे हुए कनेक्शन योजना को सफल बनाने में बाधा बनेंगे। बताया जा रहा है कि 12 हजार से अधिक घर ऐसे हैं, जहां या तो कनेक्शन पाइप टूट चुके हैं या फिर लोगों ने स्वयं ही कनेक्शन हटा दिए हैं। साठा निवासी अमित कुमार ने बताया कि सीवर लाइन के कारण घरों में बदबू पहुंच रही थी। कनेक्शन के दौरान कॉक का प्रयोग होना था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने ऐसा नहीं किया, जिसके चलते घरों में बदबू पहुंच रही है।
शासन को 24,774 घरों में सीवर कनेक्शन और करीब 24.7 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए शासन स्तर पर स्वीकृति जारी की गई है लेकिन कोई लिखित आदेश व जीओ अभी तक नहीं मिला है। इसके लिए बजट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - आशीष कुमार खेवरिया, एक्सईएन, जल निगम
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वर्ष 2019 में अमृत योजना के तहत शहरी क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था। इसमें शहर के करीब 27 हजार घरों को कनेक्शन देने की स्वीकृति मिली थी। करीब 25 हजार घर सीवर लाइन के कनेक्शन से वंचित थे। इसके अलावा शहर की विभिन्न कालोनियों में भी सीवर लाइन नहीं बिछाई गई थी। जिसके चलते इन काॅलोनियों से सीवर का गंदा पानी नालियों में बह रहा था। जल निगम के अधिकारियों ने इन काॅलोनियों में सीवर लाइन बिछाने और शेष 24,774 घरों में सीवर कनेक्शन के लिए प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए शासन को भेजा था। इसके लिए करीब दो साल पहले तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष मनोज गर्ग ने भी शासन को पत्र लिखा था लेकिन प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं मिल पाई थी।
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नगर की पॉश कालोनी यमुनापुरम के कुछ हिस्से के साथ ही शिवा आवासीय काॅलोनी में करीब 24.7 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जानी है। इन दोनों कार्यों पर 116.73 करोड़ रुपये खर्च होना है। अब करीब दो साल बाद शासन ने इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ट्वीट कर इसकी जानकारी दी गई है। भले ही सीवर लाइन को पांच दिसंबर 2023 को नगर पालिका के हैंडओवर कर दिया गया है लेकिन नगर पालिका के पास इसके संचालन के लिए पर्याप्त मशीनरी और संसाधन उपलब्ध ही नहीं हैं। जिसके चलते सीवर लाइन के प्रस्ताव पर बोर्ड बैठक में सभासद चर्चा भी नहीं करते हैं।
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शहर में बनाए गए हैं सात आईपीएस, एक एसटीपी
शहर में सीवर लाइन बिछाने के साथ ही सीवर के पानी को एसटीपी तक पहुंचाने के लिए सात आईपीएस (इंटीग्रेटेड पंपिंग स्टेशन) और एक एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) बनाया गया था। एसटीपी से उपचारित पानी को फिलहाल काली नदी में डाला जा रहा है लेकिन इसे पाइप लाइन के माध्यम से अरनिया स्थित थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाने की योजना है। हालांकि पिछले दो साल से इस योजना के लिए कागजी कार्रवाई ही पूरी नहीं हो सकी है।
सीवर लाइन के टूटे कनेक्शन से परेशानी
नगर क्षेत्र में सीवर लाइन के टूटे हुए कनेक्शन योजना को सफल बनाने में बाधा बनेंगे। बताया जा रहा है कि 12 हजार से अधिक घर ऐसे हैं, जहां या तो कनेक्शन पाइप टूट चुके हैं या फिर लोगों ने स्वयं ही कनेक्शन हटा दिए हैं। साठा निवासी अमित कुमार ने बताया कि सीवर लाइन के कारण घरों में बदबू पहुंच रही थी। कनेक्शन के दौरान कॉक का प्रयोग होना था, लेकिन कार्यदायी संस्था ने ऐसा नहीं किया, जिसके चलते घरों में बदबू पहुंच रही है।
शासन को 24,774 घरों में सीवर कनेक्शन और करीब 24.7 किमी लंबी सीवर लाइन बिछाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। इसके लिए शासन स्तर पर स्वीकृति जारी की गई है लेकिन कोई लिखित आदेश व जीओ अभी तक नहीं मिला है। इसके लिए बजट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - आशीष कुमार खेवरिया, एक्सईएन, जल निगम