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Bulandshahar News: बेमौसम बारिश से पॉटरी उद्योग प्रभावित, एक सप्ताह से बंद पड़ा काम
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खुर्जा। पिछले दस दिनों से हो रही बरसात से पॉटरी उद्योग के कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। करीब एक सप्ताह से फैक्टरियों में काम बंद है। वहीं आने वाले डिमांड की सप्लाई नहीं की जा रही है। ऐसे में उद्यमी काफी चिंतित हैं।
ईद के त्योहार के चलते खुर्जा में तैयार होने वाली क्रॉकरियों की विशेष डिमांड है। ऐसे में मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और पूर्वी जिलों से उद्यमियों के पास ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, जयपुर, मध्यप्रदेश और अन्य प्रदेशों में उत्पाद की सप्लाई होनी है। वहीं क्षेत्र में पिछले दस दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पॉटरी इकाइयों में काम रुका हुआ है। ऐसे में उत्पाद भी तैयार नहीं हो रहे हैं और जो कच्चे उत्पाद तैयार हो गए हैं, उनके खराब होने का भी खतरा बना हुआ है।
कारीगरों के अनुसार सिरेमिक से तैयार होने वाले उत्पाद के लिए धूप की जरूरत होती है। ऐसे में उत्पाद के सांचे में मिट्टी भरकर धूप में रखना होता है। उसमें से अगले दिन कच्चा उत्पाद निकालकर उसको एक और मिट्टी के पानी से धोया जाता, जिसके बाद दोबारा उत्पाद को एक या दो दिन के लिए सुखाया जाता है। इसी के साथ इस्तेमाल हुए सांचे को भी धूप में रखकर सुखाया जाता है। इस प्रकिया में ही चार से पांच दिन का समय लगता है। अब बारिश के कारण काम रुका हुआ है। यदि कच्चे उत्पाद को समय से सुखाया नहीं गया तो उसके भी टूटने या खराब होने का खतरा रहता है।
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1. समय से ऑर्डर नहीं भेजे गए तो हो सकता है नुकसान
कुछ रिटेलर और कारोबारियों का ऑर्डर दस से 15 दिन पहले आता है। इसमें यदि समय से सप्लाई नहीं हो पाती है तो ऑर्डर कम होने की भी संभावना रहती है। ऐसे में नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। बारिश के कारण न ही उत्पाद सूख पा रहे हैं और ना ही सांचे।
- राजीव गोयल, उद्यमी
2. धूप नहीं मिली तो कच्चे माल के खराब होने का खतरा
एक सांचे में कई बार उत्पाद तैयार किया जाता है। यदि सांचे सूखे नहीं होंगे तो मिट्टी के मिश्रण के खराब होने का खतरा रहता है। वहीं गमले तैयार करने में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। उनको सूखने में काफी समय लगता है।
- जोनू चौहान, उद्यमी
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ईद के त्योहार के चलते खुर्जा में तैयार होने वाली क्रॉकरियों की विशेष डिमांड है। ऐसे में मुरादाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और पूर्वी जिलों से उद्यमियों के पास ऑर्डर आने शुरू हो गए हैं। इसके अलावा दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, जयपुर, मध्यप्रदेश और अन्य प्रदेशों में उत्पाद की सप्लाई होनी है। वहीं क्षेत्र में पिछले दस दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पॉटरी इकाइयों में काम रुका हुआ है। ऐसे में उत्पाद भी तैयार नहीं हो रहे हैं और जो कच्चे उत्पाद तैयार हो गए हैं, उनके खराब होने का भी खतरा बना हुआ है।
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कारीगरों के अनुसार सिरेमिक से तैयार होने वाले उत्पाद के लिए धूप की जरूरत होती है। ऐसे में उत्पाद के सांचे में मिट्टी भरकर धूप में रखना होता है। उसमें से अगले दिन कच्चा उत्पाद निकालकर उसको एक और मिट्टी के पानी से धोया जाता, जिसके बाद दोबारा उत्पाद को एक या दो दिन के लिए सुखाया जाता है। इसी के साथ इस्तेमाल हुए सांचे को भी धूप में रखकर सुखाया जाता है। इस प्रकिया में ही चार से पांच दिन का समय लगता है। अब बारिश के कारण काम रुका हुआ है। यदि कच्चे उत्पाद को समय से सुखाया नहीं गया तो उसके भी टूटने या खराब होने का खतरा रहता है।
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1. समय से ऑर्डर नहीं भेजे गए तो हो सकता है नुकसान
कुछ रिटेलर और कारोबारियों का ऑर्डर दस से 15 दिन पहले आता है। इसमें यदि समय से सप्लाई नहीं हो पाती है तो ऑर्डर कम होने की भी संभावना रहती है। ऐसे में नुकसान भी झेलना पड़ सकता है। बारिश के कारण न ही उत्पाद सूख पा रहे हैं और ना ही सांचे।
- राजीव गोयल, उद्यमी
2. धूप नहीं मिली तो कच्चे माल के खराब होने का खतरा
एक सांचे में कई बार उत्पाद तैयार किया जाता है। यदि सांचे सूखे नहीं होंगे तो मिट्टी के मिश्रण के खराब होने का खतरा रहता है। वहीं गमले तैयार करने में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। उनको सूखने में काफी समय लगता है।
- जोनू चौहान, उद्यमी