{"_id":"576440d24f1c1b5d7211c03c","slug":"officers-could-prevent-provocation-of-farmers","type":"story","status":"publish","title_hn":"संजीदा होते अफसर, न बिगड़ते हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संजीदा होते अफसर, न बिगड़ते हालात
अमर उजाला ब्यूरो, सिकंदराबाद
Updated Fri, 17 Jun 2016 11:56 PM IST
विज्ञापन
गुस्से में किसान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चकबंदी को लेकर हुए बवाल के पीछे कहीं ना कहीं प्रशासन की विफलता नजर आ रही है। यदि प्रशासन ने थोड़ी भी संजीदगी दिखाई होती तो हालात इस कदर न बिगड़ते।
बता दें कि झाझर गांव में चार जून से चकबंदी प्रक्रिया के तहत पैमाइश शुरू हुई। सात जून को किसान नेता मनचीर तेवतिया अपने समर्थकों के साथ चकबंदी के विरोध में धरने पर बैठ गए थे।
10 जून को तेवतिया सहित मास्टर ओम प्रकाश लोधी, चरण सिंह लोधी, हरीश चंद लोधी, प्रेम लोधी, महेशी देवी लोधी, अंजु लोधी, लक्ष्मी देवी लोधी ने आमरण अशन शुरू कर दिया था। 14 जून को आमरण अनशन पर बैठे किसान हरीशचंद्र लोधी की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
14 जून को की धरने की अगुवाई कर रहे मनवीर तेवतिया ने चकबंदी का विरोध छोड़कर प्रक्रिया का विरोध का एलान किया। तेवतिया ने कहा कि चकबंदी अधिकारी बाहरी लोगों से सांठ-गांठ कर लोगों को शोषण कर रहे है।
विज्ञापन
बाहरी लोगों को अच्छी जमीनें दी जा रही है। उन्होंने चकबंदी में स्थानियों किसानों का वरीयता देने, ग्रामीणों के द्वारा गठित चकबंदी समिति की सिफारिशों को मानने, तलाबों, पूखरों, ग्राम समाज, कस्टूडियन, विनोबाभव की 28 बीघा जमीन को भूमाफिया के चंगुल से मुक्त कराने की मांग की थी।
यादि प्रशासन मनवीर तेवतिया से वार्ता कर उसकी मांगों पर गौर करता और उसे उसकी जायज मांगों को पूरा करने का आश्वासन देता तो शायद शुक्रवार सुबह जो हुआ वह नहीं होता। तेवतिया ने चकबंदी के विरोध में सात जून से धरना प्रारंभ किया।
सात से 16 जून तक भी कोई भी प्रशासनिक अधिकारी धरनारत किसानों से बात करने नहीं पहुंचा। यदि प्रशासन ने थोड़ी भी संजीदगी दिखाई होती और पुलिस कार्रवाई से पहले धरनारत किसानों से वर्ता की होती तो शायद हालत बदल सकते थे।
विज्ञापन
बता दें कि झाझर गांव में चार जून से चकबंदी प्रक्रिया के तहत पैमाइश शुरू हुई। सात जून को किसान नेता मनचीर तेवतिया अपने समर्थकों के साथ चकबंदी के विरोध में धरने पर बैठ गए थे।
10 जून को तेवतिया सहित मास्टर ओम प्रकाश लोधी, चरण सिंह लोधी, हरीश चंद लोधी, प्रेम लोधी, महेशी देवी लोधी, अंजु लोधी, लक्ष्मी देवी लोधी ने आमरण अशन शुरू कर दिया था। 14 जून को आमरण अनशन पर बैठे किसान हरीशचंद्र लोधी की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
विज्ञापन
14 जून को की धरने की अगुवाई कर रहे मनवीर तेवतिया ने चकबंदी का विरोध छोड़कर प्रक्रिया का विरोध का एलान किया। तेवतिया ने कहा कि चकबंदी अधिकारी बाहरी लोगों से सांठ-गांठ कर लोगों को शोषण कर रहे है।
विज्ञापन
बाहरी लोगों को अच्छी जमीनें दी जा रही है। उन्होंने चकबंदी में स्थानियों किसानों का वरीयता देने, ग्रामीणों के द्वारा गठित चकबंदी समिति की सिफारिशों को मानने, तलाबों, पूखरों, ग्राम समाज, कस्टूडियन, विनोबाभव की 28 बीघा जमीन को भूमाफिया के चंगुल से मुक्त कराने की मांग की थी।
यादि प्रशासन मनवीर तेवतिया से वार्ता कर उसकी मांगों पर गौर करता और उसे उसकी जायज मांगों को पूरा करने का आश्वासन देता तो शायद शुक्रवार सुबह जो हुआ वह नहीं होता। तेवतिया ने चकबंदी के विरोध में सात जून से धरना प्रारंभ किया।
सात से 16 जून तक भी कोई भी प्रशासनिक अधिकारी धरनारत किसानों से बात करने नहीं पहुंचा। यदि प्रशासन ने थोड़ी भी संजीदगी दिखाई होती और पुलिस कार्रवाई से पहले धरनारत किसानों से वर्ता की होती तो शायद हालत बदल सकते थे।