फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   MOUNTAINEER ESCAPED FROM DEATH

बुलंदशहर के पर्वतारोही ने कारगिल में दी मौत को मात

Fri, 26 Aug 2016 12:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर
अमर उजाला ब्यूरो, बुलंदशहर Updated Fri, 26 Aug 2016 12:53 AM IST
विज्ञापन
MOUNTAINEER ESCAPED FROM DEATH
भूपेश - फोटो : अमर उजाला
 जिद, जुनून और शिखर। यही है जनपद के युवा पर्वतारोही भूपेश का सपना। सपना पूरा करने के लिए इस पर्वतारोही ने मौत को भी मात दे दी।
विज्ञापन


कारगिल की बर्फीली जमीन में 25 फीट नीचे धंसने के 15 मिनट बाद भूपेश को रेस्क्यू कर निकाला गया।गंभीर हालत में बाहर निकले भूपेश ने हौसला नहीं हारा और फिर मंजिल की तरफ बढ़ गया।


नगर के देवीपुरा निवासी युवा पर्वतारोही भूपेश (32) जम्मू-कश्मीर की सबसे ऊंची चोटी नुन (7136 मीटर) को फतह करने के मिशन पर निकला था। इंडियन आर्मी, जम्मू कश्मीर पुलिस जवानों समेत 30 पर्वतारोहियों की टीम 28 दिन के मिशन नुन पर निकली थी।
विज्ञापन


‘अमर उजाला’ से बृहस्पतिवार सुबह फोन पर करीब पांच मिनट हुई बातचीत में भूपेश ने बताया कि करीब पांच दिन पहले पर्वतारोहियों की टीम के साथ वह कारगिल की चोटी पर पहुंच गए थे। कारगिल में पर्वतारोहियों की टीम को बर्फीली हवा और तूफान का सामना करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


टीम ने वहीं बेस कैंप बनाकर रुकने का फैसला किया। चार बार एवरेस्ट फतह कर चुके दार्जिलिंग के मशहूर पर्वतारोही ओनंजडा शेरपा, दार्जिलिंग के ही आदित्य, चंडीगढ़ के संजू और उत्तराखंड के चनुहार के साथ भूपेश ऊपर चढ़ रहे थे।

इस दौरान जब यह दल बेस कैंप से कैंप-1 की तरफ रवाना हुआ तो अचानक भूपेश पैरों के नीचे से हिडन क्रैवास (बर्फ के ग्लेशियर के बीच एक गहरी दरार) की बर्फ हट जाने से 25 फीट नीचे चला गया। दल में सबसे पीछे चल रहे भूपेश की चीख निकली तो दल के अन्य पर्वतारोहियों ने उस ओर देखा।

दल में मौजूद एक आर्मी के जवान की मदद से तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन कर करीब 15 मिनट बाद भूपेश को बाहर निकाला गया। 15 मिनट तक क्रैवास के 25 फीट नीचे रहने से भूपेश के दोनों हाथों का सेंशेसन खत्म हो गया था।

एक पल के लिए ऐसा लगा कि जैसे भूपेश के दोनों हाथ ठंड के कारण खत्म हो गए, लेकिन रेस्क्यू टीम की सूझबूझ से भूपेश का उपचार कर उसे सामान्य कर दिया गया। मौत को मात देने के बाद भी भूपेश का हौसला कम नहीं हुआ और वह नुन चोटी फतह करने के लिए निकल पड़े।



एवरेस्ट फतह करना है सपना
भूपेश पुत्र मोमराज सिंह साधारण परिवार से है। भूपेश का सपना है कि वह एवरेस्ट को फतह कर शिखर पर पहुंचे। भूपेश हिमाचल प्रदेश, नॉर्थ ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड की करीब 20 से ज्यादा ऊंची चोटियों को फतह कर चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed