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Bulandshahar News: श्री शिव महापुराण कथा से पहले निकाली गई कलश यात्रा
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यमुनापुरम में कलश यात्रा निकाली महिला व अन्य भक्त। संवाद
बुलंदशहर। यमुनापुरम स्थित श्री महाकालेश्वर शिव मंदिर में मंगलवार से श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ हुआ। इससे पहले मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। इसमें शामिल महिलाएं उत्साह के साथ सिर पर कलश रखकर शामिल हुई। कलश यात्रा का शुभारंभ मंदिर स्थित कथा स्थल से हुआ और क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होती हुई कलश यात्रा वापस मंदिर पर आकर संपन्न हुई। इस दौरान भक्ति गीत व भजनों की गूंज से क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
वृंदावन से आए कथा प्रवक्ता आचार्य नवीन महाराज ने शिव महापुराण का महत्व, रुद्राक्ष की महिमा और शिवरात्रि के साथ शिवलिंग की महिमा की कथा सुनाकर मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कहा कि शिव पुराण कथा का असीम है, क्योंकि यह भगवान शिव की लीलाओं, महिमा और ज्ञान का पावन ग्रंथ है।
इसे सुनने से साधक को न केवल पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। कहा कि रुद्राक्ष जिसे भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है। आध्यात्मिक और औषधीय रूप से अत्यंत पावन और शक्तिशाली है। इसे धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मानसिक शांति मिलती है और शनिदेव के कष्ट कम होते हैं।
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बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, जब भगवान शिव निराकार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस रात्रि शिव-पार्वती का विवाह हुआ था और शिव ने तांडव किया था। शिवलिंग की महिमा अपरंपार है। यह शिव की अनंत ऊर्जा, निराकार दिव्यता और शाश्वत सत्य का प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
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वृंदावन से आए कथा प्रवक्ता आचार्य नवीन महाराज ने शिव महापुराण का महत्व, रुद्राक्ष की महिमा और शिवरात्रि के साथ शिवलिंग की महिमा की कथा सुनाकर मौजूद श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। कहा कि शिव पुराण कथा का असीम है, क्योंकि यह भगवान शिव की लीलाओं, महिमा और ज्ञान का पावन ग्रंथ है।
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इसे सुनने से साधक को न केवल पापों से मुक्ति मिलती है बल्कि मानसिक शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। कहा कि रुद्राक्ष जिसे भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है। आध्यात्मिक और औषधीय रूप से अत्यंत पावन और शक्तिशाली है। इसे धारण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मानसिक शांति मिलती है और शनिदेव के कष्ट कम होते हैं।
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बताया कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है, जब भगवान शिव निराकार ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। इस रात्रि शिव-पार्वती का विवाह हुआ था और शिव ने तांडव किया था। शिवलिंग की महिमा अपरंपार है। यह शिव की अनंत ऊर्जा, निराकार दिव्यता और शाश्वत सत्य का प्रतीक है। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।