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Bulandshahar News: विधायक के मामले में विवेचक ने चार्जशीट खारिज कर लगाई फाइनल रिपोर्ट, कोर्ट ने माना आपत्तिजनक
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अनूपशहर। भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी के आचार संहिता मामले में विवेचक ने चार्जशीट खारिज कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इसे एमपी एमएलए कोर्ट ने आपत्तिजनक माना है। साथ ही एसएसपी बुलंदशहर व डीजीपी को मामले में जांच करने के आदेश दिए हैं। इससे अब विधायक और विवेचक की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही हैं।
सदर भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी मामले में विवेचक राहुल कुमार ने आरोप पत्र निरस्त कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। कोर्ट ने गंभीर लापरवाही मानते हुए एसएसपी व डीजीपी को जांच के लिए पत्र लिखा है। वादी के अधिवक्ता मोहित गर्ग ने बताया कि सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र में वर्तमान भाजपा सदर विधायक प्रदीप चौधरी व अन्य के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में तत्कालीन विवेचक राजकुमार मिश्रा द्वारा आरोप पत्र लगाया गया था। शेष विवेचना के लिए एसएसपी बुलंदशहर ने आदेश जारी किया था। लेकिन नवनियुक्त विवेचक राहुल कुमार द्वारा आरोप पत्र निरस्त कराए बिना शेष बिंदु पर विवेचना जारी कर दी गई। इसके साथ ही एसएसपी के आदेश के पश्चात विवेचक राहुल कुमार ने उक्त घटना का वीडियो व फोटो संलग्न नहीं किया और जनता के गवाहों से मांगते रहे। न्यायालय ने आपत्तिजनक माना। यदि विवेचक चाहते तो उक्त घटना का वीडियो साइबर सेल, जनसूचना विभाग एवं कोतवाली प्रभारी से प्राप्त कर सकते थे। लेकिन, विवेचक द्वारा जानबूझकर ऐसा नहीं किया गया।
वादी के अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में विवेचक की एक लापरवाही और सामने आई है। इसमें विवेचक ने एसएसपी को आरोप पत्र निरस्त करने का प्रार्थना पत्र दिया, बिना एसएसपी के आदेश प्राप्त किए खुद ही आरोप पत्र निरस्त कर दिया। इसके साथ ही विवेचक ने एसपी ग्रामीण के नाम से आरोप निरस्तीकरण दाखिल कर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित की। केस डायरी में एसपी ग्रामीण का कोई भी आदेश संलग्न नहीं था। साथ ही डीएम की चुनाव संबंधित प्रेस विज्ञप्ति की सूची में भी इस घटना की तारीख का उल्लेख था। विवेचक ने नजरअंदाज किया। इस संपूर्ण मामले में विवेचक राहुल कुमार की गंभीर लापरवाही मानते हुए एसीजेएम एमपी- एमएलए विनय कुमार सिंह चतुर्थ की कोर्ट ने एसएसपी व डीजीपी को जांच के लिए पत्र लिखा है। साथ ही एक माह के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
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सदर भाजपा विधायक प्रदीप चौधरी मामले में विवेचक राहुल कुमार ने आरोप पत्र निरस्त कर फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी। कोर्ट ने गंभीर लापरवाही मानते हुए एसएसपी व डीजीपी को जांच के लिए पत्र लिखा है। वादी के अधिवक्ता मोहित गर्ग ने बताया कि सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र में वर्तमान भाजपा सदर विधायक प्रदीप चौधरी व अन्य के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में तत्कालीन विवेचक राजकुमार मिश्रा द्वारा आरोप पत्र लगाया गया था। शेष विवेचना के लिए एसएसपी बुलंदशहर ने आदेश जारी किया था। लेकिन नवनियुक्त विवेचक राहुल कुमार द्वारा आरोप पत्र निरस्त कराए बिना शेष बिंदु पर विवेचना जारी कर दी गई। इसके साथ ही एसएसपी के आदेश के पश्चात विवेचक राहुल कुमार ने उक्त घटना का वीडियो व फोटो संलग्न नहीं किया और जनता के गवाहों से मांगते रहे। न्यायालय ने आपत्तिजनक माना। यदि विवेचक चाहते तो उक्त घटना का वीडियो साइबर सेल, जनसूचना विभाग एवं कोतवाली प्रभारी से प्राप्त कर सकते थे। लेकिन, विवेचक द्वारा जानबूझकर ऐसा नहीं किया गया।
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वादी के अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में विवेचक की एक लापरवाही और सामने आई है। इसमें विवेचक ने एसएसपी को आरोप पत्र निरस्त करने का प्रार्थना पत्र दिया, बिना एसएसपी के आदेश प्राप्त किए खुद ही आरोप पत्र निरस्त कर दिया। इसके साथ ही विवेचक ने एसपी ग्रामीण के नाम से आरोप निरस्तीकरण दाखिल कर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित की। केस डायरी में एसपी ग्रामीण का कोई भी आदेश संलग्न नहीं था। साथ ही डीएम की चुनाव संबंधित प्रेस विज्ञप्ति की सूची में भी इस घटना की तारीख का उल्लेख था। विवेचक ने नजरअंदाज किया। इस संपूर्ण मामले में विवेचक राहुल कुमार की गंभीर लापरवाही मानते हुए एसीजेएम एमपी- एमएलए विनय कुमार सिंह चतुर्थ की कोर्ट ने एसएसपी व डीजीपी को जांच के लिए पत्र लिखा है। साथ ही एक माह के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।
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