{"_id":"690b85dff172a1e29c08576e","slug":"grading-of-government-schools-fell-got-c-and-d-category-bulandshahr-news-c-133-1-bul1002-143120-2025-11-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bulandshahar News: राजकीय स्कूलों की ग्रेडिंग गिरी, मिली सी व डी श्रेणी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bulandshahar News: राजकीय स्कूलों की ग्रेडिंग गिरी, मिली सी व डी श्रेणी
विज्ञापन
बुलंदशहर। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन आने वाले जिले के राजकीय स्कूलों की स्थिति अच्छी नहीं है। शासन से जारी हुई ग्रेडिंग में जिले के 50 राजकीय स्कूल मानकों पर खरे नहीं उतरे। किसी भी स्कूल को ए ग्रेड नहीं मिल सका है। 200 अंकों में से स्कूल 120 से 90 नंबरों तक सिमट गए हैं। स्कूलों में मानक और पढ़ाई व्यवस्था भी ठीक नहीं है।
सबसे ज्यादा हालत खराब पंडित दीन दयाल उपाध्याय मॉडल कॉलेजों की है। व्यवस्थाओं के अभाव के साथ ही पूरा स्टाफ तक नहीं है। शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष राजकीय स्कूलों की समीक्षा की जाती है, इसके बाद सभी व्यवस्थाओं को देखने के बाद इन्हें प्रदेश, मंडल व जिला स्तर पर रैंक मिलती है।
शासन से जो अब रैंक आई है उसमें जिले के 50 राजकीय स्कूलों की रैंक बेहद खराब है। वहीं, ग्रेडिंग में 16 स्कूल सबसे ज्यादा सी ग्रेड में आए हैं। इसके अलावा 31 स्कूलों को सी और तीन स्कूलों को डी ग्रेड मिला है। विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसमें शैक्षणिक गुणवत्ता को देखा गया है, जबकि अन्य व्यवस्थाओं में कुछ सुधार आया है। प्रदेश स्तर तो दूर की बात मंडल स्तर में भी कोई स्कूल बेहतर स्थान प्राप्त नहीं कर सका है।
विज्ञापन
जिला विद्यालय निरीक्षक विनय कुमार ने बताया कि जिले के राजकीय स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की है। अधिकांश विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। स्कूलों में पूरा स्टाफ नहीं हैं। सेवानिवृत्त शिक्षकों के सहारे स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी स्कूलों में पूरी नहीं हैं। जिले के राजकीय स्कूलों में करीब 200 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। स्कूलों में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सुधारा जाएगा।
विज्ञापन
सबसे ज्यादा हालत खराब पंडित दीन दयाल उपाध्याय मॉडल कॉलेजों की है। व्यवस्थाओं के अभाव के साथ ही पूरा स्टाफ तक नहीं है। शासन द्वारा प्रत्येक वर्ष राजकीय स्कूलों की समीक्षा की जाती है, इसके बाद सभी व्यवस्थाओं को देखने के बाद इन्हें प्रदेश, मंडल व जिला स्तर पर रैंक मिलती है।
विज्ञापन
शासन से जो अब रैंक आई है उसमें जिले के 50 राजकीय स्कूलों की रैंक बेहद खराब है। वहीं, ग्रेडिंग में 16 स्कूल सबसे ज्यादा सी ग्रेड में आए हैं। इसके अलावा 31 स्कूलों को सी और तीन स्कूलों को डी ग्रेड मिला है। विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसमें शैक्षणिक गुणवत्ता को देखा गया है, जबकि अन्य व्यवस्थाओं में कुछ सुधार आया है। प्रदेश स्तर तो दूर की बात मंडल स्तर में भी कोई स्कूल बेहतर स्थान प्राप्त नहीं कर सका है।
विज्ञापन
जिला विद्यालय निरीक्षक विनय कुमार ने बताया कि जिले के राजकीय स्कूलों में सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की है। अधिकांश विषयों के शिक्षकों के पद रिक्त हैं। स्कूलों में पूरा स्टाफ नहीं हैं। सेवानिवृत्त शिक्षकों के सहारे स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा अन्य व्यवस्थाएं भी स्कूलों में पूरी नहीं हैं। जिले के राजकीय स्कूलों में करीब 200 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। स्कूलों में निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को सुधारा जाएगा।