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Bulandshahar News: उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने को पॉस मशीन में जियो फेंसिंग लागू
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बुलंदशहर। उर्वरकों की कालाबाजारी, तस्करी और अनियमित बिक्री पर रोक लगाने के लिए अब पॉइंट ऑफ सेल पॉस मशीन में जियो फेंसिंग व्यवस्था लागू कर दी गई है। नई प्रणाली के तहत कोई भी उर्वरक विक्रेता निर्धारित सीमा से 200 मीटर से बाहर उर्वरक बेचने की कोशिश करेगा तो पॉस मशीन स्वतः बंद हो जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने बताया कि इस नई तकनीक से उर्वरकों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगा। जिले के सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं और सहकारी समितियों की दुकानों की लोकेशन पॉस मशीन में अपडेट कराई जा रही है। एल-1 पॉस मशीन में नए वर्जन 3.31 टीएमएस से उर्वरकों के वितरण का कार्य होगा।
प्रत्येक विक्रेता के प्रतिष्ठान, गोदाम का अक्षांश, देशांतर पॉस मशीन में दर्ज किया जा रहा है। मशीन अब केवल तय सीमा के भीतर ही कार्य करेगी। जैसे ही वह डिजिटल सीमा के बाहर जाएगी, मशीन का नेटवर्क सर्वर से संपर्क टूट जाएगा और बिक्री स्वतः बंद हो जाएगी। शासन के निर्देश पर जियो फेंसिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है, इससे स्टॉक और बिक्री की वास्तविक लोकेशन का मिलान आसान होगा।
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नई व्यवस्था के बाद कोई भी उर्वरक विक्रेता स्टॉक को चोरी, छिपे दूसरी जगह ले जाकर वितरण नहीं कर पाएगा। पहले पॉस मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर गलत तरीके से बिक्री की शिकायतें आती थीं। जियो फेंसिंग से यह पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके अलावा उर्वरक वितरण की समय सीमा भी तय कर दी गई है। अब शाम 8 बजे तक ही बिक्री की अनुमति होगी। रामकुमार यादव का कहना है कि अब नया वर्जन आने से खाद के लिए मारामारी नहीं मचेगी। जो किसान पहले खाद ले चुका है, वह दोबारा उसी खतौनी पर जरूरत से अधिक खाद नहीं ले सकेगा।
दुकानों पर दुकानदार कालाबाजारी नहीं कर सकेंगे। इसी प्रकार खाद की किल्लत होने पर दुकानदार मनमाने भाव में खाद की बिक्री करने लगते थे। नए वर्जन में अब यह संभव नहीं हो पाएगा। कृषि विभाग, डीएम और शासन स्तर पर इससे संबंधित पोर्टल से निगरानी की जाएगी।
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जिला कृषि अधिकारी रामकुमार यादव ने बताया कि इस नई तकनीक से उर्वरकों का वितरण पूरी तरह पारदर्शी हो जाएगा। जिले के सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं और सहकारी समितियों की दुकानों की लोकेशन पॉस मशीन में अपडेट कराई जा रही है। एल-1 पॉस मशीन में नए वर्जन 3.31 टीएमएस से उर्वरकों के वितरण का कार्य होगा।
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प्रत्येक विक्रेता के प्रतिष्ठान, गोदाम का अक्षांश, देशांतर पॉस मशीन में दर्ज किया जा रहा है। मशीन अब केवल तय सीमा के भीतर ही कार्य करेगी। जैसे ही वह डिजिटल सीमा के बाहर जाएगी, मशीन का नेटवर्क सर्वर से संपर्क टूट जाएगा और बिक्री स्वतः बंद हो जाएगी। शासन के निर्देश पर जियो फेंसिंग का कार्य तेजी से किया जा रहा है, इससे स्टॉक और बिक्री की वास्तविक लोकेशन का मिलान आसान होगा।
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नई व्यवस्था के बाद कोई भी उर्वरक विक्रेता स्टॉक को चोरी, छिपे दूसरी जगह ले जाकर वितरण नहीं कर पाएगा। पहले पॉस मशीन को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाकर गलत तरीके से बिक्री की शिकायतें आती थीं। जियो फेंसिंग से यह पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके अलावा उर्वरक वितरण की समय सीमा भी तय कर दी गई है। अब शाम 8 बजे तक ही बिक्री की अनुमति होगी। रामकुमार यादव का कहना है कि अब नया वर्जन आने से खाद के लिए मारामारी नहीं मचेगी। जो किसान पहले खाद ले चुका है, वह दोबारा उसी खतौनी पर जरूरत से अधिक खाद नहीं ले सकेगा।
दुकानों पर दुकानदार कालाबाजारी नहीं कर सकेंगे। इसी प्रकार खाद की किल्लत होने पर दुकानदार मनमाने भाव में खाद की बिक्री करने लगते थे। नए वर्जन में अब यह संभव नहीं हो पाएगा। कृषि विभाग, डीएम और शासन स्तर पर इससे संबंधित पोर्टल से निगरानी की जाएगी।