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Bulandshahar News: जन औषधि केंद्र खोलने के नाम पर 5.27 लाख की ठगी
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बुलंदशहर। जन औषधि केंद्र खोलने के नाम पर जालसाजों ने एक व्यक्ति से 5.27 लाख रुपये ठग लिए। आरोप है कि दो ठगों ने पहले पंजीकरण और फिर अनुबंध व दवाई सप्लाई के नाम पर धनराशि वसूल की। जब वह दिल्ली में दिए गए पते पर पहुंचे तो ठगी की जानकारी हुई। मामले में साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
औरंगाबाद के अनामिका शुगर मिल निवासी ओमप्रकाश रस्तोगी ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि 17 मार्च 2024 को उन्होंने इंटरनेट पर जन औषधि केंद्र के संचालन के लिए सर्च किया था। इसके बाद एक वेबसाइट पर उनके द्वारा मोबाइल नंबर, नाम व ई-मेल आईडी डाली गई। अगले दिन एक फोन कॉल आई और कॉल करने वाले ने खुद को अमित कुमार बताते हुए औषधि केंद्र के पंजीकरण के लिए 11,400 रुपये एक बैंक खाते में जमा करा लिए। इसके बाद 30 मार्च को उनसे अनुबंध शुल्क के नाम पर 84,950 रुपये जमा कराए गए। चार अप्रैल को आरोपी ने उन्हें कॉल करके दवाई सप्लाई के नाम पर 2.5 लाख रुपये एक खाते में डलवाए।
जबकि एनओसी व अन्य खर्चों के लिए आरोपी द्वारा 1,80,900 रुपये जमा कराए गए। इंश्योरेंस ट्रेड लाइसेंस का औषधि वितरक से कोई संबंध न होने पर उन्हें शक हुआ। जिसके बाद आरोपियों द्वारा दिए गए पते पर वह दिल्ली पहुंचे। वहां पता चला कि न तो कार्यालय में आदित्य शेखावत और न ही अमित कुमार नाम का कोई व्यक्ति काम करता है। एसपी सिटी शंकर प्रसाद ने बताया कि प्रकरण में जांच की जा रही है। ठगी कई माह पुरानी है, जिसके चलते खातों को सीज करने में परेशानी हो रही है।
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औरंगाबाद के अनामिका शुगर मिल निवासी ओमप्रकाश रस्तोगी ने पुलिस को शिकायत देकर बताया कि 17 मार्च 2024 को उन्होंने इंटरनेट पर जन औषधि केंद्र के संचालन के लिए सर्च किया था। इसके बाद एक वेबसाइट पर उनके द्वारा मोबाइल नंबर, नाम व ई-मेल आईडी डाली गई। अगले दिन एक फोन कॉल आई और कॉल करने वाले ने खुद को अमित कुमार बताते हुए औषधि केंद्र के पंजीकरण के लिए 11,400 रुपये एक बैंक खाते में जमा करा लिए। इसके बाद 30 मार्च को उनसे अनुबंध शुल्क के नाम पर 84,950 रुपये जमा कराए गए। चार अप्रैल को आरोपी ने उन्हें कॉल करके दवाई सप्लाई के नाम पर 2.5 लाख रुपये एक खाते में डलवाए।
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जबकि एनओसी व अन्य खर्चों के लिए आरोपी द्वारा 1,80,900 रुपये जमा कराए गए। इंश्योरेंस ट्रेड लाइसेंस का औषधि वितरक से कोई संबंध न होने पर उन्हें शक हुआ। जिसके बाद आरोपियों द्वारा दिए गए पते पर वह दिल्ली पहुंचे। वहां पता चला कि न तो कार्यालय में आदित्य शेखावत और न ही अमित कुमार नाम का कोई व्यक्ति काम करता है। एसपी सिटी शंकर प्रसाद ने बताया कि प्रकरण में जांच की जा रही है। ठगी कई माह पुरानी है, जिसके चलते खातों को सीज करने में परेशानी हो रही है।
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