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Bulandshahar News: किसानों का कर्जा न हुआ माफ, न फ्री बिजली

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jul 2024 02:05 AM IST
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Farmers' loans not waived off, nor free electricity
ऊंचागांव में केंद्र सरकार के बजट पर चर्चा करते किसान। संवाद
बुलंदशहर। बजट से जिले के युवा, किसान, विद्यार्थी, गृहिणी समेत अन्य वर्ग के लोगों को राहत की आस थी, लेकिन सरकार ने ऐसी घोषणा नहीं की जो सभी खुश हो सकें। महिलाओं का कहना है कि इस बजट से महंगाई से निजात मिलने की आस थी। लेकिन बजट में महंगाई पर ध्यान नहीं दिया गया है। अब महंगाई झेलना मजबूरी होगा और किसी न किसी तरह रसोई व घर चलाना ही पड़ेगा।
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छात्रों को सरकार के बजट से महंगी शिक्षा और किताबों से निजात मिलने की आस थी, जो अधूरी रह गई। साथ ही किसानों को महंगे उर्वरक, कीटनाशक के दाम कम करने, बिजली फ्री करने, फसलों के उचित दाम मिलने की आस थी, लेकिन वह भी अधूरी है।
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बोले किसान...

सरकार के इस बजट में यदि सरकार कर्ज माफी के साथ फ्री बिजली और महंगे उर्वरक आदि से निजात दिलाती तो वह स्वागत योग्य था। लेकिन जो भी बजट में शामिल किया गया है। उससे इस क्षेत्र के किसानों को लाभ नहीं मिलने वाला है। - महेंद्र सिंह, किसान
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सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती आई है। लेकिन आज तक ऐसा नहीं हो सका। इस बार सरकार के बजट से काफी आस थी, लेकिन न तो किसान सम्मान निधि की राशि में बढ़ोतरी हुई और न ही एमएसपी को लेकर कोई घोषणा की गई है। - अरब सिंह, जिलाध्यक्ष, भाकियू टिकैत



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बोले युवा ----

केंद्र सरकार के बजट में इंटर्नशिप, स्पाईपेंट योजना के साथ एक हजार रोजगार प्रशिक्षण केंद्र खोलने की बात कही गई है। इससे आस जगी है कि कुछ न कुछ तो मिलेगा। इस समय रोजगार के लिए युवाओं को भटकना पड़ रहा है। - आशु पंडित।

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वैसे तो सरकार ने बजट में कई योजनाओं को शामिल किया है। लेकिन इनका लाभ भी मिलना चाहिए। यदि सरकार पूर्व के बजट में नौकरी देने की गई घोषणा को शामिल करती तो यह नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए तोहफा होता। - मुस्कान।

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बोले छात्र-छात्राएं ----

साल-दर-साल शिक्षा और किताब इतनी महंगी होती जा रही हैं कि खरीद पाने में अभिभावकों की जेब ढीली हो जाती है। इस बार बजट से काफी आस थी, लेकिन ऐसा न होने पर मायूसी ही हाथ लगी है। इस ओर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। - विदित उर्फ नूपुर।

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बजट में छात्रों को मॉडल स्किल लोन का लाभ देने की बात की है। इससे पढ़ाई पूरी न करने वाले छात्रों का सपना पूरा होगा। लेकिन सरकार ने बजट में महंगी शिक्षा और महंगी किताब से निजात दिलाने के लिए कोई पहल नहीं की है। जबकि इसकी सभी को जरूरत है। - तापुर शर्मा।



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बोली महिलाएं ----

रसोई का सामान हो या फिर कोई जरूरत का सामान। सभी इतना महंगा हो गया कि खरीद पाना सभी के बस की बात नहीं है। सरकार के इस बजट से कुछ राहत की उम्मीद थी, लेकिन वह भी अधूरी रह गई। - अंजु अग्रवाल।

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महंगाई इस कदर लगातार बढ़ती जा रही है कि जरूरत का सामान खरीदने में कटौती करना मजबूरी हो गई है। महंगाई के दौर में रसोई का सामान भी पूरा नहीं खरीद पाते। सरकार को महंगाई कम करने पर ध्यान देना चाहिए था, ताकि इससे सभी को राहत मिलती। - छवि सिंघल।




बोले चार्टड एकाउंटेंट -

बजट को मिश्रित बजट कहा जा सकता है। नई व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्यक्ष कर में छूट दी गई हैं, लेकिन पुरानी व्यवस्था इसके अंतर्गत छोटे निवेश को प्रोत्साहन दिया जाना था, लेकिन उसे हतोत्साहित किया गया है। जिसके कारण लोग बचत के लिए निवेश के प्रति भी उदासीन हो जाएंगे। विदेशी कंपनियों के लाभ पर टैक्स 40 से 35 प्रतिशत करने विदेशी निवेश आकर्षित होगा। - अवकाश शर्मा, चार्टर्ड अकाउंटेंट


न्यू टैक्स रिजीम में कटौती कर सरकार ने बड़ी राहत दी है। देश की टॉप कंपनियों में युवाओं को प्रशिक्षण की घोषणा से युवाओं की स्किल बेहतर होगी और उन्हें नौकरी के लिए अधिक भटकना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा मुद्रा ऋण की सीमा भी 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख किए जाने से अपना व्यापार शुरू करने वाले लोगों को राहत मिलेगी। ---- मुकुल शर्मा, चार्टर्ड अकाउंटेंट
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