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Bulandshahar News: करोड़ों खर्च के बाद भी साफ नहीं हुई काली नदी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 17 Apr 2024 10:37 PM IST
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Even after spending crores of rupees the Kali river was not cleaned
बड़ा मुद्दा वाली खबर के लिए फोटो: काली नदी का फोटो।
बुलंदशहर। काली नदी की सफाई के लिए कई बार योजनाएं बनाई गईं। सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन न तो काली नदी साफ हुई और न ही आसपास के गांवों के लोगों को राहत मिली। आज भी काली नदी के किनारे बसे 25 गांवों के 72 हजार से अधिक लोगों को सिंचाई और पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पा रहा है।
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जिले में गुलावठी क्षेत्र से प्रवेश करते हुए काली नदी छतारी होकर अलीगढ़ में प्रवेश करने तक करीब 110 किमी का सफर तय करती है। विभिन्न गांव, शहर और कस्बों से होकर गुजरने के दौरान इसमें बड़ी संख्या में नालों का गंदा पानी डाला जाता है। जिसके चलते अब काली नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। गुलावठी, बुलंदशहर, शिकारपुर, पहासू, छतारी के 25 से अधिक गांवों के 72 हजार लोगों को काली नदी साफ न होने से सीधे तौर पर परेशानी हो रही है, लेकिन इसके बाद भी जनप्रतिनिधि और सरकार ने काली की सफाई के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
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इन क्षेत्रों के गांवों में रहने वाले 500 से अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्हें दूषित पानी के कारण कैंसर, किडनी और लीवर इंफेक्शन जैसी खतरनाक बीमारियों से जूझना पड़ रहा है। करीब छह साल पहले काली नदी के पानी की केन्द्रीय भूजल बोर्ड ने जांच कराई तो पता चला कि नदी के पानी में अत्यधिक मात्रा में सीसी, मैग्नीज और लोहा जैसे भारी तत्व मिले थे। जबकि आक्सीजन की मात्रा शून्य थी।
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20 लोगों की कैंसर से हुई मौत

पिछले करीब एक दशक में इन क्षेत्रों में 20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। काली नदी के किनारे बसे गांव अजीबाबाद निवासी छत्रपाल, श्रीपाल, राकेश, सोमदत्त, नवाब, सुशीला, सुरेश, सुरजावली गांव निवासी सत्यवती, बांकेलाल, छीतर, हरेन्द्र, भगवानी, गांव अमरपुर निवासी वीर सिंह, मुख्तयारी, हरिओम, रविन्द्र, विजयपाल, प्रेमपाल, गांव नगला सारंगपुर निवासी सूरजपाल, बदरखा निवासी रनवीर समेत 20 से अधिक लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है।



एक साल पहले जारी हुए थे 90 करोड़, काम जीरो

करीब एक साल पहले काली नदी की सफाई के लिए 90 करोड़ रुपये का बजट नमामि गंगे अभियान के तहत जारी किया गया था। नीर फाउंडेशन के साथ मिलकर इस धनराशि से काली की सफाई के साथ किनारों पर 72 हजार पौधे लगाने, गंदे नालों को काली में गिरने से रोकने की योजना बनाई थी, लेकिन न तो सफाई के लिए कदम उठाए गए और न ही पौधे लगाने की कोई कार्रवाई हुई।



बोले लोग -

काली नदी के कारण आसपास के कई गांवों में लोगों को पेयजल भी साफ नहीं मिलता, लेकिन नदी की सफाई के नाम पर सब उदासीन है, न अधिकारी और न ही जनप्रतिनिधियों को इसके लिए फुर्सत है। - पिंटू



नदी के किनारे बारिश के मौसम में खेतों में फसल बर्बाद होती है, बार-बार धरना प्रदर्शन होते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है। यदि समय पर सफाई हो तो समस्या का समाधान होगा। - रामभूल



दूषित पानी के कारण लोग कैंसर, लीवर और किडनी की गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। पास के खेतों में फसल भी खराब हो रही है, लेकिन अधिकारियों को समस्या के समाधान के लिए कोई फुर्सत नहीं है। - विशाल यादव




काली नदी कभी जीवनदायिनी होती थी, लेकिन अब तो जलीय जीवों के लिए भी उपयुक्त नहीं है। पूर्व में हुई पानी की जांच रिपोर्ट इसका सबूत है। दावे और वादों के बीच आज भी नदी की सफाई का इंतजार है। - योगेश ठाकुर
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