फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   death punishment

डीएनए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने प्रेम सिंह को फांसी के फंदे तक पहुंचाया

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 10:57 PM IST
विज्ञापन
death punishment
बुलंदशहर : फांसी की सजा सुनाने के बाद हत्यारोपी प्रेम सिंह को कोर्ट से बाहर लाते पुलिसकर्मी। - फोटो : BULANDSHAHR
डीएनए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने प्रेम सिंह को फांसी के फंदे तक पहुंचाया
विज्ञापन

बुलंदशहर। बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी प्रेम सिंह को फांसी की सजा होने में डीएनए सैंपल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट काफी अहम साबित हुईं। दोनों साक्ष्य इतने मजबूत थे कि आरोपी पक्ष की सभी दलीलें कमजोर साबित हुईं।
विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो भरत शर्मा ने बताया कि आरोपी पक्ष के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में खूब दलीलें दीं। लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के शव की जो हालत थी, उसे देखते हुए दलीलों का कोई असर नहीं हुआ। कहा गया कि प्रेम सिंह पांच बच्चों का पिता है। उसके चार बेटियां हैं। वह ऐसी जघन्य वारदात को अंजाम नहीं दे सकता। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को इतनी चोट लगी थी, जिसके कारण आंतें पेट से बाहर आ गई थीं। बच्ची की श्वांस नली में मिट्टी जम गई थी। इसके अलावा बच्ची के शरीर के विभिन्न हिस्सों से लिए गए सैंपल और आरोपी के सीमन के डीएनए सैंपल मैच हुए थे। इसके आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया था।
विज्ञापन

पुलिस ने कायम की मिसाल
घटना 10 जुलाई 2020 को हुई थी। शिकारपुर क्षेत्र के एक गांव निवासी पीड़ित पिता ने पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि उसकी दो वर्षीय बच्ची घर के पास खेलते समय गायब हो गई। बच्ची का जब कोई सुराग नहीं लगा तो परिजनों ने पड़ोस में रहने वाले प्रेम सिंह पर बच्ची के अपहरण और हत्या का आरोप लगाया था। मामले में 11 दिन में चार्जशीट दाखिल कर पुलिस ने मिसाल कायम की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

बच्ची की तलाश में साथ रहा था आरोपी
दोषी प्रेम सिंह पुलिस और परिजनों के साथ बच्ची की तलाश में भी शामिल था। परिजनों ने उस पर शक भी जताया था, लेकिन मौके पर उसकी मौजूदगी के कारण पुलिस भी सीधे उसे गिरफ्तार करने से बच रही थी। जब प्रत्यक्षदर्शी ने बच्ची को आरोपी के साथ अंतिम बार तालाब पर देखने की बात पुलिस को बताई तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया था कि उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म कर बेहोशी की हालत में तालाब में फेंक दिया था।
एक वर्ष में दुष्कर्म व हत्या के पांच दोषियों को फांसी
दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में पॉक्सो कोर्ट ने इस वर्ष अब तक तीन मामलों में पांच दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। 24 मार्च 2021 को ट्यूशन जाते 11वीं की छात्रा को घर के बाहर से खींचकर दुष्कर्म और हत्या के मामले में तीन दोषियों जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद और इजरायल उर्फ मालानी निवासी सिकंदराबाद को फांसी की सजा सुनाई थी। खुर्जा क्षेत्र में अगस्त 2020 को आठ वर्षीय बच्ची को भुट्टा दिलाने के बहाने खेत में ले जाकर दुष्कर्म और शोर मचाने पर गला दबाकर हत्या के मामले में आरोपी अशोक कुमार को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
बोलीं महिला अधिवक्ता
दुष्कर्म और हत्या की वारदात को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द फैसला सुनाए जाने की जरूरत है। इससे देश में महिलाओं पर अत्याचार करने वालों में भय व्याप्त होगा। तभी महिलाएं सशक्त और निर्भीक बन सकेंगी। - अनुपमा रघुवंशी, अधिवक्ता
मासूम बच्चियों को देश में देवी के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में बच्चियों के साध दरिंदगी के दोषियों को फांसी की सजा भी कम है। यदि पुलिस, अधिवक्ता और लोग मिलकर काम करें तो महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है। - अंजू शर्मा, अधिवक्ता
महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिलाओं पर अत्याचार करने के दोषियों को जल्द से जल्द और सख्त सजा दिलाने की जरूरत है। इसके लिए सभी महिला अधिवक्ता भी प्रयासरत हैं। - सुमनलता गोस्वामी, अधिवक्ता

कई बार महिलाओं पर अत्याचार के आरोपियों की पैरवी ठीक से नहीं होती है। ऐसे में खराब मानसिकता वाले लोग बच जाते हैं और भविष्य में फिर से महिलाओं पर अत्याचार करते हैं। पुलिस को सख्त जांच करते हुए और अधिवक्ताओं को सख्त पैरवी के बाद उन्हें सजा दिलाने की जरूरत है।
- पिंकी राणा, अधिवक्ता
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed