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जमानत पर भी रिहा नहीं किया, जज-जेलर तलब

Sat, 12 Nov 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर Updated Sat, 12 Nov 2016 12:21 AM IST
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Not released on bail , The judge summoned the warder
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इंस्पेक्टर डीपी गौड़ की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे मुल्जिम को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद भी रिहा न करने के मामले में जेलर और पीठासीन अधिकारी फंस गए हैं। हाईकोर्ट ने दोनों को तलब करते हुए 17 नवंबर 2016 को उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

जेलर ने रिहाई के प्रपत्रों पर आपत्ति लगाते हुए पीठासीन अधिकारी को प्रपत्र भेज दिए थे। जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बता दें कि 9 अक्तूबर 1989 को डिबाई कोतवाली क्षेत्र में इंस्पेक्टर डीपी गौड़ की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
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मृतक के भाई नरेंद्र गौड़ ने योंगेंद्र बझैड़ा, संजय दीक्षित, प्रमोद कुमार शर्मा, हरपाल, चंद्रपाल, संजय कुमार, वीरपाल बझैड़ा, महेंद्र कुमार कौशिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी महेंद्र कुमार कौशिक को 120बी का मुल्जिम बनाया था।
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जबकि एक आरोपी वीरपाल फरारी काट रहा था। 3 अगस्त 2015 को न्यायाधीश ने महेंद्र कौशिक को बरी करते हुए शेष छह आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके अगले दिन 4 अगस्त 2015 को सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

अधिवक्ता हर्षवर्धन दीक्षित ने बताया कि 24 अक्तूबर 2016 को संजय दीक्षित और हरपाल को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। जेलर ने संजय दीक्षित को तो रिहा कर दिया। लेकिन हरपाल के जमानत प्रपत्रों में कमी बताते हुए कोर्ट को वापस लौटा दिए। इसके चलते हरपाल की रिहाई नहीं हो सकी।


प्रपत्रों मेें सुधार करने जब अधिवक्ता पहुंचे तो हाईकोर्ट के जज न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व प्रभात चंद्र त्रिपाठी की दो सदस्यीय खंडपीठ ने विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट/अपर जिला व सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या-13 के पीठासीन अधिकारी और जेलर कुलदीप भदौरिया को तलब कर लिया। हाईकोर्ट ने दोनों को 17 नवंबर 2016 को पेश होने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने पूछा कि आदेश के बाद भी उसका पालन क्यों नहीं किया गया?

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