लापरवाही या रंजिश: झूठे केस ने बर्बाद कर दिया जिंदगी के दस वर्ष

Ghaziabad Bureau Updated Tue, 17 Apr 2018 10:32 PM IST
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लापरवाही या रंजिश- झूठे के स ने बर्बाद कर दिए 10 साल
- वर्ष 2007 में दर्ज हुए हत्या के मामले में सामने आया नया मोड़
- मृत किशोर युवावस्था में जिंदा मिला, निर्दोष आरोपी के दस साल हुए बर्बाद
विकास वत्स
बुलंदशहर। ये कैसा कानून है? ये सवाल मंगलवार को चर्चा का विषय बना क्योंकि एक किशोर जो कि दस पूर्व मर गया था, उसे देहात कोतवाली पुलिस ने जिंदा पकड़ा है। सवाल जायज इसलिए भी है क्योंकि उस दौरान अगर पुलिस सही से जांच पड़ताल करती तो निर्दोष युवक को जेल नहीं जाना पड़ता और उसकी जिंदगी के कीमती दस वर्ष यूं ही बर्बाद नहीं हुए होते। साथ ही दूसरा सवाल है आखिर जो अधजला शव बरामद हुआ वह किसका था?
बता दें कि वर्ष 2007 में देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव मंशा गढ़ी नगलिया में एक किशोर का अधजला शव बरामद हुआ था। जिसकी शिनाख्त नैथला निवासी 14 वर्षीय दीपक के रुप में हुई। पुलिस ने आनन फानन में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और परिजनों की तहरीर पर मंशा गढ़ी निवासी युवक अमित को जेल भेज दिया। वह दो माह दस दिन तक जेल की सलाखों के पीछे रहा। वहीं 14 वर्षीय किशोर सोमवार को हत्यारोपी अमित की शिकायत पर पुलिस ने जिंदा दबोच लिया। वह घर से दूर रह रहा था और चोरी छिपे आता था। यह खबर गांवों व शहर में फैलते ही चारों ओर चर्चा होने लगी कि यह कैसा कानून है? यदि पुलिस सही से जांच पड़ताल करती तो एक निर्दोष जेल नहीं जाता। दूसरा सवाल उठता है कि अमित को रंजिशन जेल भेजा गया या परिजनों ने आशंका के आधार पर उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। खैर जो भी मामला रहा, अमित की जिंदगी के कीमती दस वर्ष इस झूठे मुकदमे के चलते बर्बादी की कगार पर पहुंच गए। हत्या करने का ठप्पा वह पिछले दस वर्ष से झेल रहा था। उसकी इस बर्बादी का जिम्मदार कौन होगा? यह भी जांच का विषय है और इसकी पूर्ति कर पाना अब संभव भी नजर नहीं आता है। वहीं अमित ने मामले में अब आरोपी दीपक, उसके चाचा व अन्य ग्रामीणों के खिलाफ शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।

मजदूरी कर रहा था दीपक
पुलिस सूत्रों की मानें तो जिंदा पकड़ा गया युवक दीपक किसी दूसरे जिले में रहकर मजदूरी करता था। वह पिछले तीन वर्ष से अपने घर चोरी-छिपे आ जा रहा था। यही नहीं बताया जा रहा है कि दीपक वर्ष 2007 में किसी चोरी के मामले में नाम आने पर परिजनों के डर से घर से भाग निकला था। पुलिस अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं कर रही है।
आखिर किसका था अधजला शव
वर्ष 2007 में जो अधजला शव पुलिस को बरामद हुआ था आखिर वह किसका था? अब यह सवाल पुलिस को कचोट रहा है। क्योंकि उसकी शिनाख्त दीपक के रुप में करने के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। एसपी सिटी डा. प्रवीन रंजन सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद इसमें कुछ कहा जा सकता है।
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