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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   Bank manager had fraudulently withdrawn Rs 9.21 lakh from the account, now he will have to return it

Bulandshahar News: बैंक मैनेजर ने फर्जीवाड़ा कर खाते से निकाले थे 9.21 लाख, अब करने होंगे वापस

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 26 Feb 2025 10:22 PM IST
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बुलंदशहर। सेवानिवृत्त कर्मचारी के बैंक खाते से फर्जीवाड़ा कर 9.21 लाख रुपये निकालने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने बैंक प्रबंधक राजीव कुमार अग्रवाल व कैशियर सुरजीत को दोषी पाया है। आयोग ने आदेश दिए कि खाते से निकाली गई धनराशि सात फीसदी ब्याज सहित उपभोक्ता को लौटाई जाए। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार और वाद व्यय के तौर पर 10 हजार रुपये भी दिए जाएं।
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जिला उपभोक्ता आयोग के जनसूचना अधिकारी शेखर वर्मा ने बताया कि डिबाई के गांव बदरपुर निवासी रामचरन 31 जनवरी 2021 को दूरसंचार विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। विभाग से मिले फंड की धनराशि उनके पंजाब नेशनल बैंक स्थित खाते में जमा थी। रामचरन का आरोप है कि उनके खाते से 15 फरवरी 2021 को तीन चेक के माध्यम से 9.21 लाख रुपये निकाल लिए गए। जबकि जिन चेक के माध्यम से धनराशि निकाली गई, उनकी मूल कॉपी उनके पास उपलब्ध है।
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शिकायत के आधार पर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष व न्यायाधीश हसनैन कुरैशी ने वाद पंजीकृत करते हुए दोनों पक्षों को सुना। इस दौरान पाया कि बैंक प्रबंधक राजीव कुमार अग्रवाल व कैशियर सुरजीत के बिना मिलीभगत के धनराशि निकालना संभव नहीं है। साथ ही चेक के माध्यम से धनराशि निकालने की जानकारी भी बैंक अधिकारियों ने रामचरन को नहीं दी। जब रामचरन को बैंक खाते से धनराशि निकालने की जानकारी हुई और वह बैंक प्रबंधक के पास शिकायत लेकर पहुंचे तो बैंक प्रबंधक ने खानापूर्ति करते हुए एक प्रार्थना पत्र लेकर खाता ही बंद कर दिया।
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जब धनराशि की मांग की तो आरोपी बैंक प्रबंधक कोई ठोस जवाब नहीं दे सका। इस पर रामचरन ने डिबाई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बैंक प्रबंधक राजीव कुमार अग्रवाल व कैशियर सुरजीत को आदेश दिए हैं कि खाते से निकाली गई धनराशि 9.21 लाख रुपये को सात फीसदी ब्याज के साथ वापस किया जाए। साथ ही मानसिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार और वाद व्यय के तौर पर 10 हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएं। यदि 30 दिन के अंदर धनराशि का भुगतान नहीं किया गया तो धनराशि पर आठ फीसदी की दर से ब्याज देना होगा।
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