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Bulandshahar News: 88 महिला समूह तैयार करेंगी गन्ने की पौध
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बुलंदशहर। जिले में 88 महिला स्वयं सहायता समूहों को गन्ने की पौध तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिलाओं को प्रति पौध सरकार 1.50 रुपये अनुदान देगी और किसान को यह पौधा दो से तीन रुपये तक बेचा जा सकेगा। इस तरह से महिला समूह की लाखों रुपये की कमाई होने की संभावना है।
जिले में चार चीनी मिलें हैं। इनमें अनूपशहर, अनामिका, साबितगढ़ और वेव शुगर मिल शामिल हैं। इन सभी मिलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों का चयन गन्ने की पौध तैयार करने के लिए किया गया है। शासन के आदेश पर जिला गन्ना विभाग ने स्वयं सहायता समूह का चयन कर लिया है। एक महिला समूह कितने भी पौधे तैयार कर सकता है। गन्ने की पौध तैयार करने में कोई लागत नहीं आएगी क्योंकि महिलाएं अपने ही खेत के गन्ने लेकर तैयार कर सकती हैं। जिनके पास खेत नहीं है, उन महिलाओं को गन्ना विभाग की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा। पौध तैयार करने के लिए सीड ट्रेड शीड कटर निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। महिलाओं द्वारा तैयार की जाने वाली पौध का भी विभागीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। 88 समूह से जुड़ी 500 से अधिक महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करने तैयारी में जुट गई हैं।
नर्सरी में तैयार पौध से बंपर होती है फसल
गन्ना विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान अमूमन पुरानी विधि से ही गन्ने की बुआई करते हैं। इस विधि के तहत खेत में गड्ढा बनाया जाता है और उसमें गन्ने के टुकड़े डाल दिए जाते हैं। इस विधि से खेत में जहां-तहां गन्ने के अंकुर नहीं निकल पाते हैं, लेकिन नर्सरी में तैयार पौध से गन्ने की फसल अच्छी होती है। इससे किसानाें को अधिक उत्पादन होने पर अधिक लाभ भी मिलता है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल चयनित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार कर 80 लाख रुपये से अधिक की आमदनी प्राप्त की थी।
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सरकार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए गन्ने की पौध तैयार करवाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए शासन द्वारा भी उनकी मदद की जाएगी। जनपद में 88 स्वयं सहायता समूह को चयनित कर उनसे पौध तैयार करवाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। - बृजेश पटेल, जिला गन्ना अधिकारी
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जिले में चार चीनी मिलें हैं। इनमें अनूपशहर, अनामिका, साबितगढ़ और वेव शुगर मिल शामिल हैं। इन सभी मिलों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों का चयन गन्ने की पौध तैयार करने के लिए किया गया है। शासन के आदेश पर जिला गन्ना विभाग ने स्वयं सहायता समूह का चयन कर लिया है। एक महिला समूह कितने भी पौधे तैयार कर सकता है। गन्ने की पौध तैयार करने में कोई लागत नहीं आएगी क्योंकि महिलाएं अपने ही खेत के गन्ने लेकर तैयार कर सकती हैं। जिनके पास खेत नहीं है, उन महिलाओं को गन्ना विभाग की ओर से उपलब्ध करवाया जाएगा। पौध तैयार करने के लिए सीड ट्रेड शीड कटर निशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। महिलाओं द्वारा तैयार की जाने वाली पौध का भी विभागीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करेंगे। 88 समूह से जुड़ी 500 से अधिक महिलाएं गन्ने की पौध तैयार करने तैयारी में जुट गई हैं।
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नर्सरी में तैयार पौध से बंपर होती है फसल
गन्ना विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसान अमूमन पुरानी विधि से ही गन्ने की बुआई करते हैं। इस विधि के तहत खेत में गड्ढा बनाया जाता है और उसमें गन्ने के टुकड़े डाल दिए जाते हैं। इस विधि से खेत में जहां-तहां गन्ने के अंकुर नहीं निकल पाते हैं, लेकिन नर्सरी में तैयार पौध से गन्ने की फसल अच्छी होती है। इससे किसानाें को अधिक उत्पादन होने पर अधिक लाभ भी मिलता है। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल चयनित स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने गन्ने की पौध तैयार कर 80 लाख रुपये से अधिक की आमदनी प्राप्त की थी।
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सरकार स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए गन्ने की पौध तैयार करवाने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए शासन द्वारा भी उनकी मदद की जाएगी। जनपद में 88 स्वयं सहायता समूह को चयनित कर उनसे पौध तैयार करवाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। - बृजेश पटेल, जिला गन्ना अधिकारी