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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bulandshahar News ›   43 years, 400 units, still the industrial sector is in bad shape

Bulandshahar News: 43 साल, 400 इकाई, फिर भी औद्योगिक क्षेत्र बदहाल

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 24 Mar 2024 10:42 PM IST
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सिकंदराबाद। औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के 43 वर्ष बाद भी उद्यमियों को आज भी मूलभूत सुविधाओं की दरकार है। बताया जाता है कि प्रतिमाह इन इकाइयों से सरकार को 50 करोड़ रुपये से अधिक का टैक्स मिलता है। बावजूद इसके उद्यमियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।
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वर्ष 1970 में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की गई थी। स्थापना के 43 वर्ष बाद 400 से अधिक इकाइयां क्षेत्र में संचालित हैं लेकिन अब तक औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों के लिए बेहतर सडक़ें, जल निकासी, पथ प्रकाश व्यवस्था, बेहतर विद्युत आपूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाएं नाकाफी हैं। उद्यमियों का कहना है कि सरकार की नीतियों के कारण भी उद्यमियों को काफी परेशानी हो रही है। महंगी बिजली और पीएनजी के कारण उद्यमियों की लागत अधिक आ रही है।
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मिले सस्ती बिजली

औद्योगिक इकाइयों को बहुत महंगी दरों पर बिजली, पीएनजी दी जा रही है। जिससे उनकी उत्पादन लागत बढ़ रही है। उत्पादन लागत अधिक होने के कारण वह जिन राज्यों में सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध है, उनके उत्पादों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे हैं। - संदीप अग्रवाल, अध्यक्ष, सिकंदराबाद इंडस्ट्रीज वेलफेयर सोसायटी
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सडक़ों का हो चौड़ीकरण, जल निकासी की व्यवस्था

औद्योगिक क्षेत्र में स्थापना के समय ही सडक़ें बनाई गई थीं। जिसके चलते अधिकतर सड़कें खस्ताहाल हो चुकी हैं। सडक़ों के चौड़ीकरण के साथ ही उनका निर्माण भी किया जाए। पानी निकासी, पथ प्रकाश की व्यवस्था की जाए। इकाइयों के वाहन चालकों के लिए विश्राम की व्यवस्था हो। - अमित कौशल, जीएम, श्री सीमेंट



रेलवे लाइन से जोड़ा जाए
कच्चा माल के लाने और तैयार उत्पाद के आसानी से भेजने के लिए सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र को रेलवे लाइन से कनेक्ट किया जाए। सडक़ परिवहन के मुकाबले रेलवे परिवहन सस्ता है। औद्योगिक इकाइयों के प्लाटों को फ्री होल्ड किया जाए। कर्मियों की सुरक्षा के लिए नेशनल हाईवे-34 पर फुट ओवर ब्रिज बनवाए जाए। -- रजत राही, सचिव, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन




विद्युत लाइनों को बदला जाए

औद्योगिक क्षेत्र की विद्युत लाइनें, पोल पुराने होने के कारण जर्जर हालत में हैं। जिसके चलते लाइनों में अक्सर फाल्ट होते रहते हैं, और आपूर्ति बाधित होने के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिलने पर अन्य विकल्पों का प्रयोग किया जाता है। जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है। और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। --- सुधीर चौधरी, उद्यमी
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