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अनफिट गाड़ियां कर रही शोर..सर्वेक्षण में पास होने पर जोर
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:09 PM IST
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अनफिट गाड़ियां कर रहीं शोर..सर्वेक्षण में पास होने पर जोर
- नगर पालिका में अफसरों के वाहन व कूड़ा वाहन समेत हैं 37 वाहन
- कई वर्षों से नहीं हुई है सभी 37 वाहनों की फिटनेस
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर।
नगर पालिका अफसर स्वच्छता सर्वेक्षण में पास होने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं, वहीं नगर पालिका की अनफिट गाड़ियां ही चीख चीखकर सर्वेक्षण की हवा निकालने में लगी हुई हैं। कहने को तो गाड़ियां एनजीटी के मानकों को पूरा कर रही हैं, लेकिन गाड़ियां खरीदने के बाद केवल एक बार इनकी फिटनेस कराई गई है।
निजी वाहनों की फिटनेस न होने पर उन्हें सील कर दिया जाता है या उनके मालिकों के खिलाफ आरसी जारी कर दी जाती है। वहीं नगर पालिका की सभी करीब 37 गाड़ियों की खरीदने के बाद से फिटनेस नहीं करवाई गई है। सूत्रों ने दावा किया कि गाड़ियां खरीदने के बाद केवल एक बार फिटनेस कराई गई, जबकि सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए प्रतिवर्ष फिटनेस होनी आवश्यक है। गाड़ियों की फिटनेस न होने के बाद भी अब तक किसी भी अधिकारी ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। सूत्रों ने दावा किया है कि पहले गाड़ियों के बीमा भी नहीं कराए जाते थे, लेकिन एक बार हुए हादसे के बाद अफसरों ने सभी गाड़ियों के नियमित रूप से बीमा तो कराए, लेकिन फिटनेस कराना भूल गए। दावा किया जा रहा है कि गाड़ियों की फिटनेस में लगने वाली धनराशि को प्रतिवर्ष खर्चे में जोड़ा जाता है, जिसे अफसर और कर्मचारी मिलकर चट कर जाते हैं। साथ ही बताया जा रहा है कि न केवल पालिका की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां बल्कि अफसरों द्वारा प्रयोग की जाने वाली गाड़ियों की फिटनेस भी वर्षों से नहीं हुई है। इन्हीं अनफिट गाड़ियों के बदले नगर पालिका अफसर स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक पाने का दम भर रहे हैं। इस बाबत नगर पालिका ईओ एके सिंह ने बताया कि गाड़ियों की समय पर फिटनेस कराई जाती है। भूलवश किसी गाड़ी की फिटनेस होने से रह गई है तो उसकी फिटनेस भी करा दी जाएगी। वहीं एआरटीओ मुहम्मद कय्यूम ने बताया कि पालिका की किसी भी गाड़ी की फिटनेस जारी नहीं की गई है। फिटनेस के लिए गाड़ी लाई ही नहीं गई है।
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- नगर पालिका में अफसरों के वाहन व कूड़ा वाहन समेत हैं 37 वाहन
- कई वर्षों से नहीं हुई है सभी 37 वाहनों की फिटनेस
पुनीत शर्मा
बुलंदशहर।
नगर पालिका अफसर स्वच्छता सर्वेक्षण में पास होने के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं, वहीं नगर पालिका की अनफिट गाड़ियां ही चीख चीखकर सर्वेक्षण की हवा निकालने में लगी हुई हैं। कहने को तो गाड़ियां एनजीटी के मानकों को पूरा कर रही हैं, लेकिन गाड़ियां खरीदने के बाद केवल एक बार इनकी फिटनेस कराई गई है।
निजी वाहनों की फिटनेस न होने पर उन्हें सील कर दिया जाता है या उनके मालिकों के खिलाफ आरसी जारी कर दी जाती है। वहीं नगर पालिका की सभी करीब 37 गाड़ियों की खरीदने के बाद से फिटनेस नहीं करवाई गई है। सूत्रों ने दावा किया कि गाड़ियां खरीदने के बाद केवल एक बार फिटनेस कराई गई, जबकि सड़क पर गाड़ी चलाने के लिए प्रतिवर्ष फिटनेस होनी आवश्यक है। गाड़ियों की फिटनेस न होने के बाद भी अब तक किसी भी अधिकारी ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है। सूत्रों ने दावा किया है कि पहले गाड़ियों के बीमा भी नहीं कराए जाते थे, लेकिन एक बार हुए हादसे के बाद अफसरों ने सभी गाड़ियों के नियमित रूप से बीमा तो कराए, लेकिन फिटनेस कराना भूल गए। दावा किया जा रहा है कि गाड़ियों की फिटनेस में लगने वाली धनराशि को प्रतिवर्ष खर्चे में जोड़ा जाता है, जिसे अफसर और कर्मचारी मिलकर चट कर जाते हैं। साथ ही बताया जा रहा है कि न केवल पालिका की कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां बल्कि अफसरों द्वारा प्रयोग की जाने वाली गाड़ियों की फिटनेस भी वर्षों से नहीं हुई है। इन्हीं अनफिट गाड़ियों के बदले नगर पालिका अफसर स्वच्छता सर्वेक्षण में अच्छे अंक पाने का दम भर रहे हैं। इस बाबत नगर पालिका ईओ एके सिंह ने बताया कि गाड़ियों की समय पर फिटनेस कराई जाती है। भूलवश किसी गाड़ी की फिटनेस होने से रह गई है तो उसकी फिटनेस भी करा दी जाएगी। वहीं एआरटीओ मुहम्मद कय्यूम ने बताया कि पालिका की किसी भी गाड़ी की फिटनेस जारी नहीं की गई है। फिटनेस के लिए गाड़ी लाई ही नहीं गई है।
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