{"_id":"5f7e11158ebc3e9b9241fe2d","slug":"wild-animals-badaun-news-bly4225534157","type":"story","status":"publish","title_hn":"विलुप्ति के कगार पर ब्लैक बक, सात वर्षों में संख्या घटकर 900 से 320 पर पहुंची","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विलुप्ति के कगार पर ब्लैक बक, सात वर्षों में संख्या घटकर 900 से 320 पर पहुंची
Thu, 08 Oct 2020 02:27 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2020 02:27 AM IST
विज्ञापन
black buck
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक (काला किरन) विलुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं। अधिकारिक रूप से ब्लैक बक की गणना हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। गणना के मुताबिक पिछले सात वर्षों में ब्लैक बक की संख्या घटकर 900 से 320 पर पहुंच गई है। जिले के जंगलों और गंगा-रामगंगा की कटरी इलाकों से इन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए अब इनका संरक्षण किया जाएगा। ब्लैक बक की गणना के बाद वन विभाग ने इस संबंध में कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है। इसे जल्द मंजूरी के बाद बजट मिलने की उम्मीद है।
विज्ञापन
दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव ब्लैक बक के लिए जिले के मौसम के साथ गंगा और रामगंगा की कटरी के इलाके काफी मुफीद हैं। एक समय था जब जिले में बहुतायत में ब्लैक बक हुआ करते थे, लेकिन इनके संरक्षण की कोई योजना न होने के चलते धीरे-धीरे यह दुर्लभ प्रजाति विलुप्त होने लगी है। गंगा और रामंगगा की कटरी में ब्लैक बक पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अक्सर इनका शिकार होता है। कभी मामला सामने आता है कभी नहीं। हिरन की यह ऐसी दुर्लभ प्रजाति है, जिसके संरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन इसके लिए जिले में अभी तक कोई परियोजना नहीं है।
विज्ञापन
वन विभाग तीन साल में एक बार जीवों की गणना कराता है लेकिन अब तक जिले में यह गणना अनुमानित होती रही थी। पहली बार अधिकारिक रूप से ब्लैक बक की गणना हुई तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पहली बार जिले के चार वन रेंज की 42 बीटों की 470 साइट पर कराई गई गणना में तकरीबन 320 ब्लैक बक मिले हैं। हाल ही में यह गणना पूरी हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि 2016 में तत्कालीन डीएफओ समीर कुमार के समय में हुई अनुमानित गणना में जिले में ब्लैक बक की संख्या 900 से ज्यादा थी। ऐसे में ब्लैक बक की घटती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। इसको लेकर जिले में ब्लैक बक के संरक्षण की तैयारी की जा रही है।
विज्ञापन
दुधवा नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व से ज्यादा ब्लैक बक बदायूं में
हालांकि, संरक्षण के कोई उपाय न होने के कारण जिले में ब्लैक बक की संख्या तेजी से कम हो रही है। इसके बावजूद दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ज्यादा ब्लैक बक बदायूं जिले में हैं। दुर्लभ प्रजाति के इस वन्य जीव के संरक्षण को लेकर सरकारें कितनी गंभीर हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में ब्लैक बक की अधिकारिक गणना पहली बार हुई है। हालांकि इससे पहले 2015 और 2018 में भी स्थानीय स्तर पर गणना की गई थी, लेकिन यह गणना अनुमान के आधार पर थी। साइटिंग पर ब्लैक बक की गिनती नहीं की गई थी। इसके बावजूद अब भी जिले में दुधवा नेशनल पार्क और पीलीभीत टाइगर रिजर्व से ज्यादा ब्लैक बक हैं।
अब नहीं दिखते खेतों में कुलाचें भरते ब्लैक बक
एक समय था जब सड़कों किनारे खेतों में ब्लैक बक के झुंडों को कुलाचें भरते देखा जा सकता था। सबसे ज्यादा ब्लैक बक दातागंज रेंज में थे। यहां गंगा और रामगंगा दोनों नदियों की कटरियां हैं। यही इलाके ब्लैक बक के रहने के हिसाब से मुफीद माने जाते हैं। 2013 में तत्कालीन डीएफओ एके कश्यप ने जिले के चार वन रेंज में ब्लैक बक की स्थानीय स्तर पर गणना कराई थी। उस समय जिले में ब्लैक बक की अनुमानित संख्या 1200 से ज्यादा थी। समय समय भी शासन को इनके संरक्षण के लिए कार्य योजना भेजी गई थी, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। ऐसे में ब्लैक बक की संख्या लगातार कम होती जा रही है।
रेंज बीट गणना टीमें
बिसौली रेंज 9 बीट 36 टीमें
दातागंज रेंज12 बीट 8 टीमें
बदायूं रेंज10 बीट 40 टीमें
सहसवान रेंज 11 बीट 44 टीमें
दुर्लभ प्रजाति के ब्लैक बक के संरक्षण को कार्य योजना शासन को भेजी गई है। इसके लिए जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। जिले में ब्लैक बक की अधिकारिक गणना पहली बार हुई है। जिले में अनुमानित ब्लैक बक की संख्या 320 है। इससे पहले मैंने 2018 में यहां अपनी तैनाती के दौरान गणना कराई थी। अब भी बरेली मंडल में सबसे ज्यादा ब्लैक बक बदायूं में हैं। चूंकि अधिकारिक गणना पहली बार हुई है तो यह कहना मुश्किल होगा कि ब्लैक बक की संख्या घटी है या बढ़ी है।
- ईशा तिवारी, डीएफओ