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Budaun News: 25 साल से मां दुर्गा के व्रत रखते आ रहे हैं मुन्ने शाह अल्वी
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जलालपुर गांव के अपने आश्रम में मां दुर्गा की पूजा करते मुन्ने शाह अल्वी। संवाद
कादरचौक। आस्था कब किस इंसान में किसके प्रति समा जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ ऐसी ही कहानी ब्लॉक क्षेत्र के गांव जलालपुर निवासी मुन्ने शाह अल्वी की है। मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने के बावजूद 25 वर्षों से मां दुर्गा के प्रति आस्था रखते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र के व्रत करते आ रहे हैं। इस बार भी व्रत रख रहे हैं।
शुरुआत में उन्हें समुदाय के कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपनी आस्था नहीं छोड़ी। मां के प्रति उनकी श्रद्धा का सिलसिला आज भी जारी है। मुन्ने शाह अल्वी ने गांव के बाहर अपने खेत में आश्रम बना रखा है, जहां रहकर वह अपनी धार्मिक दिनचर्या का पालन करते हैं। वह बताते हैं कि जब उनके परिवार पर परेशानियों का दौर आया था। पशुओं की मौत के साथ ही एक संतान को भी खोना पड़ा। परिवार मुश्किलों के दौर से गुजरने लगा। तब पंडित बनवारी लाल ने उन्हें नगरकोट स्थित हिंगलाज माता के दर्शन करने की सलाह दी थी।
मुन्ने शाह के मुताबिक, उस समय उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह आसानी से पाकिस्तान के बलूचिस्तान जा सकें। पता नहीं कहां से उन्हें मदद मिली और वह नगरकोट माता के दर्शन करने पहुंच गए। इस यात्रा के बाद उनके परिवार में सुख-शांति लौटने लगी। पारिवारिक परिस्थितियों में भी सुधार का अनुभव हुआ। इसके बाद उन्होंने मां दुर्गा को अपना आराध्य मान लिया और नवरात्र के व्रत रखने शुरू कर दिए।
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मुन्ने शाह ने कहा कि जब उन्होंने व्रत रखने शुरू किए तो समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन वह अपने विश्वास पर कायम रहे। उन्होंने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था को निजी श्रद्धा का विषय माना और व्रत रखने का सिलसिला जारी रखा। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण दो बार उनका व्रत छूट गया। इस शारदीय नवरात्र पर भी वह व्रत रख रहे हैं।
कई शक्ति पीठों के दर्शन कर चुके हैं मुन्ने शाह
मुन्ने शाह के परिवार के अन्य सदस्य भी मां के प्रति आस्था रखते हैं। परिवार के साथ वह मां वैष्णो देवी, ज्वालाजी और चिंतपूर्णी के भी दर्शन कर चुके हैं। परिवार में उनकी पत्नी बिलकिस, बेटे रब्बे अली, गुलाब शाह और शमीम तथा बेटी नसरीन हैं। रब्बे अली और गुलाब शाह की शादी हो चुकी है, जबकि शमीम अविवाहित हैं। बेटी नसरीन की भी शादी हो चुकी है।
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शुरुआत में उन्हें समुदाय के कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपनी आस्था नहीं छोड़ी। मां के प्रति उनकी श्रद्धा का सिलसिला आज भी जारी है। मुन्ने शाह अल्वी ने गांव के बाहर अपने खेत में आश्रम बना रखा है, जहां रहकर वह अपनी धार्मिक दिनचर्या का पालन करते हैं। वह बताते हैं कि जब उनके परिवार पर परेशानियों का दौर आया था। पशुओं की मौत के साथ ही एक संतान को भी खोना पड़ा। परिवार मुश्किलों के दौर से गुजरने लगा। तब पंडित बनवारी लाल ने उन्हें नगरकोट स्थित हिंगलाज माता के दर्शन करने की सलाह दी थी।
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मुन्ने शाह के मुताबिक, उस समय उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह आसानी से पाकिस्तान के बलूचिस्तान जा सकें। पता नहीं कहां से उन्हें मदद मिली और वह नगरकोट माता के दर्शन करने पहुंच गए। इस यात्रा के बाद उनके परिवार में सुख-शांति लौटने लगी। पारिवारिक परिस्थितियों में भी सुधार का अनुभव हुआ। इसके बाद उन्होंने मां दुर्गा को अपना आराध्य मान लिया और नवरात्र के व्रत रखने शुरू कर दिए।
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मुन्ने शाह ने कहा कि जब उन्होंने व्रत रखने शुरू किए तो समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, लेकिन वह अपने विश्वास पर कायम रहे। उन्होंने मां दुर्गा के प्रति अपनी आस्था को निजी श्रद्धा का विषय माना और व्रत रखने का सिलसिला जारी रखा। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण दो बार उनका व्रत छूट गया। इस शारदीय नवरात्र पर भी वह व्रत रख रहे हैं।
कई शक्ति पीठों के दर्शन कर चुके हैं मुन्ने शाह
मुन्ने शाह के परिवार के अन्य सदस्य भी मां के प्रति आस्था रखते हैं। परिवार के साथ वह मां वैष्णो देवी, ज्वालाजी और चिंतपूर्णी के भी दर्शन कर चुके हैं। परिवार में उनकी पत्नी बिलकिस, बेटे रब्बे अली, गुलाब शाह और शमीम तथा बेटी नसरीन हैं। रब्बे अली और गुलाब शाह की शादी हो चुकी है, जबकि शमीम अविवाहित हैं। बेटी नसरीन की भी शादी हो चुकी है।