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लॉकडाउन में बदलने लगी तालाब-चकरोडों की सूरत, ऊसर जमीन भी उगलेगी सोना

Fri, 15 May 2020 11:28 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 15 May 2020 11:28 PM IST
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lockdown effect in village
उझानी (बदायूं)। अब किसी गरीब किसान का खेत न तो उबड़खाबड़ दिखेगा और न ही ऊसर (बंजर) खेतों में फसल उगाने में कोई दिक्कत होगी। नरेगा के तहत सरकार ने प्रवासी मजदूरों को जो काम सौंपा है, उनमें खेतों के समतलीकरण के अलावा जल संरक्षण के संसाधनों को बेहतर बनाना शामिल है। जल संरक्षण के साधनों में तालाब-पोखर और भैंसोर की खुदाई के अलावा चकरोड भी सुधरने लग गए हैं। संपर्क मार्गों को चकाचक करने की कवायद के बीच ग्राम पंचायतों ने अपने-अपने इलाके की सूरत बदलने को कदम बढ़ा दिए हैं।
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पिछले एक सप्ताह से करीब 80 फीसदी ग्राम पंचायतों में नरेगा मजूदरों के जरिए काम रफ्तार पकड़ चुका है। सरकार की प्राथमिकता में शामिल कार्यों को आगे बढ़ाते हुए अधिकतर ग्राम पंचायतों ने तालाब और पोखरों की खुदाई शुरू करा दी है। तालाबों की खुदाई के साथ ही बरसात के दिनों में पानी का प्रवाह उनके चारों ओर से निकलकर खेतों तक नहीं पहुंचे, इसलिए चकरोड भी बनाए जा रहे हैं। सिकंदाबाद ग्राम पंचायत में बृहस्पतिवार को भी तालाब की खुदाई और गरीब किसानों के खेतों के समतलीकरण का कार्य जारी रहा। तेहरा में जल संरक्षण के संसाधनों को दुरस्त करने का रफ्तार पकड़ चुका है। देवरमई के प्रधान अहवरन सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में करीब 30 फीसदी तक कार्य पूरा हो चुका है। इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिलने के साथ गरीब किसानों को अपने खेत समतल कराने में कोई खर्च नहीं उठना पड़ रहा है। ऊसर जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए खेत की खुदाई की साथ चीका मिट्टी का मिश्रण मिलाया जाता है, वह भी नरेगा के मजदूरों के जरिए कराया जा रहा है। बता दें कि ब्लॉक क्षेत्र में 76 ग्राम पंचायतें हैं। अधिकतर ग्राम पंचायतों के इलाके में ऊसर जमीन का रकबा शामिल है। ग्रामीणों की मानें तो ऊसर जमीन को उपयोग में लाने के बाद फसलों से पैदावार भी बढ़ेगी।
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क्वारंटीन अवधि पूरी कर चुके प्रवासी मजदूर ही कर रहे हैं काम
उझानी। नरेगा के तहत उन्हीं प्रवासी मजूदरों को जॉब कार्ड बनाकर काम पर लिया जा रहा है जो लॉकडाउन शुरू होने के बाद पहली खेप में ही घर लौट चुके हैं। ऐसे प्रवासी मजदूर 21 दिन की क्वारंटीन अवधि को पूरा कर चुके हैं। जिन प्रवासी मजूदरों की अभी तक क्वारंटीन अवधि पूरी नहीं हो पाई है, उन्हें काम पर नहीं लगाया जा सकता। इसके पीछे प्रधानों का तर्क है कि तालाब की खुदाई और संपर्क मार्गों की मरम्मत के समय दर्जनों की संख्या में मजदूर काम करते हैं, ऐसे में बाहर से लौटे प्रवासी मजदूरों में कोरोना संक्रमण की स्थिति पूरी तरह साफ होने तक जोखिम नहीं लिया जा सकता है।
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मनरेगा के तहत श्रमिकों द्वारा लगातार तालाब की खुदाई का काम चल रहा है। इससे जहां श्रमिकों को काम मिल रहा है, वहीं तालाब के बन जाने से जनपद में जलस्तर में भी बढ़ोतरी होगी। - कुमार प्रशांत, डीएम
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