फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Budaun News ›   lahu ki roshnai mein main hindustan likhta hoon

...लहू की रोशनाई से मैं हिंदुस्तान लिखता हूं

Sat, 26 Sep 2015 07:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं
अमर उजाला ब्यूरो ,बदायूं Updated Sat, 26 Sep 2015 07:56 PM IST
विज्ञापन
कवि षटबदन शंखधार ने मां वीणा पाणी की वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद काव्यधारा बही। डा. व्यथित ने देश की शान में पढ़ा- चमन की आन लिखता हूं, वतन की शान लिखता हूं
विज्ञापन

लहू की रोशनाई में, मैं हिंदुस्तान लिखता हूं।
डा. शैलेंद्र ने मौजूदा परिवेश में कलमकारों को आइना दिखाते हुए सुनाया-
जो उजालों के तरफदार नहीं हो सकते, वो किसी के मददगार भी नहीं हो सकते।
सच को सच कहने की हिम्मत ही नहीं हो जिनमे, वो कुछ भी होंगे लेकिन कलमकार नहीं हो सकते।
संचालन कर रहे कवि पवन शंखधार ने सुनाया-
पतझड़ का मधुमास नहीं हूं, मैं कोई अहसास नहीं हूं
मेरा चिंतन रजनीगंधा, परिचय का मोहताज नहीं हूं।
गोष्ठी में विष्णु गोपाल अनुरागी, अमन मयंक शर्मा, आदर्श कुमार समय, जयवीर चंद्रवंशी जय, अभिषेक अनंत, अचिन मासूम, अजीत रस्तोगी, संजय सक्सेना, उमेश अकेला, विनोद शदव, रजनीश शर्मा ने रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को आनंदित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed