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गोलमाल: लेखपाल ने बनवा दिया मृतक का आय प्रमाण पत्र

Tue, 08 Jun 2021 12:23 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 08 Jun 2021 12:23 AM IST
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Golmaal: Lekhpal got the income certificate of the deceased made
बदायूं। प्राइवेट मुंशियों से काम करा रहे लेखपाल आर्थिक साठगांठ की बदौलत कुछ भी कर रहे हैं। शेखूपुर क्षेत्र के एक ग्रामीण की मौत के करीब 15 दिन बाद लेखपाल ने उसका 50 हजार वार्षिक का आय प्रमाणपत्र तहसीलदार से जारी करा दिया। अब जब ग्रामीण आरटीआई के जरिये सूचना मांग रहे हैं तो नहीं दी जा रही। सूचना न मिलने पर डीएम को अपील डाली गई है।
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सदर तहसील इलाके के शेखूपुर क्षेत्र में लेखपाल की कारगुजारी से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां के निवासी मसरूर खान का निधन छह जनवरी को हो गया था। उनके परिवार के अनुरोध पर ग्राम पंचायत शेखूपुर ने कुछ दिन बाद उनका मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसी बीच क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट पर 22 जनवरी को सदर तहसीलदार के हस्ताक्षरों से मसरूर का एक आय प्रमाणपत्र जारी किया गया। इसमें दिखाया गया है कि मसरूर खान की मासिक कमाई 4166.67 रुपये है और साल भर में वह पचास हजार रुपये कमा लेते हैं। जाहिर है कि मृत्यु के करीब 16 दिन बाद जारी इस प्रमाणपत्र के मामले में अगर लेखपाल स्थलीय जांच करते तो उन्हें मृत्यु की सच्चाई पता लग जाती और प्रमाणपत्र बनना संभव ही नहीं था। बावजूद ऐसा नहीं किया गया और बिना जांच पड़ताल इस आय प्रमाण पत्र को जारी कर दिया गया।
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एक और कारनामा, कपड़ा कारोबारी को गरीब दिखाया
एक ही लेखपाल ने दूसरा कारनामा भी कर दिया। उन्होंने शेखूपुर क्षेत्र के ही एक व्यक्ति को 1250 रुपये प्रतिमाह का आय प्रमाणपत्र जारी कर दिया। इसकी भी क्षेत्र में खासी चर्चा है। बताते हैं कि जिस व्यक्ति को लेखपाल की रिपोर्ट में गरीब घोषित किया गया है वह कस्बे में ही पक्के घर में रहता है। दिल्ली में उसका कपड़े का कारोबार है और मुख्य मार्ग पर करीब एक बीघा का प्लॉट भी है।
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सूचना के नाम पर टहला रहे अधिकारी
शेखूपुर के निवासी एमपी सिंह ने लेखपाल के कारनामों को लेकर काफी समय पहले जिला प्रशासन से जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी थी। समय पर जानकारी न मिलने पर उन्होंने डीएम के नाम प्रथम अपील कर दी है। वहीं गांव के कई किसानों ने चकरोड को लेकर सूचना मांग रखी है। उनका कहना है कि इन्हीं लेखपाल ने चकरोड के बारे में भ्रामक सूचना देकर उसे चकबंदी में बता दिया है। जबकि चकबंदी से उसका मतलब नहीं है। मामला तहसील से जुडा है। लेखपाल ने फिजूल में उनका समय नष्ट कराया।

मृतक का आय प्रमाणपत्र जारी होने की जानकारी नहीं है। आमतौर पर लेखपाल की रिपोर्ट पर ही अधिकारी ऐसे प्रमाणपत्र जारी करते हैं। अगर वास्तव में ऐसा हुआ है तो दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - लाल बहादुर, एसडीएम सदर
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