बदायूं में तेल का खेल: नगर पालिका के जेनरेटर खराब, फिर भी फूंक दिया डेढ़ करोड़ रुपये का डीजल
नगर पालिका परिषद हमेशा से चर्चाओं में रही है, लेकिन इस बार तेल में खेल हुआ है। बात उस दौरान की है जब वर्ष 2017-18 में नगर पालिका अध्यक्ष फात्मा रजा थीं। उस साल डीजल 41.61 लाख रुपये का खर्च हुआ था। उसी साल नगर पालिका परिषद का चुनाव हुआ और पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल बनीं।
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नगर पालिका परिषद बदायूं में डीजल घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। पिछले पांच साल में खराब पड़े जनरेटरों की बात करें तो इन पर 5.33 करोड़ रुपये का डीजल खर्च हुआ। वर्ष 2017-18 में 41 लाख रुपये का डीजल खर्च हुआ तो वहीं वर्ष 2018-19 में डीजल का खर्चा बढ़कर 81 लाख तक पहुंच गया। जब वर्ष 2019-20 में कोरोना काल चल रहा था और पूरा शहर बंद था तो खर्चा डेढ़ करोड़ पार कर गया। यह घोटाला तब माना गया जब जनरेटरों की न तो मरम्मत कराई गई और न ही उन्हें पलटकर देखा गया।
वैसे तो नगर पालिका परिषद हमेशा से चर्चाओं में रही है, लेकिन यहां बात केवल नगर पालिका परिषद में खर्च हुए डीजल की हो रही है। बात उस दौरान की है जब वर्ष 2017-18 में नगर पालिका अध्यक्ष फात्मा रजा थीं। उस साल डीजल 41.61 लाख रुपये का खर्च हुआ था। उसी साल नगर पालिका परिषद का चुनाव हुआ और पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल बनीं।
इसके बाद वर्ष 2018-19 में डीजल 81.16 लाख रुपये का खर्च हुआ। वर्ष 2019-20 में डीजल 78.80 लाख रुपये का खर्च हुआ। वर्ष 2020-21 में डीजल का खर्चा बढ़कर 1.11 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इससे ज्यादा डीजल का खर्चा वर्ष 2021-22 में हुआ। इस साल डीजल 1.61 करोड़ रुपये का खर्च हुआ। यह खर्चा पिछले वर्षों की अपेक्षा सबसे ज्यादा था।
ये है डीजल खर्चे का वार्षिक हिसाब
- वर्ष 2017-18 - 41.61 लाख
- वर्ष 2018-19 - 81.16 लाख
- वर्ष 2019-20 - 78.80 लाख
- वर्ष 2020-21 - 1.11 करोड़
- वर्ष 2021-22 - 1.61 करोड़
- वर्ष 2022-23 - 88.44 लाख
- वर्ष 2023 मई माह तक - 12.61 लाख
कोरोना काल में बिजली कम गई, फिर भी फूंकते रहे डीजल
पावर कॉरपोरेशन के अधिकारियों के मुताबिक, कोरोना संक्रमण काल में बिजली व्यवस्था काफी ठीक रही। उस दौरान आपूर्ति भी बढ़ गई थी। क्योंकि उस वक्त तमाम सरकारी विभाग, दुकानें प्रतिष्ठान बंद थे। इससे ज्यादा बिजली खर्च नहीं हो रही थी। उस दौरान शहर भी पूरा बंद पड़ा था। नगर पालिका के जनरेटरों का इस्तेमाल भी नहीं किया जा रहा था। बावजूद इसके डीजल कागजों में फुंक रहा था।
नगर पालिका के 26 ट्यूबवेल में 12 पर लगे हैं जेनरेटर
नगर पालिका परिषदीय क्षेत्र में कुल 26 ट्यूबवेल हैं। अगर इनमें जनरेटर की बात करें तो केवल 12 ट्यूबवेल पर ही जनरेटर लगे हैं। इनमें मीरा जी की चौकी, प्रोफेसर कॉलोनी, संगीता चौक, नाहर खां सराय, सोथा की चढ़ाई और आंबेडकर छात्रावास के नजदीक समेत 12 जनरेटर शामिल हैं।
अब तक नगर पालिका परिषद सुबह शाम चार-चार घंटे की पेयजल आपूर्ति देती आई है, लेकिन अब बिजली कटौती के कारण खराब जनरेटरों की सुध आई तो मरम्मत कराने की आवश्यकता पड़ गई है। नगर पालिका परिषद ने पेयजल की आपूर्ति छह-छह घंटे भी कर दी है। इसके अलावा मुख्य मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था कर दी गई है। इससे नगर पालिका जनरेटरों की मरम्मत कराने जा रही है। फिलहाल इसकी तैयारी चल रही है।
मुझे नगर पालिका परिषद का चार्ज संभाले हुए करीब एक साल हो चुका है। तब से एक दिन भी जेनरेटर नहीं चला है। कभी जनरेटर चलाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी। हालांकि अभी कुछ दिन से बिजली कटौती हुई है तो जेनरेटर की आवश्यकता हुई है। पेयजल का समय भी बढ़ा दिया गया है। इससे जनरेटरों की मरम्मत कराई जा रही है। इससे पहले की बात करें तो जेनरेटर वर्षों से खराब पड़े हैं। ऐसे में डीजल फुंकने का सवाल ही नहीं होता।- दीप कुमार वार्ष्णेय, ईओ नगर पालिका परिषद बदायूं
हमारे कार्यकाल में जेनरेटर खराब नहीं थे। आवश्यकता के अनुसार सभी चलाए जा रहे थे। वित्तीय लेनदेन की कार्रवाई नगर पालिका के कर्मचारी करते हैं। इसके संबंध में वही जानकारी दे सकते हैं। - दीपमाला गोयल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष