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क्रूर व्यक्ति भी दया के संपर्क में आकर क्रूरता छोड़ देता: रामायणी
बिल्सी।
Updated Wed, 30 Sep 2015 11:59 PM IST
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माहेश्वरी धर्मशाला में श्रीराम-कृष्ण समिति के तत्वावधान में चल रही भगवान राम की कथा के आठवें दिन स्वामी अयोध्या दास रामायणी ने हिरण्यकश्यप की कथा का विस्तार वर्णन करते हुए कहा कि हिरण्य ने अपनी मृत्यु के लिए अनेक बचाव करते हुए वरदान मांगे कि उसकी मृत्यु न दिन में, न रात में हो, न पृथ्वी पर और ही आकाश में। न किसी शस्त्र से हो, लेकिन नरसिंह भगवान ने उसकी सारी बातें मानते हुए भक्त प्रहलाद की भक्ति की मान्यता रखी और हिरण्यकश्यप को मृत्यु का सामना करना ही पड़ा।
स्वामी ने रावण के दरबार में अंगद का संवाद सुनकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी जानकी जी की जननी है, अत: पृथ्वी ने स्वयं अंगद का पांव लिया और कोई उसे नहीं हिला सका। स्वामी ने करुणा और दया की परिभाषा और महत्व समझाते हुए कहा कि अपने प्रति अपकार करने वाले पर भी दया-भाव रखना चाहिए, क्योंकि क्रूर से क्रूर व्यक्ति भी दया के संपर्क में आने पर अपनी क्रूरता छोड़ देता है। अनके महात्माओं की सरलता और ममता से निठर व्यक्तियों का भी ह्दय परिवर्तन हो गया है। इसलिए मानव को हर परिस्थिति में करुणा-भाव अपनाना चाहिए। इसके आरती हुई। इस मौके पर भाजपा के पूर्व विधायक महेश गुप्ता, श्रवण कुमार, तेजवीर सिंह, दातागंज के चेयरमैन राजीव गुप्ता, हरीओम पाराशरी, नरेंद्र गरल, डॉ.राजाबाबू वार्ष्णेय, गोरेलाल व्यास, सतीश चंद्र असावा, लोकेश बाबू, आशीष वशिष्ठ, नीरज माहेश्लरी, मनोज वार्ष्णेय, सुवीन माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश चंद्र वार्ष्णेय मौजूद रहे।
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स्वामी ने रावण के दरबार में अंगद का संवाद सुनकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि पृथ्वी जानकी जी की जननी है, अत: पृथ्वी ने स्वयं अंगद का पांव लिया और कोई उसे नहीं हिला सका। स्वामी ने करुणा और दया की परिभाषा और महत्व समझाते हुए कहा कि अपने प्रति अपकार करने वाले पर भी दया-भाव रखना चाहिए, क्योंकि क्रूर से क्रूर व्यक्ति भी दया के संपर्क में आने पर अपनी क्रूरता छोड़ देता है। अनके महात्माओं की सरलता और ममता से निठर व्यक्तियों का भी ह्दय परिवर्तन हो गया है। इसलिए मानव को हर परिस्थिति में करुणा-भाव अपनाना चाहिए। इसके आरती हुई। इस मौके पर भाजपा के पूर्व विधायक महेश गुप्ता, श्रवण कुमार, तेजवीर सिंह, दातागंज के चेयरमैन राजीव गुप्ता, हरीओम पाराशरी, नरेंद्र गरल, डॉ.राजाबाबू वार्ष्णेय, गोरेलाल व्यास, सतीश चंद्र असावा, लोकेश बाबू, आशीष वशिष्ठ, नीरज माहेश्लरी, मनोज वार्ष्णेय, सुवीन माहेश्वरी, संजीव वार्ष्णेय, दिनेश चंद्र वार्ष्णेय मौजूद रहे।
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