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मिट्टी धंसने से कुएं में दबे किसान की मौत
बदायूं, ब्यूरो
Updated Mon, 07 Mar 2016 11:22 PM IST
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मौत
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नलकूप का बाल संभालते वक्त कुएं में मिट्टी की ढांग ढहने से करीब 35 फीट गहराई में किसान दब गया। छह घंटे तक चले बचाव अभियान के बाद उसका शव निकाला जा सका। अभियान के दौरान एसडीएम दातागंज ओपी तिवारी, सीओ श्योराज सिंह भी मौके पर मौजूद रहे। घटना थाना क्षेत्र के गांव ढका के जंगल में हुई। एमएलसी बनवारी सिंह यादव और पूर्व राज्यमंत्री भगवान सिंह ने भी गांव पहुंच कर मृतक के परिवार वालों को ढांढस बंधाया।
थाना क्षेत्र के गांव ढका जंगल निवासी वीरेंद्र यादव (58) पुत्र जंगी का गांव के पास ही नलकूप है। करीब तीन महीने से नलकूप खराब पड़ा था। सोमवार को वह अपने बेटे नन्हे के साथ नलकूप का बाल खोलने गए थे। वीरेंद्र यादव बाल खोलने के लिए कुंए में उतर गए। उनका पुत्र नन्हे उपर खड़ा था। वीरेंद्र करीब 35 फीट की गहराई में थे। इसी दौरान मिट्ठी की एक ढंग ढह गई। इसमें वीरेंद्र का आधा शरीर दब गया। नन्हे ने उनको बचाने के लिए रस्सी डाली। वीरेंद्र रस्सी पकड़ते इससे पहले एक और ढांग गिर गई और वीरेंद्र पूरी तरह से इसमें दब गए। नन्हे ने आस-पास खेतों में काम कर रहे किसानों को बताया। वह भी मौके पर आ गए।
खबर मिलने पर पुलिस के साथ एसडीएम दातागंज ओपी तिवारी, सीओ श्योराज सिंह भी मौके पर पहुंच गए। बचाव अभियान में तीन जेसीबी को लगाया गया। करीब छह घंटे की मेहनत के बाद वीरेंद्र को कुएं से निकाला जा सका। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस दौरान मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
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एक घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
अलापुर। वीरेंद्र के कुएं में दबने की खबर तुरंत की एंबुलेंस को दे दी गई, लेकिन एंबुलेंस करीब एक घंटे के बाद मौके पर पहुंची। वीरेंद्र के शव को हजरतपुर स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर आरपी यादव अपनी निजी कार से म्याऊं स्वास्थ्य केंद्र पर लाए।
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अधूरा रह गया बेटी के हाथ पीले करने का सपना
आठ संतानों में अब तक नहीं हुई है किसी की शादी
प्रधानी के चुनाव में पत्नी को लगाया था चुनाव
अलापुर। वीरेंद्र यादव की पत्नी सत्यवती ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका पति बीच मझधार में इस तरह छोड़कर चला जाएगा। वीरेंद्र यादव की आठ संतानें हैं। अभी किसी की शादी नहीं हुई है। वह बेटी के लिए लड़का तलाश कर रहे थे। बेटी की शादी की तमन्ना भी उनके दिन में ही रह गई।
वीरेंद्र यादव की आठ संतानों में बड़ी बेटी सूर्यवती दिव्यांग है। उसकी उनको काफी चिंता थी। मूर्ति और पिंकी दो अन्य बेटियां भी हैं। रजनेश, नन्हे, लवलनेश, निमलेश और दीपक पांच बेटे हैं। वीरेंद्र की मौत से मानो उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ ूट पड़ा हो। पूरा परिवार बदहवास है। वीरेंद्र ने प्रधानी के चुनाव में अपनी पत्नी को चुनाव भी लड़ाया था। होनी को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटी की शादी के लिए वह लड़का तलाश कर रहे थे घटना के बाद वह कई बार बेहोश भी हो गई। परिवार में कोहराम का माहौल है।
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थाना क्षेत्र के गांव ढका जंगल निवासी वीरेंद्र यादव (58) पुत्र जंगी का गांव के पास ही नलकूप है। करीब तीन महीने से नलकूप खराब पड़ा था। सोमवार को वह अपने बेटे नन्हे के साथ नलकूप का बाल खोलने गए थे। वीरेंद्र यादव बाल खोलने के लिए कुंए में उतर गए। उनका पुत्र नन्हे उपर खड़ा था। वीरेंद्र करीब 35 फीट की गहराई में थे। इसी दौरान मिट्ठी की एक ढंग ढह गई। इसमें वीरेंद्र का आधा शरीर दब गया। नन्हे ने उनको बचाने के लिए रस्सी डाली। वीरेंद्र रस्सी पकड़ते इससे पहले एक और ढांग गिर गई और वीरेंद्र पूरी तरह से इसमें दब गए। नन्हे ने आस-पास खेतों में काम कर रहे किसानों को बताया। वह भी मौके पर आ गए।
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खबर मिलने पर पुलिस के साथ एसडीएम दातागंज ओपी तिवारी, सीओ श्योराज सिंह भी मौके पर पहुंच गए। बचाव अभियान में तीन जेसीबी को लगाया गया। करीब छह घंटे की मेहनत के बाद वीरेंद्र को कुएं से निकाला जा सका। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस दौरान मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
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एक घंटे बाद पहुंची एंबुलेंस
अलापुर। वीरेंद्र के कुएं में दबने की खबर तुरंत की एंबुलेंस को दे दी गई, लेकिन एंबुलेंस करीब एक घंटे के बाद मौके पर पहुंची। वीरेंद्र के शव को हजरतपुर स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर आरपी यादव अपनी निजी कार से म्याऊं स्वास्थ्य केंद्र पर लाए।
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अधूरा रह गया बेटी के हाथ पीले करने का सपना
आठ संतानों में अब तक नहीं हुई है किसी की शादी
प्रधानी के चुनाव में पत्नी को लगाया था चुनाव
अलापुर। वीरेंद्र यादव की पत्नी सत्यवती ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका पति बीच मझधार में इस तरह छोड़कर चला जाएगा। वीरेंद्र यादव की आठ संतानें हैं। अभी किसी की शादी नहीं हुई है। वह बेटी के लिए लड़का तलाश कर रहे थे। बेटी की शादी की तमन्ना भी उनके दिन में ही रह गई।
वीरेंद्र यादव की आठ संतानों में बड़ी बेटी सूर्यवती दिव्यांग है। उसकी उनको काफी चिंता थी। मूर्ति और पिंकी दो अन्य बेटियां भी हैं। रजनेश, नन्हे, लवलनेश, निमलेश और दीपक पांच बेटे हैं। वीरेंद्र की मौत से मानो उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ ूट पड़ा हो। पूरा परिवार बदहवास है। वीरेंद्र ने प्रधानी के चुनाव में अपनी पत्नी को चुनाव भी लड़ाया था। होनी को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटी की शादी के लिए वह लड़का तलाश कर रहे थे घटना के बाद वह कई बार बेहोश भी हो गई। परिवार में कोहराम का माहौल है।