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रिहाई के बाद कभी घर नहीं आया नाबालिग बलात्कारी
अमर उजाला ब्यूरो बदायूं/इस्लामनगर।
Updated Sat, 06 May 2017 12:01 AM IST
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rape
- फोटो : amar ujala
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निर्भया कांड में फैसले के बाद फिर सुर्खियों में आया बदायूं
- नाबालिग होने की वजह से तीन साल बाद हो गई थी रिहाई
पूरे देश को झकझोर देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड के चार आरोपियों को फांसी की सजा के बाद फिर से बदायूं सुर्खियों में आ गया है। इसकी एक वजह निर्भया कांड में एक नाबालिग बलात्कारी बदायूं के थाना इस्लामनगर के एक गांव का भी था। नाबालिग होने की वजह से उसे तीन साल बाल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था। हालांकि, रिहाई के बाद वह कभी अपने घर नहीं आया। परिवार वाले भी उससे ताल्लुक होने से इंकार कर रहे हैं।
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की वारदात के बाद पूरे देश में उबाल आ गया था। मामले में जब बदायूं के थाना इस्लामनगर के एक गांव के नाबालिग का नाम आरोपियों में आया तो बदायूं के दामन पर भी दाग लगे। इस बलात्कारी की उम्र निर्भया कांड के दौरान 17 साल चार महीने थी। जांच में वह नाबालिग पाया गया। उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
बाल सुधार गृह में रहने के बाद 24 दिसंबर 2015 को उसे रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई पर भी देश में काफी बहस हुई। नाबालिगों के लिए कानून में संशोधन भी किया गया। उसकी बाल सुधार गृह से रिहाई को करीब 16 महीने बीते चुके हैं, लेकिन वह अब तक इस्लामनगर थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित अपने घर नहीं आया। नाबालिग अब बालिग भी हो चुका है। उसके पिता और मां का कहना है कि उनका उससे कोई ताल्लुक नहीं है।
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गांव में कई दिन रही थी मीडिया की चहल-पहल
बदायूं। निर्भया कांड में जब नाबालिग का नाम आया तो पूरे देश की मीडिया का ध्यान बदायूं की ओर घूम गया। उसके गांव में कई दिन तक पीपली लाइव जैसे हालात रहे। बाद में जब 24 दिसंबर 2015 को उसकी बाल सुधार गृह से रिहाई हुई तब भी गांव पूरे देश की मीडिया पहुंच गया था। उस वक्त भी यहां न्यूज चैनलों की ओवी वैन कई दिन तक जमी रहीं।
आरोपी के गांव में आने का हुआ था विरोध
इस्लामनगर। नाबालिग आरोपी का गांव मिश्रित आबादी वाला है। निर्भया कांड के आरोपी की दिसंबर 2015 में जब बाल सुधार गृह से रिहाई हुई तो गांव के लोगों ने उसका गांव में आने का विरोध किया था। करीब साढ़े चार साल के बाद निर्भया कांड में फैसला आने के बाद गांव में एक बार फिर से उसको लेकर लोगों में चर्चाएं होती रहीं।
छह भाई-बहन में सबसे बड़ा है
इस्लामनगर। बदायूं का बलात्कारी अपने परिवार के छह भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। उसके पिता मानसिक रूप से कमजोर हैं। परिवार काफी गरीब है। उसकी कक्षा पांच तक की शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई थी। उसके खिलाफ सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसी स्कूल से उसकी उम्र के संबंध में रिकार्ड लिया था।
स्कूल रजिस्टर में क्रमांक 435 पर दर्ज है नाम
बदायूं। गांव प्राइमरी विद्यालय के दाखिला रजिस्टर में उसका नाम क्रमांक 435 पर दर्ज है। उसके नाम के आगे ही काले पेन से निशान लगा हुआ है। पूरे रजिस्टर पर किसी बच्चे के नाम के आगे यह निशान नहीं है। निर्भया कांड के दोषी ने 19 जुलाई 2002 को कक्षा एक में दाखिला लिया था। इसके बाद 12 मई 2003 को कक्षा दो और 11 मई 2005 में उसका दाखिला कक्षा तीन में हुआ। नाबालिग दुष्कर्मी चार जून 1995 को पैदा हुआ था। उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई के दौरान यही वह रिकार्ड है, जिसने उसे नाबालिग साबित किया और देश को झकझोर देने वाले मामले में उसे सिर्फ तीन साल के लिए बाल सुधार गृह में रखा गया।
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- नाबालिग होने की वजह से तीन साल बाद हो गई थी रिहाई
पूरे देश को झकझोर देने वाले दिल्ली के निर्भया कांड के चार आरोपियों को फांसी की सजा के बाद फिर से बदायूं सुर्खियों में आ गया है। इसकी एक वजह निर्भया कांड में एक नाबालिग बलात्कारी बदायूं के थाना इस्लामनगर के एक गांव का भी था। नाबालिग होने की वजह से उसे तीन साल बाल सुधार गृह में रखने के बाद रिहा कर दिया गया था। हालांकि, रिहाई के बाद वह कभी अपने घर नहीं आया। परिवार वाले भी उससे ताल्लुक होने से इंकार कर रहे हैं।
दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को चलती बस में निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की वारदात के बाद पूरे देश में उबाल आ गया था। मामले में जब बदायूं के थाना इस्लामनगर के एक गांव के नाबालिग का नाम आरोपियों में आया तो बदायूं के दामन पर भी दाग लगे। इस बलात्कारी की उम्र निर्भया कांड के दौरान 17 साल चार महीने थी। जांच में वह नाबालिग पाया गया। उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें उसे तीन साल के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया गया।
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बाल सुधार गृह में रहने के बाद 24 दिसंबर 2015 को उसे रिहा कर दिया गया। उसकी रिहाई पर भी देश में काफी बहस हुई। नाबालिगों के लिए कानून में संशोधन भी किया गया। उसकी बाल सुधार गृह से रिहाई को करीब 16 महीने बीते चुके हैं, लेकिन वह अब तक इस्लामनगर थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित अपने घर नहीं आया। नाबालिग अब बालिग भी हो चुका है। उसके पिता और मां का कहना है कि उनका उससे कोई ताल्लुक नहीं है।
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गांव में कई दिन रही थी मीडिया की चहल-पहल
बदायूं। निर्भया कांड में जब नाबालिग का नाम आया तो पूरे देश की मीडिया का ध्यान बदायूं की ओर घूम गया। उसके गांव में कई दिन तक पीपली लाइव जैसे हालात रहे। बाद में जब 24 दिसंबर 2015 को उसकी बाल सुधार गृह से रिहाई हुई तब भी गांव पूरे देश की मीडिया पहुंच गया था। उस वक्त भी यहां न्यूज चैनलों की ओवी वैन कई दिन तक जमी रहीं।
आरोपी के गांव में आने का हुआ था विरोध
इस्लामनगर। नाबालिग आरोपी का गांव मिश्रित आबादी वाला है। निर्भया कांड के आरोपी की दिसंबर 2015 में जब बाल सुधार गृह से रिहाई हुई तो गांव के लोगों ने उसका गांव में आने का विरोध किया था। करीब साढ़े चार साल के बाद निर्भया कांड में फैसला आने के बाद गांव में एक बार फिर से उसको लेकर लोगों में चर्चाएं होती रहीं।
छह भाई-बहन में सबसे बड़ा है
इस्लामनगर। बदायूं का बलात्कारी अपने परिवार के छह भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। उसके पिता मानसिक रूप से कमजोर हैं। परिवार काफी गरीब है। उसकी कक्षा पांच तक की शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई थी। उसके खिलाफ सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसी स्कूल से उसकी उम्र के संबंध में रिकार्ड लिया था।
स्कूल रजिस्टर में क्रमांक 435 पर दर्ज है नाम
बदायूं। गांव प्राइमरी विद्यालय के दाखिला रजिस्टर में उसका नाम क्रमांक 435 पर दर्ज है। उसके नाम के आगे ही काले पेन से निशान लगा हुआ है। पूरे रजिस्टर पर किसी बच्चे के नाम के आगे यह निशान नहीं है। निर्भया कांड के दोषी ने 19 जुलाई 2002 को कक्षा एक में दाखिला लिया था। इसके बाद 12 मई 2003 को कक्षा दो और 11 मई 2005 में उसका दाखिला कक्षा तीन में हुआ। नाबालिग दुष्कर्मी चार जून 1995 को पैदा हुआ था। उसके खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई के दौरान यही वह रिकार्ड है, जिसने उसे नाबालिग साबित किया और देश को झकझोर देने वाले मामले में उसे सिर्फ तीन साल के लिए बाल सुधार गृह में रखा गया।