UP Nikay Chunav: बदायूं से दीपमाला होंगी भाजपा की प्रत्याशी, ककराला सीट पर खेला मुस्लिम कार्ड
भाजपा ने रविवार को बदायूं समेत सातों नगर पालिका सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा कर दी। बदायूं से दीपमाला गोयल फिर से भाजपा की प्रत्याशी होंगी। वहीं ककराला से भाजपा ने मरगूब अहमद सोनी को टिकट दिया है।
विस्तार
बदायूं नगर पालिका सीट से भाजपा ने एक बार फिर निवर्तमान पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल पर भरोसा जताया है। वह पिछले चुनाव में सपा की फात्मा रजा को हराकर पालिकाध्यक्ष बनी थीं। इस चुनाव में भी भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। वहीं ककराला सीट पर मुस्लिम कार्ड खेला है। भाजपा ने यहां से मरगून अहमद सोनी को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है।
भाजपा प्रत्याशी दीपमाला गोयल शुरू से ही राजनीति में सक्रिय रही हैं। वर्ष 2007 में इन्होंने भाजपा प्रत्याशी के रूप में पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ा था, लेकिन दूसरे नंबर पर रहीं। उस साल सपा के आबिद रजा विजयी हुए थे। 2012 में उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था। वर्ष 2015 में हुए उपचुनाव में पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ा था लेकिन इसमें भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था। इसमें सपा की फात्मा रजा चुनाव जीती थीं। 2017 में हुए नगर पालिकाध्यक्ष पद के चुनाव में दीपमाला गोयल ने जीत हासिल की। उन्होंने 32316 वोट पाकर सपा की फात्मा रजा को चुनाव हराया था। फात्मा रजा को इस चुनाव में दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
14 दावेदारों ने किया था आवेदन
पिछले काफी दिनों से लोग भाजपा के टिकट घोषित होने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे लेकिन प्रत्याशियों की घोषणा नहीं हो पा रही थी। शहर सीट से सबसे ज्यादा 14 आवेदन पार्टी के पास आए थे, लेकिन दीपमाला गोयल और जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता की पत्नी शुभ्रा गुप्ता का नाम सबसे ऊपर माना जा रहा था। रविवार शाम को आई सूची में दीपमाला गोयल को शहर सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। दीपमाला गोयल इससे पहले 1994 में भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष भी रह चुकी हैं।
प्रत्याशियों की सूची
ककराला से मरगूब अहमद सोनी
भाजपा की ओर से ककराला निवासी मरगूब अहमद सोनी को अपना प्रत्याशी बनाया गया हैं। मरगूब अहमद सोनी पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इनके परदादा मुबारक अली खान ककराला से विधायक और नगर पालिका परिषद चेयरमैन रहे हैं। इसके अलावा दादा जफर अली खान भी नगर पालिका परिषद ककराला से चेयरमैन रहे। पिता जरगाम जफर खान 2017 में नगर पालिका परिषद के चुनाव नहीं लड़े थे, जबकि इससे पहले लगातार तीन चुनाव वह लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।