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Budaun News: आशा-संगिनी ने उठाई स्थायीकरण व 21 हजार रुपये मानदेय की मांग
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सीएमओ कार्यालय में धरना प्रदर्शन देती आशा-संगिनी। संवाद
बदायूं। आशा-संगिनी ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं को स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने, हर महीने 21 हजार रुपये न्यूनतम मानदेय देने और बीमा सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स की प्रदेश अध्यक्ष विमलेश ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, परिवार नियोजन तथा स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता सहित विभाग की विभिन्न योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम पूरी जिम्मेदारी से करती हैं।
बावजूद इसके उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा और निर्धारित न्यूनतम मानदेय नहीं मिल रहा है। राष्ट्रीय आशा स्वास्थ्य संगठन की जिलाध्यक्ष किशनवती ने कहा कि संविदा और मानदेय की व्यवस्था समाप्त कर आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने हर महीने 21 हजार रुपये निश्चित न्यूनतम मानदेय, 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा तथा ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा देने की मांग की।
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संगठन मंत्री अलका सक्सेना ने कहा कि आशा कार्यकर्ता लंबे समय से शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी समस्याओं का समाधान कर मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। विजय लक्ष्मी ने सरकारी अस्पतालों में आशा कार्यकर्ताओं के लिए विश्राम गृह की व्यवस्था कराने की मांग की। इस दौरान रंजना सक्सेना, सरिता, ओमवती, तिलोसिमा, विदिशा, अंजली और कुसुम लता सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स की प्रदेश अध्यक्ष विमलेश ने कहा कि आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण, नवजात और बच्चों के स्वास्थ्य, परिवार नियोजन तथा स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता सहित विभाग की विभिन्न योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम पूरी जिम्मेदारी से करती हैं।
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बावजूद इसके उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा और निर्धारित न्यूनतम मानदेय नहीं मिल रहा है। राष्ट्रीय आशा स्वास्थ्य संगठन की जिलाध्यक्ष किशनवती ने कहा कि संविदा और मानदेय की व्यवस्था समाप्त कर आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। उन्होंने हर महीने 21 हजार रुपये निश्चित न्यूनतम मानदेय, 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा तथा ईपीएफ और ईएसआई की सुविधा देने की मांग की।
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संगठन मंत्री अलका सक्सेना ने कहा कि आशा कार्यकर्ता लंबे समय से शहरी स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उनकी समस्याओं का समाधान कर मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए। विजय लक्ष्मी ने सरकारी अस्पतालों में आशा कार्यकर्ताओं के लिए विश्राम गृह की व्यवस्था कराने की मांग की। इस दौरान रंजना सक्सेना, सरिता, ओमवती, तिलोसिमा, विदिशा, अंजली और कुसुम लता सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहीं।