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Budaun News: कछला घाट को विकसित करने के लिए फिर भेजेंगे 19.45 करोड़ का प्रस्ताव
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07 अप्रैल का प्रकाशित खबर।
उझानी। गंगा के कछला घाट को हरिद्वार की तरह विकसित किए जाने को लेकर करीब दो साल से चल रही कवायद ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। मंगलवार दोपहर इसे लेकर गंगा समिति की बैठक में डीएम निधि श्रीवास्तव ने बाढ़ खंड के अफसरों से कहा कि वह पुनरीक्षण करके जल्द ही 19.45 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजें। ताकि स्वीकृति के बाद घाट का कायाकल्प शुरू हो पाए।
जिला मुख्यालय स्थित सभाकक्ष में डीएम निधि श्रीवास्तव ने कछला घाट के कायाकल्प के लिए धनराशि अवमुक्त होने में अभिलेखीय दिक्कतों का परीक्षण किया। इस बैठक में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता नहीं पहुंचे, लेकिन उनके प्रतिनिधि से दो साल पहले भेजे गए 19.45 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की जानकारी दी। डीएम ने कहा कि घाट के विकास को प्राथमिकता दी जाए। बाढ़ खंड के अफसर पुराने प्रस्ताव का पुनरीक्षण कराएं। पुनरीक्षण के बाद ही प्रस्ताव फिर से शासन को भेजा जाएगा। उसके बाद 19.45 करोड़ रुपये जल्द ही अवमुक्त करा कर घाट का कायाकल्प शुरू कराया जाएगा। घाट के कायाकल्प को दो साल पहले भेजे गए प्रस्ताव के बारे में पिछले दिनों ही अमर उजाला ने फिर छापा था। तकनीकी कारणों से नमामि गंगे के दफ्तर में घाट के कायाकल्प की फाइल स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाई थी।
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कायाकल्प से हादसों पर लगेगा अंकुश
कछला नगर पंचायत के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि 19.45 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए वह दो- तीन बार दिल्ली में नमामि गंगे के अफसरों से भेंट कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने जलशक्ति मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल के सामने भी श्रद्धालुओं की दिक्कतों से अवगत कराया था। बताया कि पक्के घाट, पार्क और प्रकाश व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
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अप्रैल, मई, जून में सबसे ज्यादा परेशानी
- गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली समेत आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। घाट पर अव्यवस्थाओं की वजह से इसी महीना मथुरा में छटीकरा निवासी मयंक शर्मा, राजस्थान में धौलपुर जिले के रमेश (12) पुत्र महेश और करन (23) पुत्र दिनेश की कछला घाट पर डूबने से मौत हो चुकी है। पिछले साल अप्रैल, मई और जून में नौ श्रद्धालुओं की जान गई।
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जिला मुख्यालय स्थित सभाकक्ष में डीएम निधि श्रीवास्तव ने कछला घाट के कायाकल्प के लिए धनराशि अवमुक्त होने में अभिलेखीय दिक्कतों का परीक्षण किया। इस बैठक में बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता नहीं पहुंचे, लेकिन उनके प्रतिनिधि से दो साल पहले भेजे गए 19.45 करोड़ रुपये के प्रस्ताव की जानकारी दी। डीएम ने कहा कि घाट के विकास को प्राथमिकता दी जाए। बाढ़ खंड के अफसर पुराने प्रस्ताव का पुनरीक्षण कराएं। पुनरीक्षण के बाद ही प्रस्ताव फिर से शासन को भेजा जाएगा। उसके बाद 19.45 करोड़ रुपये जल्द ही अवमुक्त करा कर घाट का कायाकल्प शुरू कराया जाएगा। घाट के कायाकल्प को दो साल पहले भेजे गए प्रस्ताव के बारे में पिछले दिनों ही अमर उजाला ने फिर छापा था। तकनीकी कारणों से नमामि गंगे के दफ्तर में घाट के कायाकल्प की फाइल स्वीकृति तक नहीं पहुंच पाई थी।
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कायाकल्प से हादसों पर लगेगा अंकुश
कछला नगर पंचायत के अध्यक्ष जगदीश सिंह ने बताया कि 19.45 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए वह दो- तीन बार दिल्ली में नमामि गंगे के अफसरों से भेंट कर चुके हैं। पिछले महीने उन्होंने जलशक्ति मंत्रालय में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल के सामने भी श्रद्धालुओं की दिक्कतों से अवगत कराया था। बताया कि पक्के घाट, पार्क और प्रकाश व्यवस्था होने से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी।
अप्रैल, मई, जून में सबसे ज्यादा परेशानी
- गंगाघाट पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश के अलावा दिल्ली समेत आसपास के जिलों से श्रद्धालु आते हैं। पूर्णिमा और विशेष स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में पहुंच जाती है। घाट पर अव्यवस्थाओं की वजह से इसी महीना मथुरा में छटीकरा निवासी मयंक शर्मा, राजस्थान में धौलपुर जिले के रमेश (12) पुत्र महेश और करन (23) पुत्र दिनेश की कछला घाट पर डूबने से मौत हो चुकी है। पिछले साल अप्रैल, मई और जून में नौ श्रद्धालुओं की जान गई।