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'अटल' हिंदुत्व से कमल खिलाने का इंतजाम

Tue, 22 Jan 2013 09:41 AM IST
अखिलेश/महेन्द्र/लखनऊ
अखिलेश/महेन्द्र/लखनऊ Updated Tue, 22 Jan 2013 09:41 AM IST
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bjp wants to play hindutva card in lok sabha election

अटल बिहारी वाजपेयी प्रत्यक्ष रूप से सोमवार को यहां भाजपा की ‘अटल शंखनाद’ रैली के मंच पर नहीं थे लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वह गोमती के किनारे रैलीस्थल झूलेलाल पार्क में जगह-जगह मौजूद दिख रहे थे। मंच पर नेताओं के पीछे लगे भारी-भरकम बैनर पर। मैदान में और पूरे लखनऊ में लगी रैली की होर्डिंगों पर। कार्यकर्ताओं के दिल व दिमाग पर तो नेताओं की जुबान पर। नेता उनके काम का गुणगान करके लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में भाजपा के जमीन तैयार करने की कोशिश कर रहे थे तो वजह शिंदे का बयान हो या भाजपा की लोकसभा चुनाव में यूपी में कमल खिलाने की चिंता।

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विकास की बात करने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी तक सोमवार को यहां अटल शंखनाद रैली में बदली जुबान बोल रहे थे। उन्होंने कहा, ‘भगवा-हिंदू का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान।’ नीचे बैठे कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी की यह हिंदुत्व की राह पर आगे बढ़ने का शंखनाद है। कुल मिलाकर इस रैली से साफ हो गया कि लोकसभा चुनाव के लिए यूपी की बंजर हो रही जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए भाजपा के रणनीतिकारों ने अटल के कामों का गुणगान और हिंदुत्व को ‘सान’ देकर कमल खिलाने का फैसला किया है।
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मंच पर लगे बैनर पर भगवान कृष्ण का महाभारत के युद्ध पर ‘पांचजन्य शंख’ का उद्घोष करते चित्र था तो लंबे अरसे बाद भाषण देने आने वाले नेता ‘जय श्रीराम’ का उद्घोष कर रहे थे। नीचे कार्यकर्ता ‘जय श्रीराम’ का नारा सुनते ही ऊपर हाथ उठाकर उछल जाते। नेताओं के सुर में सुर मिलाते और नेताओं के शांत होते ही ‘नरेन्द्र मोदी जिंदाबाद’ तथा नरेन्द्र मोदी का नारा लगा देते।
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कार्यकर्ताओं ने यह नारे एक-दो बार नहीं बल्कि लगभग तीन घंटा से ऊपर चली इस रैली में बार-बार लगाए। यह नारे भी लगे, ‘हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान, मांग रहा है हिंदुस्तान।’ कल्याण बोलने के लिए मंच पर आए तो बैरियर भीड़ को रोक नहीं पाए। कल्याण की झलक देखने के लिए सैकड़ों कार्यकर्ता मंच के सामने डी में कूदकर आ गए। तमाम लोग बैरीकेडिंग पर चढ़ गए।

हिंदुत्व को धार
कल्याण ने जब ‘जयश्रीराम’ का नारा लगाया तो काफी देर तक यह नारा मैदान में गूंजता रहा। जब सारे नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नारा लगाया तो कार्यकर्ताओं ने नारा लगाया, ‘हम आपके साथ हैं।’ साफ हो गया कि कार्यकर्ता चाहते हैं कि पार्टी नेता हिंदुत्व या मंदिर मुद्दे पर बार-बार न पलटे और एकजुट रहें।

विनय कटियार बोले तो सिर्फ तीन बार ‘जयश्रीराम’ लेकिन इसके साथ उन्होंने जो वाक्य जोड़ा, उससे साफ हो गया कि वह गडकरी सहित पार्टी के मध्यमार्गी तमाम नेताओं को समझाना चाहते हैं कि राम के नाम अर्थात हिंदुत्व की राह पर चले बगैर भाजपा का कल्याण नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, ‘सिर्फ जय श्रीराम कहते हुए घूम जाइए कल्याण हो जाएगा।’ उमा भारती तो भगवा खेमे की नेता मानी ही जाती हैं पर, राजनाथ सिंह, डा. जोशी, डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, कलराज मिश्र, सूर्यप्रताप शाही और डा. रमापति राम त्रिपाठी तक हिंदुत्व को धार देते नजर आए। किसी ने आतंकवाद को माध्यम बनाया तो किसी ने मुस्लिम तुष्टीकरण को तो किसी ने सपा सरकार के मुस्लिम हितैषी फैसलों को निशाना बनाया।

कार्यकर्ताओं के मन में सवाल
पर, रैली खत्म हुई तो कार्यकर्ता के मुंह से निकल रहे कुछ सवाल भाजपा के सामने भविष्य में खड़ी चुनौतियों की ओर संकेत कर रहे थे। सवाल थे, ‘पार्टी नेता कितने दिन एकजुट रहते हैं? कल्याण सिंह अब तो भाजपा नहीं छोड़ेंगे या उन्हें फिर भाजपा छोड़ना तो नहीं पड़ेगा? लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के चयन में नेताओं की खींचतान और झगड़ा तो नहीं होगा? कोई नेता किसी बाबू सिंह कुशवाहा जैसे चेहरे को ऐन मौके पर पार्टी में नहीं खींचकर सब किए धरे पर पानी नहीं फेर देगा?’


इन सवालों से साफ हो रहा था कि आज की रैली से मिले उत्साह और ऊर्जा को लोकसभा चुनाव 2014 तक बरकरार रखना भाजपा नेताओं के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। आगे के परिणाम इस चुनौती से पार पाने पर ही निर्भर करेंगे।

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