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जच्चा-बच्चा की मौत पर अस्पताल में हंगामा

Wed, 15 Jan 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 12:15 AM IST
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Uproar in the hospital on the death of a child
जच्चा-बच्चा की मौत पर अस्पताल में हंगामा
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बिजनौर। एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान एक महिला और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। परिजनों ने चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मृतका के परिजनों को समझाकर मामले को शांत कराया। वहीं अस्पताल के डाक्टर का कहना है कि परिजनों के सभी आरोप निराधार हैं। इलाज में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।

नगीना देहात थाना क्षेत्र के गांव टांडा माइदास निवासी रूबी (23) पत्नी योगेश कुमार को प्रसव पीड़ा होने पर सोमवार सुबह करीब 11 बजे बिजनौर- नजीबाबाद मार्ग स्थित एक हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। चिकित्सकों ने परिजनों को ऑपरेशन से प्रसव होने की बात कही। इसके बाद डिलीवरी के लिए रूबी का ऑपरेशन किया गया। परिजनों का आरोप है कि रूबी प्रसव पीड़ा से कराहती रही। चिकित्सक सीमा देशवाल ने उनकी बातों को यह कहकर नजरअंदाज किया कि प्रसव के दौरान दर्द होना आम बात है और इस ओर ध्यान नहीं दिया। मंगलवार सुबह तक भी प्रसव नहीं होने पर उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने बताया कि हालत बिगड़ती देख आनन-फानन में चिकित्सक आपरेशन से प्रसव कराने के लिए लेकर गई। करीब दो घंटे बाद चिकित्सक ने उन्हें बताया कि रूपा को मृत बच्ची पैदा हुई है। रूबी के बारे में पूछने चिकित्सक ने उसके सकुशल होने की बात कही। कुछ देर बाद अस्पताल कर्मी रूबी को एंबुलेंस से कहीं ले जाने लगे। पूछने पर उन्होंने बताया कि रूबी की हालत सीरियस है, इसलिए उसके किसी दूसरे अस्पताल में आईसीयू में भर्ती करने के लिए जा रहे हैं। दूसरे चिकित्सक के यहां पहुंचने पर उसने बताया कि रूबी की मौत दो से तीन घंटे पहले ही हो चुकी है। हंगामा होता देख चिकित्सक वहां से खिसक गए। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराया। परिजनों के मुताबिक उन्होंने चिकित्सक से सोमवार को ही सर्जरी करके प्रसव कराने के लिए कहा था, लेकिन चिकित्सक ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। सामान्य प्रसव कराने की बात ही कहती रही। मंगलवार को सर्जरी के दौरान लापरवाही से रूबी और नवजात शिशु की मौत हो गई थी, लेकिन चिकित्सक ने उन्हें धोखे में रखकर बात को छुपाए रखा। यदि चिकित्सक समय रहते उन्हें बता देती तो शायद रूपा और नवजात की जान बचाई जा सकती थी। वहीं डा. राहुल देशवाल का कहना है कि परिजनों के सभी आरोप निराधार हैं। इलाज में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। प्रसूता का हीमोग्लोबिन पांच ग्राम पर पहुंच गया था। इसके बाद उन्होंने परिजनों को हायर सेंटर ले जाने की बात कही गई थी, लेकिन परिजनों ने उनके अस्पताल में ही प्रसव कराने की बात कही।
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एक साल पहले ही हुई थी शादी
पत्नी और नवजात की मौत से योगेश और उसके परिजनों का रो-रोक बुरा हाल है। परिजनों ने बताया कि योगेश और रूबी का विवाह करीब एक साल पहले ही हुआ था।
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