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Bijnor News: हुनर को बनाया आजीविका का मजबूत आधार

Mon, 10 Aug 2026 12:47 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 12:47 AM IST
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Skills made a strong basis for livelihood
बिजनौर। रसोई तक सीमित रहने वाली महिलाओं ने अब अपने हुनर को आजीविका का मजबूत आधार बना लिया है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर जिले की हजारों महिलाएं प्रिंटिंग प्रेस, साबुन निर्माण, स्कूटी शोरूम, सिलाई-कढ़ाई समेत विभिन्न उद्यमों के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। बिजनौर में अब तक 62 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
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स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं ने ऋण लेकर आजीविका बढ़ाने के लिए काम शुरू किया। काम के प्रति समर्पित रहने वाली महिलाओं ने अपनी आजीविका बेहतर की और धीरे-धीरे उनका परिवार समृद्ध हो रहा है। ऐसे में अब बिजनौर में वित्तीय वर्ष 2026-27 में डेढ़ लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ने के साथ उनका आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी भी मजबूत होगी। एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) की ओर से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ऋण दिलाया जा रहा है।
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केस एक
नजीबाबाद के गांव धनौरा निवासी पूनम ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आय बढ़ाई। इसके बाद 11 लाख रुपये ऋण लेकर एवं 10 लाख रुपये अपने पास से लगाकर एक जनवरी 2024 को बड़ी प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की। उन्हें कई सरकारी विभागों, दुकान, संस्थानों, पुस्तक, रजिस्टर छपाई का ऑर्डर मिला। वर्तमान में उनका टर्नओवर 40 लाख रुपये है।
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केस दो
मोहम्मदपुर देवमल के गांव राजारामपुर खादर निवासी जूली देवी साई आजीविका समूह से जुड़कर विदुर ब्रांड का साबुन तैयार कर रही है। उन्होंने ऑनलाइन साबुन बनाने की जानकारी ली और थोड़ी मात्रा में सामग्री मंगाकर साबुन बनाया। इसके बाद 11 लाख रुपये का ऋण लेकर अपना व्यवसाय शुरू किया। वह नीम, नींबू, एलोवेरा, जैस्मिन, केसर, आलमंड, हल्दी-चंदन, लैवेंडर एवं बकरी के दूध का साबुन बनाती हैं। अब तक 30 हजार से अधिक साबुन विक्रय कर चुकी हैं।
केस तीन
नजीबाबाद के गांव किशनपुर आंवला निवासी सरिता दूबे अनामिका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने सबसे पहले अपनी बहन के साथ ब्यूटीपार्लर काम शुरू किया। अब इन्हें हर महीने 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। इसके अलावा सीएलएफ से पांच लाख रुपये का ऋण लेकर साबुन, शैंपू, फेस वॉश बनाने का कार्य शुरू किया। इनके उत्पाद जिले में खोले गए 44 सीएलएफ विदुर ब्रांड आउटलेट पर विक्रय होते हैं। वर्तमान में वह अपने पति से अलग 40 रुपये तक मासिक कमा रही हैं।


स्वयं सहायता समूह से जुड़कर महिलाएं खुद का व्यवसाय शुरू कर रही हैं। जिन महिलाओं की सालाना आय एक लाख से अधिक हैं, वे लखपति दीदी हैं। वर्तमान में बिजनौर में 62 हजार लखपति दीदी हैं। साथ ही ढाई लाख महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर सशक्त बन रही हैं।
....मनोज वर्मा, उपायुक्त, एनआरएलएम, बिजनौर
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