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दुर्लभ मामला : महिला के गर्भाशय से निकाला 150 ग्राम का स्टोन बेबी
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बिजनौर मेडिकल कॉलेज में महिला के गर्भ से स्टोन बेबी निकालने वाली डॉक्टरों की टीम। स्रोत चिकित्स
बिजनौर। जिले में पहली बार स्टोन बेबी का दुर्लभ मामला सामने आया है। मेडिकल कॉलेज में डाॅक्टरों की टीम ने मंगलवार को 36 वर्षीय महिला का ऑपरेशन करके उसके गर्भाशय से 150 ग्राम का स्टोन बेबी निकाला है। स्टोन बेबी के दुनिया भर में चिकित्सा क्षेत्र में 350 से भी कम मामले दर्ज हैं। डाॅक्टर का कहना है कि इस केस का पढ़ाई के लिए प्रकाशन कराया जाएगा। महिला स्वस्थ है।
महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. धारा ने बताया कि पेट दर्द और रक्तस्राव की शिकायत लेकर महिला इलाज के लिए आई थी। जांच करने पर पता चला कि महिला के गर्भ में चार माह का मृत भ्रूण कैल्शियम जमने से पत्थर जैसी कठोर संरचना में बदला गया है। मेडिकल की भाषा में इसे स्टोन बेबी (लिथोपेडियन) कहते हैं।
बताया कि महिला आठवीं बार गर्भवती हुई थी। उसके चार बच्चे जीवित हैं। उसने तीन बार गर्भपात कराया है। मई 2026 में लगभग साढ़े तीन माह की गर्भावस्था के बाद महिला ने बच्चेदानी की सफाई कराई थी। इसके बाद से उसे लगातार थोड़ा-थोड़ा रक्तस्राव हो रहा था। इसका इलाज कराने महिला मेडिकल कॉलेज में आई।
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डॉ. धारा ने बताया कि चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड और खून की जांच की। जांच में गर्भाशय में गर्भावस्था से संबंधित अवशेष एवं मृत भ्रूण पाया गया। लंबे समय से समस्या बनी रहने के कारण मरीज में अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा बना हुआ था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने उनके नेतृत्व में ऑपरेशन किया।
गर्भाशय की दीवार से चिपका था अवशेष, निकालना पड़ा गर्भाशय
डॉ. धारा ने बताया कि प्लेसेंटा एवं गर्भावस्था से संबंधित अवशेष गर्भाशय की दीवार से अत्यंत मजबूती से चिपके हुए थे। इस वजह से ऑपरेशन करते हुए पूरे गर्भाशय को निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. धारा, डॉ. साक्षी सिंह, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. विजयंत मलिक, डॉ. साक्षी, डॉ. इंदु और नर्सिंग स्टाफ में सिस्टर चित्रा, खेमचंद शामिल रहे।
क्या होता है स्टोन बेबी
डॉ. धारा ने बताया कि स्टोन बेबी (लिथोपेडियन) बेहद दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति है। दुनिया भर में इस तरह के 350 से भी कम मामले दर्ज हैं। बताया कि जब भ्रूण मर जाता है तो आकार बड़ा होने पर शरीर उसे अपने आप सोख नहीं पाता है। इसके चलते मां के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मरे हुए भ्रूण को बाहरी वस्तु मानती है और संक्रमण से बचाने के लिए उसके चारों ओर कैल्शियम की परत बना देती है। इसके बाद भ्रूण पत्थर जैसा (कैलसीफाइड) बन जाता है।
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महात्मा विदुर मेडिकल कॉलेज में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. धारा ने बताया कि पेट दर्द और रक्तस्राव की शिकायत लेकर महिला इलाज के लिए आई थी। जांच करने पर पता चला कि महिला के गर्भ में चार माह का मृत भ्रूण कैल्शियम जमने से पत्थर जैसी कठोर संरचना में बदला गया है। मेडिकल की भाषा में इसे स्टोन बेबी (लिथोपेडियन) कहते हैं।
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बताया कि महिला आठवीं बार गर्भवती हुई थी। उसके चार बच्चे जीवित हैं। उसने तीन बार गर्भपात कराया है। मई 2026 में लगभग साढ़े तीन माह की गर्भावस्था के बाद महिला ने बच्चेदानी की सफाई कराई थी। इसके बाद से उसे लगातार थोड़ा-थोड़ा रक्तस्राव हो रहा था। इसका इलाज कराने महिला मेडिकल कॉलेज में आई।
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डॉ. धारा ने बताया कि चिकित्सकों ने अल्ट्रासाउंड और खून की जांच की। जांच में गर्भाशय में गर्भावस्था से संबंधित अवशेष एवं मृत भ्रूण पाया गया। लंबे समय से समस्या बनी रहने के कारण मरीज में अत्यधिक रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा बना हुआ था। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने उनके नेतृत्व में ऑपरेशन किया।
गर्भाशय की दीवार से चिपका था अवशेष, निकालना पड़ा गर्भाशय
डॉ. धारा ने बताया कि प्लेसेंटा एवं गर्भावस्था से संबंधित अवशेष गर्भाशय की दीवार से अत्यंत मजबूती से चिपके हुए थे। इस वजह से ऑपरेशन करते हुए पूरे गर्भाशय को निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. धारा, डॉ. साक्षी सिंह, एनेस्थीसिया टीम से डॉ. विजयंत मलिक, डॉ. साक्षी, डॉ. इंदु और नर्सिंग स्टाफ में सिस्टर चित्रा, खेमचंद शामिल रहे।
क्या होता है स्टोन बेबी
डॉ. धारा ने बताया कि स्टोन बेबी (लिथोपेडियन) बेहद दुर्लभ चिकित्सीय स्थिति है। दुनिया भर में इस तरह के 350 से भी कम मामले दर्ज हैं। बताया कि जब भ्रूण मर जाता है तो आकार बड़ा होने पर शरीर उसे अपने आप सोख नहीं पाता है। इसके चलते मां के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मरे हुए भ्रूण को बाहरी वस्तु मानती है और संक्रमण से बचाने के लिए उसके चारों ओर कैल्शियम की परत बना देती है। इसके बाद भ्रूण पत्थर जैसा (कैलसीफाइड) बन जाता है।