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बिना जीएसटी नंबर लिए ही पंचायतों ने खर्च कर दिए 140 करोड़
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बिना जीएसटी दिए ही पंचायतों ने खर्च किए 140 करोड़
बिजनौर। ग्राम पंचायतों में पिछली योजना में 140 करोड़ का काम बिना जीएसटी नंबर लिए ही करा दिया गया। जीएसटी नंबर न लेने वाली एक या दो नहीं, बल्कि सभी ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में जीएसटी को करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ है। इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारी इस योजना में जीएसटी नंबर दिलाने के लिए ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश देने की बात कह रहे हैं।
जिले में 1123 ग्राम पंचायतें हैं। पहले की बात करें तो ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान और सचिव की देखरेख में ही छोटे काम हो जाते थे। उनमें ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव सीधे उन्हें भुगतान कर देते थे, जहां से काम कराने के लिए माल खरीदा जाता था, लेकिन अब ग्राम पंचायतों का बजट बढ़ा तो बड़े काम की लागत लाखों रुपये में पहुंच गई। एक लाख से बड़े काम ग्राम पंचायतों में ठेकेदारों के माध्यम से ही कराए जाते हैं। वहीं कराए गए कार्यों के बिल ठेकेदार जीएसटी के साथ वसूलते हैं। उधर, ग्राम पंचायतों के पास जीएसटी नंबर ही नहीं है, इस कारण यह जीएसटी विभाग को नहीं मिल पा रही। यूं तो हर काम के लिए अगल-अलग जीएसटी की दर तय हैं, लेकिन औसत दस प्रतिशत से भी लें तो करीब 14 करोड़ का नुकसान विभाग को हुआ है।
ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा गया
ग्राम्य विकास की ओर से इस योजना में जीएसटी नुकसान बचाने के लिए ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा जा रहा है, ताकि बड़े बिल भुगतान करें तो उन पर ग्राम पंचायतों का जीएसटी नंबर अंकित किया जा सके। इसी से पंचायत भी जीएसटी क्लेम कर सकती है। वहीं जीएसटी विभाग को पता चलता है कि जीएसटी किसने जमा की है।
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किसके नाम पर लें जीएसटी नंबर, उलझ रहा मामला
ग्राम पंचायतों के जीएसटी नंबर न लेने के पीछे एक तथ्य और सामने आ रहा है। बार-बार ग्राम पंचायत सचिवों का बदलना और एक योजना के बाद ग्राम प्रधान भी बदल जाता है। ऐसे में जीएसटी किसके नाम पर ली जाए, इसे लेकर मामला उलझ रहा है। अभी तक यह स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
::: वर्जन
ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा गया था। जो बड़े कार्य हैं, उनका भुगतान करते समय जीएसटी नंबर की जरूरत होती है। संबंधित अधिकारियों से इस पर रिपोर्ट मांगी जाएगी।
- केपी सिंह, सीडीओ बिजनौर
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बिजनौर। ग्राम पंचायतों में पिछली योजना में 140 करोड़ का काम बिना जीएसटी नंबर लिए ही करा दिया गया। जीएसटी नंबर न लेने वाली एक या दो नहीं, बल्कि सभी ग्राम पंचायतें हैं। ऐसे में जीएसटी को करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ है। इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारी इस योजना में जीएसटी नंबर दिलाने के लिए ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देश देने की बात कह रहे हैं।
जिले में 1123 ग्राम पंचायतें हैं। पहले की बात करें तो ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान और सचिव की देखरेख में ही छोटे काम हो जाते थे। उनमें ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत सचिव सीधे उन्हें भुगतान कर देते थे, जहां से काम कराने के लिए माल खरीदा जाता था, लेकिन अब ग्राम पंचायतों का बजट बढ़ा तो बड़े काम की लागत लाखों रुपये में पहुंच गई। एक लाख से बड़े काम ग्राम पंचायतों में ठेकेदारों के माध्यम से ही कराए जाते हैं। वहीं कराए गए कार्यों के बिल ठेकेदार जीएसटी के साथ वसूलते हैं। उधर, ग्राम पंचायतों के पास जीएसटी नंबर ही नहीं है, इस कारण यह जीएसटी विभाग को नहीं मिल पा रही। यूं तो हर काम के लिए अगल-अलग जीएसटी की दर तय हैं, लेकिन औसत दस प्रतिशत से भी लें तो करीब 14 करोड़ का नुकसान विभाग को हुआ है।
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ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा गया
ग्राम्य विकास की ओर से इस योजना में जीएसटी नुकसान बचाने के लिए ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा जा रहा है, ताकि बड़े बिल भुगतान करें तो उन पर ग्राम पंचायतों का जीएसटी नंबर अंकित किया जा सके। इसी से पंचायत भी जीएसटी क्लेम कर सकती है। वहीं जीएसटी विभाग को पता चलता है कि जीएसटी किसने जमा की है।
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किसके नाम पर लें जीएसटी नंबर, उलझ रहा मामला
ग्राम पंचायतों के जीएसटी नंबर न लेने के पीछे एक तथ्य और सामने आ रहा है। बार-बार ग्राम पंचायत सचिवों का बदलना और एक योजना के बाद ग्राम प्रधान भी बदल जाता है। ऐसे में जीएसटी किसके नाम पर ली जाए, इसे लेकर मामला उलझ रहा है। अभी तक यह स्थिति साफ नहीं हो पाई है।
::: वर्जन
ग्राम पंचायतों को जीएसटी नंबर लेने को कहा गया था। जो बड़े कार्य हैं, उनका भुगतान करते समय जीएसटी नंबर की जरूरत होती है। संबंधित अधिकारियों से इस पर रिपोर्ट मांगी जाएगी।
- केपी सिंह, सीडीओ बिजनौर